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इस देश के एक छोटेसे इलाके पर हुआ India का कब्ज़ा, PM मोदी का कमाल

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भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी हाल ही में ओमान के दौरे से लौटे है. उनके इस दौरे से देश को बहुत ही फायदा हुआ है. ओमान और भारत के बिच हुए कुछ समजौतों से चीन के लिए चिंताजनक स्थिति निर्माण हो गयी है.

भारतीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी फरवरी के दुसरे हफ्ते ओमान के दौरे पर गए थे. इस दौरान द्विपक्षीय चर्चा हुई और ८ समजौतो पर हस्ताक्षर किये गए. इनमे से एक समजौते के अनुसार भारत को ओमान के दुक्म बंदरगा का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गयी है. इस बात को सुन कर चीन घबरा गया है. इससे अब भारत चीन को रणनीतिक तौर पर करारा जवाब दे पायेगा. चीन के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत बनाने के लिए और हिन्द महासागर में अपनी सामरिक स्थिति और भी शक्तिशाली बनाने में यह कदम बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होगा. इस बंदरगा का उपयोग भारत सैन उपयोग के लिए भी कर पायेगा. भारत ने हासिल की सफलता से चीन में काफी खलबली मची हुई है. भारत की स्थिति अब चीन से कयी गुना ज्यादा मजबूत है.

भारत ने ईरान के चाबहार बन्दर तक व्यवसायीक पहुच हासिल कर ली है. और भारत को ओमान के दुक्म बंदरगा को उपयोग करने की अनुमति भी मिल गयी है. भारत अब इस बंदरगा की सीमा तक अपने जहाज सैर कर सकता और भारतीय नौसेना भी इसका प्रयोग अब कर सकती है. अब यदि चीन ने ग्वादर बंदरगा का उपयोग मिलिट्री तल के रूप में करने का निर्णय लिया तो भारत इसका करारा जवाब दे सकेगा. ओमान के सुल्तान सैय्यद कसुब बिन सैय्यद अल सैय्यद के साथ सैन समजौते पर भी हस्ताक्षर किये. जिसके अंतर्गत, दुक्म बंदरगा और ड्राई डॉक का उपयोग भारतीय जहाजो के संधारंण में किया जा सकेगा. दुक्म बंदरगा एक महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्र भी है. यहाँ पर भारतीय कंपनियों से करीब करीब १.८ बिलियन डॉलर का निवेश भी किया जायेगा.

अदानी ग्रुप ने दुक्म बंदरगा के साथ एक समजौते पर हस्ताक्षर किये हुए है. अभी तक इसके अंतर्गत कोई निवेश नहीं किया गया है लेकिन जल्द ही होने की संभावना है. दोनों देशो के बिच हुई द्विपक्षीय चर्चा काफी फलदायी रही है. प्रधान मंत्री नरेन्द्रे मोदी ने कहा की ओमान के सुलतान के तरफ से किये गए व्यापारिक तथा राजनैतिक प्रयासों का वह पुरे दिल से स्वागत करते है. भारत ने पिछले साल सितम्बर में एक पंडू भेजा था. इस के साथ ही भारतीय नौसेना का आई एन एस मुंबई जहाज और दो ‘पी एस ८’ निगरानी विमान भी भेजे गए थे. भारत की गतिविधियाँ अब दुक्म पोर्ट और हिन्द महासागर में बढती नजर आ रही है. दुक्म बंदरगा और ईरान का चाबहार बंदरगा दोनों पास ही मैं बसे हुए है.

कांग्रेस ने पिछले इतने सालो के राज में ऐसे कोई भी प्रयास नहीं किये थे जिनसे देश की स्थिति मजबूती की ओर बढे. उन्होंने कश्मीर समस्या को बढ़ते रहने दिया और चीन ने भारत की कुछ जमीन पर कब्ज़ा कर लिया तब भी वे चुप रहे. यहाँ तक की उन्होंने यूनाइटेड नेशन्स की सिक्यूरिटी कौंसिल की सदस्यता को भी ठुकरा दिया. उन्होंने इजराइल से सम्बन्ध बढ़ने पर भी कभी कोई कदम नहीं बढ़ाये. रूस से नाराजगी पैदा होने के डर से उन्होंने अमेरिका तक को दूर रखा. वही पी एम नरेन्द्र मोदी ने सिर्फ ४ सालों के अवधि में इन सभी देशो से गहरी दोस्ती प्रस्थापित कर ली है. इन देशो की मदत से भारतको राजनैतिक फायदा तो मिला ही, साथ ही देश की आर्थिक तरक्की भी हो रही है.

नरेन्द्र मोदी के इस दौरे के बाद दोनों देशो ने एम ओ यु पर भी गौर किया. यह एक सैन्य सम्बन्धी समजौता है. इसपर २००५ में हस्ताक्षर किये गए और २०१६ में इसका नवीकरण किया गया. इस एम ओ यु के अंतर्गत दोनों देशो में मिलिट्री सहयोग पर जोर दिया है. दोनों देशो के बिच तटरक्षक बालो में सहयोग का भी इसमें समावेश किया गया है. इन सभी मुद्दों की वजह से पी एम मोदी का यह दौरा विशेष माना गया है. इन समजौतो पर हस्ताक्षर और उनके नतीजो से पकिस्तान और एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को अब भारत रोक पायेगा. चीन को अब भारत के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले सोचना पड़ेगा क्योंकि इन देशो के सहयोग की वजह से भारत की स्थित अब बहुत ही ज्यादा मजबूत हो गयी है.