Home देश अमेरिका ने नेपाल पर लिया ये ताबडतोब एक्शन, हिल उठा पूरा नेपाल

अमेरिका ने नेपाल पर लिया ये ताबडतोब एक्शन, हिल उठा पूरा नेपाल

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डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद यहाँ के कायदे कानून बड़ी तेजी से बदल रहे है. इनमे राष्ट्रपति की नजर दुसरे देशो से अमेरिका में आने वाले लोगो पर सबसे ज्यादा रही है. अमेरिका में बढती बेरोजगारी और एनी समस्याओं के लिए वे दुसरे देशो से आनेवाले लोगों को जिम्मेदार मानते है.

अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार देश में बेरोजगारी पर मात करने के लिए अमेरिकी नागरिकों को प्राधान्य मिलना जरुरी है. अमेरिका में एनी देशो से आनेवाले लोगो ने भरी मात्रा में यहाँ की नौकरीयों पर कब्ज़ा कर लिया है. ट्रम्प प्रशासन अमेरिका में रहने वाले विदेशी नागरिकों को मिला अस्थायी स्टेटस खत्म कर उन्हें देश से निष्कासित करना चाहता है. इसी के तहत अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग नेपाल के ९००० अप्रवासी नागरिकों के अस्थायी निवास परमिट रद करने की तैयारी की जा रही है. ऐसे में हजारों नेपालियों को एक साल के भीतर अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना होगा. ‘वाशिंगटन पोस्ट’ द्वारा देखे गए दस्तावेजों के मुताबिक गृह सुरक्षा विभाग की सचिव कर्स्टनजेन नेल्सन ने नेपाली नागरिकों को उनके अमेरिका छोड़ने के लिए एक साल की छूट दे दी है.

इस हिसाब से उन्हें २४ जून २०१९ के बाद निर्वासन का सामना करना पड़ेगा. हालांकि नेपाल के फैसले पर अभी नील्सन ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं लेकिन आंतरिक दस्तावेज बताते हैं कि एजेंसी आगामी दिनों में अपनी घोषणा करने की तैयारी कर रही है. नील्सन ने सीरियाई लोगों के मामले में जनवरी में टीपीएस स्टेटस के जारी रखने की बात कही थी लेकिन नेपाल के मामले में ऐसा नहीं हुआ, साल २०१५ में नेपाल में आए भूकंप के बाद इन नेपाली नागरिकों को यहां अस्थायी संरक्षण स्थिति (टीपीएस) के तहत कानूनी रूप से रहने की अनुमति मिली हुई है. लेकिन अमेरिका ने इस अस्थायी परवाने को रद्द करने का फैसला कर लिया है. एक जानकारी के मुताबिक साल २०१५ में नेपाल के भूकंप के बाद करीब १५००० नेपाली प्रवासियों को टीपीएस स्टेटस मिला था.

लेकिन देश में सिर्फ ९००० नेपाली ही रह रहे हैं. नेपाली लोगों को यह अनुमति अवैध ढंग से अमेरिका जाने के लिए नहीं बल्कि साल १९९० में अमेरिका में बने कानून के तहत नेपाल में आए भीषण भूकंप और प्राकृतिक आपदा के चलते मिली थी. नेपाल में २५ अप्रैल २०१५ को आए भीषण भूकंप और उसके बाद से लगातार हो रहे भूकंप बाद के झटकों से उसकी बिगडी हालत के आधार पर लिया गया यह फैसला था. अस्थायी संरक्षण दर्जा विदेशियों के किसी समूह को उनका वीजा समाप्त हो जाने के बाद भी अमेरिका में रहने की इजाजत देता है.अमेरिका ने उस वक़्त उसके नागरिकों को अस्थायी संरक्षण दर्जा देने और कुछ समय तक देश में रहने देने की घोषणा की थी. आंतरिक सुरक्षा मंत्री जेह जॉनसन ने कहा था कि “नेपाल को १८ महीनों के लिए अस्थायी संरक्षण दर्जा देने का निर्णय किया गया है.

अमेरिका में रह रहे योग्य नेपाली नागरिक अब इस दर्जे के लिए आवेदन कर सकते हैं और यहां काम करने का परमिट ले सकते हैं. जो लोग अगले छह महीनों में इसके लिए आवेदन करेंगे वे २४ दिसंबर २०१६ तक इस कार्यक्रम के तहत आएंगे.” नेपाल में २५ अप्रैल २०१५ को आए भीषण भूकंप में लगभग ९ हजार लोगों की मौत हो गई थी और २३ हजार के आसपास लोग घायल हो गये थे.इस तबाही में ५ लाख से ज्यादा इमारतें जमींदोज हो गईं और हजारों लोग बेरोजगार हो गए थे. ट्रम्प प्रशासन फिलहाल देश में मौजूद विदेशी नागरिको पर कड़े फैसले लेने में मग्न है है. हाल ही में ट्रम्प सरकार द्वारा अमेरिकी वीजा के नियमों में सकती लाने पर भी प्रक्रिया शुरू होने की घोषणा की गयी थी.

ट्रम्प प्रशासन अब अमेरिका के वीसा के लिए कानून और भी सख्त बनाने जा रहा है. इसमें उनकी नजर सबसे अधिक एच- 1 बी वीसा धारको पर होगी. अमेरिकी नागरिकता एवं आप्रवासन सेवा (यूएससीआईएस) के मुताबिक यह कदम वीजा में धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया जा रहा है. एच-1 बी वीजा धारक की पत्नी या पति को अमेरिका में कानूनी तौर पर काम करने का अधिकार प्राप्त है. ट्रंप सरकार इस सुविधा को खत्म करने पर विचार कर रही है. शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने अमेरिकी कांग्रेस को इसकी जानकारी दी है. इससे हजारों भारतीयों के प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. संघीय एजेंसी के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि बेहतरीन और सर्वश्रेष्ठ विदेशी प्रतिभाओं को आर्किषत करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

डोनल्ड ट्रंप प्रशासन के एच-1 बी वीज़ा में बदलाव करने के प्रस्ताव की ख़बर भारतीय मीडिया में सुर्खियां बन कर छा गईं थीं. अमरीका में रहने वाले कई भारतीयों और भारत में रहने वाले उनके परिवारों के लिए भी ये परेशानी का सबब बन गई. तकनिकी सेक्टर में काम करने वाली कई बड़ी कंपनियां अमरीका में हैं. ये कंपनियां काम के लिए विदेश से आए एच-1 बी वीज़ा धारकों पर निर्भर करती हैं. अमरीका का आरोप है कि कुछ कंपनियां वीज़ा नियमों में मौजूद खामियों का लाभ उठा रही हैं और एच-1 बी वीज़ा नियमों का उल्लघंन कर रही हैं. अप्रैल २०१७ में व्हाइट हाउस ने आरोप लगाया था कि टीसीएस, इंफ़ोसिस और कॉग्निजेंट जैसी आईटी कंपनियां वीज़ा पर जितने लोग रख रहे हैं उससे ये साफ़ समझा जा सकता है कि वो वीजा के नियमों का उल्लंघन करके ऐसा कर रहे हैं.