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अमेरिका ने अचानक ही इस देश में तैनात की आर्मी, कभी भी छिड़ सकता है युद्ध

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चीन की खुरापातो से सारी दुनिया परेशान है. चीन दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादनकरता देश है. लेकिन चीन खुद किसी चीजों का अभिकल्प नहीं करता है. चीन के ज्यादातर उत्पादन दूसरों देशो में बांये गए उत्पादनों की नक़ल होते है. इन्ही उत्पादनों को कम दाम में बना कर चीन दुसरे देशों को निर्यात करता है. चीन की ज्यादातर अर्थव्यवस्था इन्ही उत्पादित निर्यात पर चलती है. किन्तु चीन की इस हरकत पर अब कुछ हद तक रोक लगने वाला है. चीन की तरफ से अमेरिका में निर्यात होने वाले उत्पाद पर अब अमेरिका ने भरी मात्रा में कर लागु कर दिया है.

अमेरिका के अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को इस निर्णय पर अपनी मोहर लगा दी है. ट्रंप सरकार चीन से होने वाले आयात पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है. उन्होंने कहा की अमेरिका को लगता है कि चीन अमेरिका की बौद्धिक सम्पदा की चोरी कर रहा है. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ये कदम इसलिए उठाना पड़ रहा है क्योंकि इस मुद्दे पर सालों तक बातचीत के बाद भी चीन के बर्ताव में कोई बदलाव नहीं आया है. इस कारवाई में बाकी चीजों के साथ-साथ चीन पर अतिरिक्त कर भी लगाया जा सकता है. चीन का कहना है कि वह भी करवाई का जवाब देने के लिए तैयार है. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक ट्रंप सरकार चीन पर ३०-६० अरब डॉलर के शुल्क लगाने की ओर कदम बढ़ा रही है.

और साथ ही चीन के निवेश पर नियंत्रण लगाने के बारे में सोच रही है. अमेरिका अपनी शिकायतें विश्व व्यापार संगठन में ले जाने की संभावना भी बताई गयी है. अमेरिका के लिए व्यापारिक मध्यस्थता करने वाले रॉबर्ट लाइटहाइजर ने बुधवार को बताया कि अमेरिका का हेतु है चीन पर अधिकतम दबाव बना रहे और अमरिकी उपभोक्ताओं पर कम से कम दबाव बना रहे. रॉबर्ट लाइटहाइजर ने कहा है कि बौद्धिक संपदा को सुरक्षित रखना अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है. अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है की ‘हमें अमेरिका की बौद्धिक संपदा की चोरी की बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यह हमें अधिक मजबूत, अधिक संपन्न देश बनाएगा.’ अमेरिका के इस फैसले से चीन के साथ उसके संबंधो में तनाव बढ़ने की आशंका है.

चीन पर लगाये शुल्क के अलावा अमेरिका ने चीन पर नए निवेश प्रतिबंध लगाने की भी योजना बनाई हुई है. इसके साथ ही विश्व व्यापार संगठन और राजस्व विभाग भी चीन पर अतिरिक्त कदम उठाएगा. ट्रंप ने गुरुवार को १९७४ के व्यापार अधिनियम की धारा ३०१ का हवाला दे कर एक पत्रण पर हस्ताक्षर किए है. अमेरिका ने चीन पर लगाये बौध्दिक सम्पदा की चोरी के आरोप के नतीजे में यह कार्यवाही की जा रही है. अमेरिका में ७ महीनो की जांच के बाद अमेरिका के व्यापर प्रतिनिधि ने डोनाल्ड ट्रम्प के सामने इसकी रिपोर्ट पेश की. और इसी बल पर अमेरिका ने यह निर्णय लिया है. इस फैसले पर गुरुवार को चीन ने कहा “चीन चुपचाप बैठकर अपने हक और हितों का नुकसान होते नहीं देखेगा और बचाव के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा.”

अमेरिकी व्यापार विभाग के एक अधिकारी ने कहा है की “अमेरिका के पास सबूत हैं कि चीन ऐसे अमेरिकी फर्म की तलाश में है जो उनके साथ भागीदारी कर चीन के बाजार में उतर सके. और फिर अमेरिका पर तकनीक भेजने के लिए दबाव बनाया जा सके.” अमेरिका का कहना है की उन्हें इस बात के भी सबूत मिले हैं कि चीन अमेरिका के महत्वपूर्ण उद्योगों में निवेश को नुकसान पहुंचा रहा है और चीन साइबर अटैक भी करवाता है. ये सब बातें एक जांच से सामने आई हैं. इस जांच के आदेश राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में दिए थे. व्यापार कानून के तहत सरकार के पास अधिकार है कि वह उन देशों पर एकतरफा प्रतिबंध लगा सकती है जो व्यापार में गड़बड़ी कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के मुकाबले अपने व्यापार घाटे को लेकर इससे पहले भी कई बार आवाज उठाई है.

चीन ने रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी थी. चीन ने कहा था कि अगर वॉशिंगटन व्यापारिक युद्ध शुरू करता है तो उसे इसका नतीजा भुगतना होगा. चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस के प्रवक्ता जेंग येस्यूई ने एक प्रेस वार्ता में कहा था की चीन अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर नहीं चाहता है लेकिन अमेरिका उनके हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदम उठता है तो चीन चुप नहीं बैठेगा और आवश्यक कदम उठाएगा. अमेरिका और चीन के बिच का व्यापार साल २०१६ में ५७९ अरब डॉलर का रहा, जिसमे चीन ने अमेरिका से ११५.८ अरब डॉलर का सामान आयात किया और अमेरिका ने चीन से ४६२.८ अरब डॉलर का सामान आयात किया. साल २०१७ में अमेरिका ने चीन से ३७५ अरब डॉलर का घटा उठाया है.