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इस क्षेत्र में पूरी दुनिया में भारत का बजा डंका, सभी देश पीछे रहते टॉप में हुआ शामिल

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वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए कदमों ने परिणाम देने शुरू कर दिए हैं क्योंकि भारत प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित वैज्ञानिक शोध पत्र के क्षेत्र में जापान, फ्रांस, इटली, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से आगे बढ़ गया है.मोदीजी के नेतृत्व में सहोद को भरपूर ज्यादा बढ़ावा मिला है.

पिछले १० साल से एक अंतर पड गया था जो हर क्षेत्र में मोदीजी की वजह से अब भारत का कद बड गया है.अभी एक आंतर्राष्ट्रीय एजेंसी की बड़ी चोकाने वाली रिपोर्ट सामने है जिसमे भारत दिग्गज देश को पीछे छोड़ कर आगे निकला है.शोध के क्षेत्र में भारत ने बड़ा कदम उठाया है.एल्सेवियर की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सिर्फ तीन वर्षों में फ्रांस और जापान के पीछे छोड़कर अनुसंधान के क्षेत्र में शीर्ष पांच देशों का हिस्सा बन गया है। अब अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और जर्मनी अनुसंधान के संदर्भ में भारत से आगे हैं.दुनिया भर के शोध कार्य पर नज़र रखने वाले स्कोपस एजेंसी ने ये रिपोर्ट दी है.विशेष रूप से, एल्सेवियर एक प्रतिष्ठित वैश्विक प्रकाशन घर है जो लेंससेट, सेल, ऑनलाइन उद्धरण डेटाबेस स्कोपस, साइंसडायरेक्ट इत्यादि सहित २५०० पत्रिकाओं को प्रकाशित करता है.

ये देख कर पूरी दुनिया आज हैरान है.भारत में पहले से कौशलता मौजूत था पर परन्तु सही सरकर ना होने के वजह से कौशल का भ्रष्टाचार से गला घोट दिया था.रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष २०१४ से २०१७ तक, भारत के कुल ५५८६३० शोधकर्ताओं ने ५६४३६९ पत्र प्रकाशित किए, जो दुनिया में पांचवां सबसे ज्यादा है.प्रकाशित शोध का मुख्य आकर्षण यह है कि ८७ प्रतिशत से अधिक कागजात विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान पर थे, जबकि सामाजिक विज्ञान से संबंधित अनुसंधान का प्रतिशत केवल २.३ था. इंजीनियरिंग इस विषय में १४.४ प्रतिशत शोध कार्यों के साथ पहली स्थिति में है, जबकि मेडिसिन दूसरे स्लॉट में १०.६ फीसदी शोध पत्र और कंप्यूटर साइंस १०.६ फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है.प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए श्रेय देते हुए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शोध के लिए दिए गए जोर का नतीजा यह है कि भारत ७ वें से ५ वें स्थान पर दो इंच तक बढ़ गया है क्योंकि इसमें सबसे बड़ा योगदानकर्ता है स्कोपस में पत्रिकाओं के प्रकाशनों के लिए दुनिया.

शोध उत्पादन में असाधारण वृद्धि के लिए भारत के वैज्ञानिक समुदाय को बधाई देते हुए जावड़ेकर ने कहा, “२०१० से २०१४ के बीच के वर्षों की तुलना में भारत में प्रति वर्ष उत्पादित औसत शोध ५० प्रतिशत अधिक है.”भारत के लिया दुनिया भर से कोने कोने से खबरे आ रही है.चीन को पछाड़ कर अज भारत देश सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है.भारत इसी तरह अगेअने वाले ३ साल में भी प्रगति आगे करेगा.ये कहना है दुनिया कि हर एक बड़ी एजेंसी का.अब कोई ऐसा नहीं बचा जो भारत की प्रशंसा नहीं कर रहा.आप को ये सुनकर बड़ी हैरानी होगी की मोदीजी सरकर बनाने के बाद पतली हालत में चल रहा देश का विदेश मुद्रा भंडार पिछले ४ सालों में जबरदस्त रफ़्तार पकड़ा है.विदेशी मुद्रा भंडार सारे रिकॉर्ड तोड़कर सबसे ऊँचे स्थर पर पहुँच गया है.