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अमेरिका के बाद इस देश का सैन्य हमले के लिए सीरिया की ओर रवाना

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सीरिया में अमेरिका के द्वारा किये गए हमलों के बाद रूस बौखला उठा है. अमेरिका ने धमकी दि थी की सीरिया में हुए रासायनिक हमलों का वह करार जवाब देगा और अमेरिका ने सीरिया सरकार, रूस और ईरान पर इस हमले के आरोप भी लगाये थे. रासायनिक हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरिया पर मिसाइले दाग दी है. अमेरिका को इस हमले में फ्रांस और ब्रिटेन का समर्थन मिला है. साथ ही पश्चिमी देश भी अमेरिका का समर्थन कर रहे है. इन सब घटनाओं के चलते अमेरिका और रूस के बिच चल रहा शीतयुद्ध फिर एक बार सतह पर आ चूका है.

सीरिया में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के हवाई हमले के बाद रूस ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. रूस ने दो युद्धपोतों से बड़ी संख्या में युद्धक टैंक, ट्रक, रडार, गश्ती युद्धपोत और एंबुलेंस सीरिया भेज दिए है. दोनों युद्धपोतों को बोस्पोरूस जलमार्ग से निकलते हुए देखा गया है. हमले के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने धमकी दी थी कि अगर दोबारा सीरिया पर हमला हुआ तो दुनिया में तबाही मच जाएगी. शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाली हवाई हमलों से तीन संदिग्ध रासायनिक हथियारों के ठिकानों को नष्ट कर दिए जाने के बाद सेना के वाहनों के साथ लदा हुए दो रूसी युद्धपोतों को सीरिया के रास्ते में देखा गया है. एक एलिगेटर-लैंडिंग जहाज को रविवार को द बॉस्फोरस में लैंडिंग करते वक्त फोटो लिया गया था.

क्योंकि विश्व ने सीरिया के खिलाफ इस सप्ताह के समन्वयित सैन्य कार्रवाई की व्लादिमीर पुतिन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया है. पोत उत्तरी सीरियन तट पर टारटस में रूसी नौसैनिक बेस के रास्ते पर देखा गया था. रूसी नौसेना बेस से द ब्लू प्रोजेक्ट १७७ एलिगेटर शिप को सीरिया भेजा गया है. इससे सोवियत बीटीआर-८० युद्धक टैंक, सैनिकों को ले जाने वाले ट्रक, रडार सिस्टम और एंबुलेंस भेजे गए हैं. दूसरी शिप से हाईस्पीड गश्ती युद्धपोत, अस्थायी ब्रिज बनाने में उपयोग होने वाली समाग्री और नाव भेजी गई. सैन्य साजोसामान लादते और रवाना होते पोत की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल है. एक पैलेना -१ बम रडार ले जा रहा था, जिसे आईईडीएस का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. एक दूसरे पीले मालवाहक जहाज को एक बीएमके-टी नाव से लैस किया गया था.

उसमें अस्थायी पुल बनाने और अन्य सैन्य हार्डवेयर की एक सरणी थी. सीरिया में असद के शासन के मॉस्को के निरंतर समर्थन के जवाब में संयुक्त राज्य अमेरिका ने नई आर्थिक प्रतिबंधों को रेखांकित किए जाने के बाद, सीरिया पर आने वाली रूसी युद्धपोतों को देखा गया है. पश्चिम एशिया में सीरिया के आसपास अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, तुर्की और ऑस्टेलिया की सेनाओं का जमावड़ा है. यहां पर इन सेनाओं के बेस कैंप हैं. एक तरह से यह सबसे बड़ा सैन्य जमावड़े का क्षेत्र है. सबसे ज्यादा सैन्य अड्डे अमेरिका के हैं. सीरिया में असद के शासन के मॉस्को के निरंतर समर्थन के जवाब में संयुक्त राज्य अमेरिका ने नई आर्थिक प्रतिबंधों को रेखांकित किए जाने के बाद, सीरिया पर आने वाली रूसी युद्धपोतों को देखा गया है.

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की मिसाइलों को जिस तरह से सीरिया ने नाकाम किया है वह एक बहुत ही चौंकाने वाली बात है. रूस की एक न्यूज एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक सीरिया ने मिसाइलों को सीरियाई एयर डिफेंस सिस्टम एस-१२५, एस-२५०, बक और क्वाद्रत की मदत से नाकाम किया है. इन हथियारों को सोवियत संघ ने ३० साल पहले बनाया था. रूस अपना एस-३०० मिसाइल डिफेंस सिस्टम सीरिया को दे सकता है. फिलहाल अभी इसकी घोषणा रूस की ओर से नहीं की गयी है. यह सिस्टम लांच व्हीकल पर तैनात रहता है. इस पर लगे रडार ३०० किमी के दायरे में आने वाली किसी मिसाइल की पहचान कर सकते हैं. एस-३०० की पूरी एक बटालियन में ६ लांचर व्हीकल रहते हैं. इस पर चार मिसाइल तैनात रहती हैं.

हर लक्ष्य के लिए दो मिसाइल दागी जाती है और यह सिस्टम एक बार में ६ लक्ष्य तक को भेद सकता है. पूरे विश्व में अमेरिका के ३८ सैन्य अड्डे हैं. इसमें से एक दर्जन से अधिक सैन्य अड्डे मध्य एशिया में कतर , कुवैत, सऊदी अरब, इराक और इजरायल में स्थित है. अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा सैनिक अड्डा कतर के अल उदैद में है. यहां अमेरिकी बी श्रेणी के बमवर्षक, फाइटर प्लेन के साथ क्रूज मिसाइलें तैनात हैं. इसके अलावा इस क्षेत्र के समुद्र में अमेरिकी नौसेना के जहाज भी गश्ती लगत रहते है. रूस की सीरिया में सीधी मौजूदगी है. उसका सीरिया में नौसेना अड्डा भी है. वह इस सैन्य अड्डे की मदद से सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सेनाओं को प्रशिक्षित कर रहा है.

ब्रिटेन का कतर के अल उदैद और साइप्रस में एयर बेस है. बहरीन में नौसेना का अड्डा है. संयुक्त अरब अमीरात में फ्रांस की एयर बेस पर मौजूदगी. साइप्रस, इराक, कतर और सीरिया में तुर्की के सैन्य अड्डे हैं. रूस अपना एस-३०० मिसाइल डिफेंस सिस्टम सीरिया को दे सकता है. फिलहाल अभी रूस की ओर से कोई भी घोषणा नहीं की गयी है. यह सिस्टम लांच व्हीकल पर ही तैनात रहता है. इस पर लगे रडार ३०० किलो मीटर के दायरे में आने वाली किसी भी मिसाइल की पहचान कर लेते हैं. रूस का कहना है की अमेरिका ने सीरिया पर उस वक़्त हमले किये है जब यहाँ शांति की आशा की जा रही थी. रूस के एक टीव्ही चैनेल ने रविवार को रूस के लोगो से कहा है की वे तीसरे विश्वयुध्द के लिए तैयार रहे.

सीरिया में चल रहे वर्तमान संकट को ध्यान में लेते हुए रूस के सरकारी टीवी ने दर्शकों से तीसरे विश्व युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है. अमेरिका में रूस के इस आकलन की जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है. अमेरिका में कहा जा रहा है कि रूसी ऐसी बेकार की बातों में विश्वास कर रहे हैं. ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से अमेरिकी बम शेल्टर प्रोड्यूसर्स का कारोबार लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका और उसके सहयोगियों ने सीरियाई सेना और केमिकल रिसर्च सेंटर को निशाना बनाते हुए १०० मिसाइलें दाग दी हैं. इस बीच रूस, सीरिया के समर्थन में उतर आया है. रूस के टीवी चैनल ‘रोसिया-२४’ ने तीसरे विश्‍वयुद्ध की संभावना जताई है. टीवी चैनल ने अपने दर्शकों से युद्ध के लिए बंकरों में खाने पीने का सामन रखने की बात कही है. चैनल ने लोगों को पर्याप्‍त मात्रा में आयोडीन का बंदोबस्‍त भी करने की सलाह दी है.