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इसरो ने किया ये नया आविष्कार, अमेरिका सहित अन्य देशों ने की तारीफ

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परमाणु घडि़यों पर ऊंचाई, गहराई, वातावरण तथा जलवायु का कोई प्रभाव नहीं होता और न ही गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव होता है. यह समय का संदर्भ किसी भी प्रयोगशाला में आसानी से बनाए रखा जा सकता है. इसको आग, पानी या अन्य किसी प्राकृतिक प्रकोप से समाप्त नहीं किया जा सकता.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने सफलता की नई ऊंड़ान भरी है. एक ऐसी परमाणु घड़ी विकसित की है, जिसका इस्तेमाल अब नेविगेशन सैटेलाइट्स में किया जाएगा.जिसके जरिए एकदम सही लोकेशन डेटा मिल सकेगा.यह समय का संदर्भ किसी भी प्रयोगशाला में आसानी से बनाए रखा जा सकता है. इसको आग, पानी या अन्य किसी प्राकृतिक प्रकोप से समाप्त नहीं किया जा सकता.अभी तक इसरो को अपने नेविगेशन सैटलाइट्स के लिए यूरोपियन ऐरोस्पेस मैन्युफैक्चरर ऐस्ट्रियम से परमाणु घड़ी खरीदनी पड़ती है.लेकिन अब इसरो ने दूसरी पार्टी पर निर्भरता को खत्म करने के लिए देसी परमाणु घड़ी विकसित की है, इससे भारत का नेविगेशन सिस्टम (जीपीएस) और ज्यादा मजबूत होगा.अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) के निदेशक तपन मिश्रा ने कहा, ‘एसएसी ने स्वदेशी परमाणु घड़ी बनाई है और फिलहाल इस घड़ी को परीक्षण के लिए रखा गया है.

मिश्रा ने कहा, देसी परमाणु घड़ी विकसित करने के बाद इसरो दुनिया के उन कुछ अंतरिक्ष संगठनों में शामिल हो गया है जिनके पास यह बेहद जटिल तकनीक है.हमें आयातित परमाणु घड़ी के डिजाइन और तकनीक के बारे में नहीं पता है.लेकिन यह देसी घड़ी हमने अपने डिजाइन और विनिर्देशो के आधार पर बनाई है. यह घड़ी आयातित की तरह ही अच्छी है. हमें उम्मीद है कि यह आसानी से पांच सालों तक काम कर लेगी.उनका ये भी कहना है की एसएसी ने देसी परमाणु घड़ी बनाई है और फिलहाल इस घड़ी को कई तरह के परीक्षण के लिए रखा गया है.जैसे ही यह सभी परीक्षणों को सफलतापूर्वक पार कर लेगी. इस देसी परमाणु घड़ी को प्रायोगिक तौर पर नैविगेशन सैटेलाइट में इस्तेमाल किया जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि अंतरिक्ष में यह कब तक टिक सकती है और साथ ही कितना सटीक डेटा मुहैया करवा सकती है.

भारत के रीजनल नैविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) के तहत लॉन्च की गई सभी सातों सैटेलाइट में से तीन में आयात की हुई रुबिडियम परमाणु घड़ी लगी हुई हैं. इस परमाणु घड़ियों के कामकाज पर बात करते हुए तपन मिश्रा ने बताया कि पहले लॉन्च की गईं सातों सैटेलाइट में लगी परमाणु घड़ी को एक समय के साथ जोड़ दिया गया था. अलग-अलग ऑर्बिट में लगी सैटेलाइट्स में इन घड़ियों के बीच लगे समय इंटर नैविगेशन रिसीवर पृथ्वी पर किसी वस्तु की सटीक पोजिशनिंग बताने में मदद करते हैं.अगर परमाणु घड़ी में खराबी आती है, तो इसके और अन्य घड़ियों के बीच समय के अंतर ठीक से पता नहीं लगेगा, जिसके परिणामस्वरूप यह किसी भी वस्तु की गलत पोजिशनिंग (स्थिति) बताएगा.परमाणु घड़ियों के अलावा नेविगेशन सैटलाइट्स में क्रिस्टल घड़ी भी होती हैं, लेकिन ये परमाणु घड़ियों की तरह सटीक जानकारी नहीं देती. यही वजह है कि अगर किसी सैटलाइट की तीन परमाणु घड़ियां खराब होती हैं, तो नए परमाणु घड़ी के साथ बैकअप सैटलाइट लॉन्च करनी पड़ती है.