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अभी-अभी रूस ने गुस्से में आकर इस देश से किया जंग का एलान

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ब्रिटेन के सेल्सबरी में पूर्व रुसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी को जहर दिए जाने की घटना के बाद रूस और पश्चिमी देशो के बिच शुरू हुआ विवाद अब बढ़ता ही जा रहा है. मार्च माह के पहले हफ्ते में हुई इस घटना की ब्रिटेन की ओर से कड़ी आलोचन की गयी. इस घटना के बाद ब्रिटेन ने रूस के राजनयिकों को अपने देश से निकलने के आदेश जारी कर दिए. रूस को अमेरिका समेत पश्चिमी राष्ट्रों का समर्थन मिला. इन सभी देशो ने रूस के राजनायको को अपने देश से निकल जाने के आदेश जारी कर दिए थे.

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा आयोजीय एक बैठक में रूस ने ब्रिटेन पर रूस के खिलाफ “मनगढंत कहानी गढ़ने” का भयानक आरोप लगाया है. रूस ने कहा है कि ब्रिटेन आग से खेल रहा है. पूर्व जासूस सर्गेई स्क्रिपल को ज़हर दिए जाने की घटना के बाद जारी तनाव के सिलसिले में बातचित करने के लिए रूस ने यह बैठक बुलायी थी. रूस का कहना था कि “ब्रिटेन को कुछ वैध सवालों के उत्तर देने होंगे.” बैठक में रूस के दूत वेसिली नेबन्ज़ा ने कहा है कि ब्रिटेन का मुख्य उद्देश्य रूस पर बेबुनियाद आरोप लगा कर उसे बदनाम करना और अवैध करार देना है. नेबन्ज़ा ने कहा कि ब्रिटेन “बिना किसी सबूत ख़तरनाक आरोप लगा रहा है. और यह रूस के ख़िलाफ़ प्रोपेगैंडा वॉर चला रहा है.

उन्होंने कहा कि हमले के लिए जिस नोविचोक नर्व एजेंट का इस्तेमाल किया गया वो केवल रूस के पास नहीं हैं. हालांकि ये नाम रूसी है लेकिन कई देशों ने इसे बनाया है. वेसिली नेबन्ज़ा ने कहा, “ये किसी नाटक की तरह लगता है. क्या आपके पास कहने के लिए कोई बेहतर झूठी कहानी नहीं है?” जासूस सर्गेई स्क्रिपल पर हुए जहर प्रयोग के बाद पूरी दुनिया की राजनीती में तूफ़ान आ चूका है. ब्रिटेन में हुए इस हादसे के बाद अमेरिका समेत यूरोप के कई देशो ने ब्रिटेन का समर्थन करते हुए रूस के राजनयिकों को देश दे बाहर कर दिया है. अमेरिका ने रूस की तरफ अपनी दुश्मनी निकालने के लिए इस मौके का फायदा उठाने की बात की जा रही है. लेकिन दुनिया के इन देशों के इस फैसले से रूस के राष्ट्रपति व्लामिदिर पुतिन बेहद गुस्सा हो गए थे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के ६० डिप्लोमैट्स को देश छोड़ने का आदेश दिया है. कनाडा, जर्मनी, पोलैंड, फ्रांस समेत २० देशों ने भी अपने यहां से रूस के ५९ डिप्लोमैट्स से जाने को कह दिया है. ट्रम्प ने सिएटल स्थित रूसी वाणिज्य दूतावास बंद करने का ऐलान कर दिया है. अमेरिका के एक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि रूस के सभी ६० डिप्लोमैट्स अमेरिका में डिप्लोमेटिक कवर के तहत जासूसी कर रहे थे. इनमें करीब १२ से ज्यादा संयुक्त राष्ट्र में रूस के मिशन पर तैनात थे. ट्रम्प का दावा है कि अमेरिका में रूस के १०० खुफिया अफसर हैं. ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा कह चुकी हैं कि हमारी जांच में सामने आया है कि सेल्सबरी में करीब १३० लोग रूस के खतरनाक नर्व एजेंट की चपेट में हो सकते हैं.

रूस के दूत वेसिली नेबन्ज़ा ने इस बैठक में कहा कि रूस किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर मारने की कोशिश क्यों करेगा. उन्होंने कहा कि किसी को मारने के लिए नर्व एजेंट की जगह सैंकड़ों और तरीके हैं जो ब्रितानी टेलीविज़न सिरीज़ ‘मिडसमर मर्डर’ में दिखाए गए हैं. ब्रिटेन का कहना है कि पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया को ज़हर दिए जाने के लिए रूस ज़िम्मेदार है जबकि रूस खुद पर लगे आरोपों से साफ़ इनकार करता आया है. रूस ने बुधवार को इसकी जांच में हिस्सा लेने की गुज़ारिश की थी लेकिन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ प्रोहिबिशन ऑफ़ केमिकल वीपन्स ने रूस की इस मांग को अस्वीकार कर दिया था.एक संवाददाता सम्मेलन में ब्रिटेन के लिए रूसी दूत एलेक्ज़ेन्डर याकोनेन्को ने इसे पारदर्शिता के विरूद्ध बताया है.

संयुक्त राष्ट्र की बैठक में ब्रिटेन के दूत कैरन पीयर्स ने रूस पर आरोप लगाया है कि “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर से हमें सुरक्षित रखने वाले अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को कमज़ोर आंक रहा है.” उन्होंने कहा कि रूस पर शक करने की कई वजहें हैं, “रूस सरकार समर्थित हत्याएं कराती रही है और जो इसकी बात नहीं मानते उन्हें रूस अपना निशाना बनाता हैं.” ब्रिटेन का कहना है कि रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल की बेटी यूलिया स्क्रिपल से मुलाक़ात करने की गुज़ारिश को हमने आगे बढ़ा दिया है, “उनकी इच्छा का भी सम्मान किया जाना चाहिए.” संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के दूत केली क्यूरी ने कहा है कि रूस राजनीतिक फायदों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा काउंसिल का इस्तेमाल कर रहा है जो बिलकूल ही सही नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने गुरुवार को कहा है कि पूर्व रूसी जासूस पर हमले के बाद निर्माण हुई परिस्थितियों से शीत युद्ध जैसे हालात नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों से जिस तरह रूस के राजनयिकों को अपने यहां से निकाला और इसके जवाब में रूस ने भी कदम उठाए, उससे लगता है जैसे हम शीत युद्ध वाले माहौल में रह रहे हों. उन्होंने कहा कि अमेरिका के बाद नाटो और यूरोपीय देशों ने भी १५० से ज्यादा रूसी राजनयिकों को अपने देश से निकाल दिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाऊस ने कहा की “रूस के इस फैसले से अमेरिका और रूस के रिश्ते और अधिक खराब होंगे. रूस के यह कदम बहुत की अनापेक्षित नहीं है और अमेरिका इससे निपट लेगा” अमेरिका ने उसके ६० राजनयिकों को निकालने के रूस के फैसले को गलत बताया है.