Home विदेश इजराइल ने इस मुस्लिम देश पर किया हमला, मचा मौत का तांडव

इजराइल ने इस मुस्लिम देश पर किया हमला, मचा मौत का तांडव

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इजराइल की सीमा पर इसरायली सेना और फिलिस्तानी नागरिको में  शुक्रवार को ज़ड़प हुई. इस हादसे में १२ से ज्यादा लोगों किमुत की आशंका बताई गयी है तो वही सैंकड़ो लोग घायल भी हो चुके है. घायल लोगो में कुछ की हालत गंभीर होने के कारण मृतों की संख्या बढ़ने की सम्भावना है. गाजा-इजरायल बॉर्डर पर शुक्रवार को हजारों फिलिस्तीनी नागरिकों ने प्रदर्शन किया. ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न कहे जाने वाले ६ हफ्ते के विरोध प्रदर्शन के पहले दिन इजरायली सेना से झड़प में आये फिलिस्तानी नागरिकों का यह संघर्ष हिंसा में बदल गया. फिलिस्तानियों के विरोध के लिए इजराइल-गाझा सीमा पर ५ शिविर बनाये गए है.

यह गोलीबारी तब हुई जब सीमा के करीब हजारों की संख्या में फलस्तीनी नागरिक मार्च ऑफ रिटर्न नाम से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. प्रदर्शन कर रही भीड़ पर इसरायली सेना द्वारा ६ जगहों पर फायरिंग की गई. शुक्रवार सुबह फिलिस्तीनियों ने ‘ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न’ कहे जाने वाले छह हफ्तों के विरोध प्रदर्शन की शुरुआत गाजापट्टी में की. यह जगह इजरायल की सीमा से लगती है और यहां बड़ीं संख्या में इजरायली सैनिक तैनात रहते हैं. फिलिस्तान के प्रसार माध्यमो से मिली जानकारी के अनुसार यहाँ पर करीब ७००० लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे है. फिलिस्त्तानी रेड क्रेसेंट ने कहा है की इजराइल से हुई लाइव फायर से नागरिकों की मौत हुई है और कई लोग घायल भू हुए है. और इजराइली सेना ने आसू गैस का भी प्रयोग किया था.

इस विरोध प्रदर्शन से पहले इसरायली अधिकारियो ने बताया की इसरायली टैंक की आग ने एक २७ वर्षीय किसान की मौत हो गयी थी. और दक्षिण में एक और आदमी घायल हो गया था. गाजा पट्टी पर हावी होने वाले एक आतंकवादी संघटन ने इजराइल पर आरोप लगाया है की वह सीमा क्षेत्र में रहने वाले किसानों को मार कर फिलिस्तानियों को डरा रहा है. और विरोध में भाग ना लेने के लिए कह रहा है. यहाँ मौजूद प्रदर्शनकारियों ने इस्राइली सेना पर पत्थरों, जलते टायरों और फायरबम से हमला किया. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पहले इस्राइली बलों ने रबर की गोलियां और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद उन्होंने फिलिस्तीनी नागरिकों को काबू में करने के लिए उन पर गोलियां बरसा दीं. हाल के महीनों में यह सबसे ज्यादा रक्तरंजित दिन रहा.

मरने वालो में एक किशोर बालक भी शामिल है. इजराइली सेना द्वारा की गई कार्रवाई की चौतरफा निंदा होता देख इजराइल ने सफाई पेश की है. इजरायली सेना के प्रवक्ता का कहना है कि, ‘दक्षिणी गाजा पट्टी में दो संदिग्ध लोगों ने सुरक्षा दीवार को भेदने की कोशिश की, जिसके जवाब में इजरायली सेना ने उन पर गोलिया चलायी. इजरायल के विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये इजरायल के साथ तकरार को भड़काने का सोचा समझा प्रयास था. इजरायल द्वारा ये बमबारी उस वक्त की जब कुछ ही देर बाद सीमा के पास नजदीक फिलीस्तीनी प्रर्दशन करने वाले थे. जानकारों का कहना है कि इसी प्रदर्शन को देखते हुए इजरायल ने ये बमबारी की थी. इस हमले में घायल और मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोल दागे थे. लेकिन वे दंगाई पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी से बाज नहीं आ रहे थे. हालात को नियंत्रण में करने के लिए सेना ने केवल दंगाइयों को ही निशाना बनाया था. सेना के मुताबिक, दंगाइयों ने जवानों को भी जान से मारने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों ने सीमा पर बनी सुरक्षा दीवार को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया. इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इसे इजरायल से जानबूझकर टकराव बढ़ाने के लिए किया गया प्रयास बताया है. साथ ही इसके लिए फिलिस्तीन के संगठन हमास को जिम्मेदार बताया.फिलिस्तीनी में ३० मार्च को ‘भूमि दिवस’ मनाया जाता है. साल १९७६ में इसी दिन जमीन हड़पने के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इजरायली सैनिकों ने छह फिलिस्तीन नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था.

फलस्तीनी प्रदर्शनकारी अपने कस्बों और गांवों में लौटने की मांग कर रहे हैं. १९४८ में इजरायल के निर्माण के समय उनके परिवारों को वहां से या तो भागना पड़ा था या जबरन भगा दिया गया था. लेकिन, इजरायल इसके लिए तैयार नहीं है. उसे डर है कि अरबों के आगमन से उसकी यहूदी बहुलता खतरे में पड़ जाएगी. इजराइल और फिलिस्तान के बिच का यह संघर्ष एक अरब-इजराइल संघर्ष की एक लम्बी कड़ी है. असल में, यह दो समूहों के बिच एक हि क्षेत्र पर किये गए दावे का संघर्ष है. द्वि-राज्य सिद्धांत के लिए यहाँ कई प्रयास किये गए, जिसमें इजराइल से अलग एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य बनाने के लिए कहा गया था. वर्तमान में, इसरायली और फिलिस्तीनियों की बहुमत चाहती है की, द्वि-राज्य सिद्धांत पर इस संघर्ष को ख़त्म कर दिया जाए.

कई फिलिस्तीनी हैं जो पश्चिम किनारे और गाज़ा पट्टी को भविष्य का अपना राज्य के रूप में देखते हैं, जिस नजरिये को कई इसरायलीयों ने स्वीकारा भी कर लिया है. कुछ जानकार एक-राज्य सिद्धांत की वकालत करते हैं और पुरे इजराइल, गाज़ा पट्टी और पश्चिम किनारे को एक साथ रखकर, दो राष्ट्रीयता को एक साथ रखकर एक राज्य बने जिसमें सब के लिए समान अधिकार हो. कुछ ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं जिनके कारण किसी भी अंतिम निर्णय पर पहुँचने में दोनों पक्ष में असंतोष दिखाई देता है और दोनों पक्षों में एक दुसरे के ऊपर विश्वास का स्तर भी कमजोर है, हर एक पक्ष में कुछ बुनियादी प्रतिबद्धता कायम रखे हुए दिखाई देता है. गाजा पट्टी एक छोटे सा फिलिस्तीनी क्षेत्र है, यह मिस्र और इसरायल के मध्य भूमध्यसागरीय तट पर स्थित है. फिलिस्तीन अरबी और बहुसंख्य मुस्लिम बहुल इलाका है. इस पर ‘हमास’ द्वारा शासन किया जाता है जो इजरायल विरोधी आतंकवादी समूह है. क्योंकि फिलिस्तीन और कई अन्य मुस्लिम देश इजरायल को यहूदी राज्य के रुप में मानने से इनकार करते हैं