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इस देश के लोगों को मारकर लाशों के साथ कर रहे है, ये गन्दा काम

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चीन लम्बे समय से तिब्बत पर अपना अधिकार बताता आ रहा है. तिब्बत की जमीन को चीन अपनी बताता आया है. तिब्बत में अधिकतर लोग बौध्द धर्म को मानते है. चीन की सरकार लम्बे समय से तिब्बत के लोगो पर जुल्म करती आई है. चीनी सैन्य तिब्बत में तैनात है. लेकिन हाल ही सामने आई एक खबर से चीन की क्रूरता की सीमा दुनिया के सामने आ गयी है. रौंगटे खड़े करने वाली चीन की इस हरकत ने दुनिया का ध्यान खीच लिया है. चीन के सैन्य ने तिब्बत में यहाँ के लोगों की हत्या करना शुरू कर दिया है.

चीनी सैनिक तिब्बती लोगों की आवाज को दबाने के लिए उन्हें मारकर नदियों में फेंक रहे हैं. नदी के जरिये लाशें भारतीय इलाके में आ जाती हैं और उन लाशों की पहचान भी नहीं हो पाती है. तिब्बत के लोगों पर जुल्मों का कहर ढा रहे चीनी सैनिकों ने अब नया हथकंडा अपना लिया है. चीनी सैनिक तिब्बतियों की हत्या कर वे उनकी लाश लोहित नदी में फेंक देते हैं. मरने वालों के परिजनों को लाश तक नहीं मिल पाती है. यह जानकारी गुरुवार को मीडिया रिपोर्ट के जरिये सामने आई है. इस रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में घुसकर पत्थरों पर चीनी भाषा में लिख जाते हैं, ‘यह इलाका चीन का ह।’ लेकिन भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों के लिखे संदेशों को मिटाकर वहां लिख देते हैं, ‘यह इलाका भारत का है.’

साथ ही चीन ने तिब्बती इलाके में सेना के उपयोग के लिए आधारभूत ढांचा बहुत मजबूत किया हुआ है. स्थानीय लोगों में चीन के प्रति आक्रोश है और वे चीनी सामान का बहिष्कार कर रहे हैं. चीनी सैनिक तिब्बती लोगों की आवाज को दबाने के लिए उन्हें मारकर नदियों में फेंक रहे हैं, नदी के जरिये लाशें भारतीय इलाके में आ जाती हैं और उसकी पहचान भी नहीं हो पाती है. इस तरह मामला उजागर भी नहीं होता है. रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के किविथू से सटी लाइन ऑफ कंट्रोल पर भारत और चीन के बीच अक्सर तनातनी देखी जाती है. इस इलाके पर वे अपना दावा करते हैं जिसपर भारतीय सैनिक की ओर से जवाबी कार्रवाई होती है और पत्थरों पर लिखे उनके दावे ठोकने वाले संदेशों को मिटाया जाता है. जवाब दिया जाता है- ‘नो दिस इज इंडिया यू विड्रॉ.’

स्थानीय लोगों ने चीनी सैनिकों की ओछी करतूत के बारे में बताया कि वे तिब्बती लोगों को मारकर उन्हें नदी में फेंक देते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक चीनी सैनिकों द्वारा मारे गए तिब्बतियों की लाशें चीन की निगिचू और भारत में आने के बाद लोहित नदी में बहकर आती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि १९६२ के भारत-चीन युद्ध के बाद से इलाके में गोली तो नहीं चली है, लेकिन चीन मनोवैज्ञानिक दवाब बनाने के लिए हरकतें करता रहता है. आईटीबीपी के इंस्पेक्टर डी. करुणाकर ने बताया कि चीनी सैनिक पत्थरों पर संदेश लिखने के अलावा लाल रंग के बैनर पर भी ऐसे ही संदेश दिखाते हैं जब भारतीय सैनिकों से उनका आमना-सामना होता है. वह बताते हैं कि इसके जवाब में भारतीय सैनिक भी उन्हीं की भाषा में उन्हें जवाब देते हैं.

तिब्‍बत एक शांतिप्रिय देश है जो आज चीन के सैन्‍यीकरण का मुख्‍य अडडा बन चुका है. जिस देश को दुनिया की उजली स्‍वच्‍छ और सफेद छत माना जाता था, आज वह आणविक अस्‍त्रों का रेडियोधर्मी कचरा फेंकने का कूड़ा दान बन गया है. इसके कारण धीरे- धीरे उन सब नदियों का जल भयानक रूप से दूषित हो गया है, जिनका उदगम स्‍थल तिब्‍बत है. ये नदियाँ आक्‍सस, सिन्‍धु, ब्रहमपुत्र, इरावदी आदि‍ दक्षिणी एशिया के अनेक देशों में बहती है, जिनमें भारत और बांग्‍लादेश जैसे घनी आबादी वाले देश भी हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि न केवल चीन, बल्‍िक अमेरिका और यूरोप के अनेक देशों ने भी चीन को विदेशी मुद्रा देकर यह छूट हासिल कर ली है कि वे तिब्‍बत में अपना आणविक रेडियों कचरा फेंक सकें.

चीन की ऐसी करतूतों से वहां के लोग भी उनसे चिढ़े हुए हैं क्योंकि इस क्षेत्र में अक्सर मानवाधिकार के हनन की घटनाएं होती रहती हैं. ऐसा नहीं है ऐसी घटनाएं अभी से ही शुरू हुइ हो बल्कि किविथू से सटी लाइन ऑफ कंट्रोल पर दोनों देशों के बीच हमेशा ही तनातनी चलती रहती है. बताया जा रहा है कि तिब्बत के लोगों पर चीनी सैनिक लगातार अपना रोद्र रूप दिखा रहे हैं। ऐसे में अब चीनी सैनिकों तिब्बती लोगों को मारकर नदियों में फेंक रहे हैं।मारे गए लोगों की लाशें उनके परिवार को नहीं मिलती हैं और उनके खिलाफ सबूत न मिलने से मामला दब जाता है. चीन की इस हरकत की वजह से उसकी क्रूरता पूरी दुनिया के सामने आ चुकी है. अब देखना ये होगा की दुनियाभर से इसपर क्या प्रतिक्रियाएं आती है.