Home विदेश अमेरिका ने रोहिंग्या मुसलमानों पर अचानक ही ले लिया ये बड़ा फैसला

अमेरिका ने रोहिंग्या मुसलमानों पर अचानक ही ले लिया ये बड़ा फैसला

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इन दिनों रोहिंग्या मुसलामानों की समस्या हर देश की सुर्खियों में है. इस मुस्लिम समुदाय की आबादी और इनपर चल रहे विवादों की वजह से यह काफी चर्चा में है. बांग्लादेशी राजदूत सैयद मुअज्जम अली ने रोहिंग्या समस्या को वर्तमान समय का सबसे बड़ा मानवीय संकट बताते हुए कहा है कि अब म्यांमार बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों को धीरे-धीरे वापस लेने पर राजी हो गया है. दोनों देशों में यह समझौता एक सप्ताह पहले ही हुआ है. म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है. म्यांमार में एक अनुमान के मुताबिक़ १० लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं. इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं.

सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है. हालांकि ये म्यामांर में पीढ़ियों से रह रहे हैं. रखाइन स्टेट में साल २०१२ से सांप्रदायिक हिंसा जारी है. इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई हैं और एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान आज भी जर्जर कैंपो में रह रहे हैं. रोहिंग्या मुसलमानों को व्यापक पैमाने पर भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है. लाखों की संख्या में बिना दस्तावेज़ वाले रोहिंग्या बांग्लादेश में रह रहे हैं. इन्होंने दशकों पहले म्यांमार छोड़ दिया था. रोहिंग्या कार्यकर्ताओं का कहना है कि 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. म्यामांर के सैनिकों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के संगीन आरोप लग रहे हैं.

म्यांमार के सैनिकों पर प्रताड़ना, बलात्कार और हत्या के आरोप लग रहे हैं. लेकिन म्यांमार सरकार ने इन आरोपों का साफ़ इनकार कर दिया है. म्यांमार की प्रमुख नेता आंग सान सू ची इन मामलों में कोई भी बयान नहीं दे रही है. वे पूरी तरह से चुप हैं. वह इस मामले में पत्रकारों से बात भी नहीं कर रही हैं. उन्होंने कहा था कि रखाइन स्टेट में जो भी हो रहा है वह ‘रूल ऑफ लॉ’ के तहत ही हो रहा है. इस मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आवाज़ उठ रही है. म्यांमार में रोहिंग्या के प्रति सहानुभूति न के बराबर है. रोहिंग्या के ख़िलाफ़ आर्मी के इस क़दम का म्यांमार में लोग जमकर समर्थन कर रहे हैं. बांग्लादेश ने कहा कि परेशान लोग सीमा पार कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में यहां आ रहे हैं.

बांग्लादेश अथॉरिटी की तरफ से सीमा पार करने वालों को फिर से म्यांमार वापस भेजा जा रहा है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसकी कड़ी निंदा की है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. बांग्लादेश रोहिंग्या मुसलमानों को शरणार्थी के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा है. रोहिंग्या और शरण चाहने वाले लोग १९७० के दशक से ही म्यांमार से बांग्लादेश आ रहे हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच ने एक सैटलाइट तस्वीर जारी की थी. इसमें बताया गया था कि पिछले साल में रोहिंग्या मुसलमानों के कई हजारो घरों को तोड़ दिया गया है. म्यांमार के रोहिंग्या समंदर पार कर या फिर पैदल ही अपने घर छोड़कर भाग रहे हैं. यहाँ का रास्ता बिलकुल आसान नहीं है. लेकिन मौत का डर छोड़ कर वो जान हथेली पर रखकर सफ़र कर रहे हैं.

उनका आरोप है कि वे सेना के हमलों से परेशान होकर ऐसा कर रहे हैं. रोहिंग्या संकट मामले पर अमेरिका ने बांग्लादेश का समर्थन करने का आश्वासन दिया है. बुधवार को बांग्लादेश ने अपना ४८वा स्वतंत्र दिवस मनाया. यह जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्‍ता हीथर नॉर्ट ने दी है. बांग्‍लादेश के ४८वे स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर बुधवार को हीथर नॉर्ट ने बांग्‍लादेश दूतावास में अपने संबोधन में कहा, ‘आपके प्रयासों को समर्थन देने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय के साथ करीबी कोऑर्डिनेशन के साथ अमेरिका ने रोहिंग्‍या को करीब ११० मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता दी है और बांग्‍लादेश में पिछले अगस्‍त माह से समुदाय की देखभाल भी कर रहा है. इस मामले में हम आपके कंधे से कंधा मिलाकर काम करना जारी रखेंगे, न केवल आर्थिक मदद के जरिए बल्‍कि उनके सम्‍मानजनक, स्‍वैच्‍छिक और सुरक्षित बर्मा वापसी तक यह समर्थन जारी रहेगा.’

नॉर्ट ने आगे बताया है कि रोहिंग्‍या संकट में अमेरिका का यह सहयोग बांग्‍लादेश के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंध का परिणाम है और साथ ही उन्‍होंने आगे भी इन संबंधों को मजबूत बनाए रखने की इच्‍छा जाहिर की है. पिछले साल अगस्‍त में म्‍यंमार आर्मी कैंपेन की क्रूर कार्रवाई के बाद बांग्‍लादेश के रिफ्यूजी कैंपों में करीब ६ लाख से भी अधिक विस्थापितों ने शरण ले रखा है. पिछले साल नवंबर में कॉक्‍स बाजार के रोहिंग्‍या शिविरों में अपने दौरे के बारे में उन्‍होंने बताया कि शरणार्थियों के हालात देख कर उन्‍हें बहुत दुख हुआ और बांग्‍लादेश के लोगों के लिए खुशी भी हुई. जिन्‍होंने रोहिंग्‍या के लिए अपने देश में जगह डी और पुरे दिल के साथ उनका स्वागत किया. नॉर्ट का यह बांग्‍लादेश दौरा अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्‍ता के तौर पर पहला विदेशी दौरा था.

इस दौरे में उन्‍होंने यूएस-बांग्‍लादेश पार्टनरशिप डायलॉग में भी हिस्‍सा लिया. मंगलवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कार्यक्रम में बोलते हुए मुअज्जम अली ने कहा कि हमें खुशी है कि लगातार अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर हम म्यांमार के साथ यह समझौता करने में कामयाब रहे हैं. जिसके तहत म्यांमार अपने यहां से जबरन भगाए गए रोहिंग्या मुस्लिमों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने को तैयार हो गया है. मुअज्जम अली के अनुसार बंगलादेश में २५ अगस्त, २०१७ के बाद से अब तक करीब सात लाख रोहिंग्या मुस्लिम आ चुके हैं. जबकि चार लाख रोहिंग्या उसके पहले बंगलादेश आ चुके थे. अली के अनुसार भारत ने बंगलादेश में रह रहे इन शरणार्थियों के लिए न सिर्फ राहत सामग्री भिजवाई, बल्कि उनकी वापसी का मुद्दा भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत आगे भी इस मुद्दे पर बंगलादेश की मदद करता रहेगा.