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इस देश ने पहले दिया भारत को धोका, अब PM मोदी से मांग रहा है मदद

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इकोनॉमिक पावर के दम पर चीन अकसर कमजोर देशों को टारगेट करता है और उन्‍हें कर्ज देकर अपनी जाल में फंसाता है, चीन की इस जाल में भारत के पड़ोसी  श्रीलंका, बांग्‍लादेश और नाइजीरिया समेत अन्‍य कई देश बुरी तरह फंसे हुए हैं, लेकिन अब श्रीलंका इससे बाहर निकलने की कोशिश में लगा है. इसके लिए श्रीलंका ने भारत से भी मदद मांगी है, दरअसल, 2009 में हंबनटोटा पोर्ट के विकास के लिए श्रीलंका की सरकार ने चीन से भारी कर्ज लिया था.  सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 के अंत तक श्री लंका पर चीन का कुल 5 अरब डॉलर का कर्ज था और यह बढ़ता ही जा रहा है.

हालांकि कर्ज की अदायगी न कर पाने की वजह से सरकार को उस पोर्ट को लीज पर देना पड़ गया. अहम बात ये है कि चीन की ही कंपनी ने इस पोर्ट की 70 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है, इस डील की वजह से श्रीलंका के कर्ज 1.12 अरब डॉलर करीब 7200 करोड़ रुपए कम हुए, बावजूद इसके अभी संकट टला नहीं है. नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री का पद संभालते ही नेबरहुड फर्स्ट की नीति का ऐलान किया था, लेकिन पिछले करीब चार साल में ज्यादातर पड़ोसी देश भारत से ज्यादा चीन के करीब दिख रहे हैं, पाकिस्तान और चीन तो एक दूसरे को हर मौसम का दोस्त मानते ही हैं, दक्षिण एशिया में भूटान को छोड़कर बाकी सभी देशों पर चीन का प्रभाव हाल में काफी बढ़ चुका है. ऐसे में देखना जरुरी हैं की चाइना इस पर भारत से किस प्रकार की उम्मीद रखता हैं.

एक तरफ पड़ोसी देशों में भारत के सहायता प्रॉजेक्टों की रफ्तार काफी धीमी रही है, दूसरी तरफ चीन धनबल के जरिए उनकी मदद करने में काफी आगे निकल गया है. चीन अपने पॉवर से हमेशा अपनेसे छोटे राज्यों को डराता धमकाता आ रहा हैं, अपने ताकद से सबको अंडरकंट्रोल करता हैं, चाइना अपने से छोटे और गरीब राज्यों को कर्जा देकर जाल में फसाता हैं, श्रीलंका भारत का सबसे गरीबी राष्ट्र हैं साथ ही श्रीलंका के संबंध भारत से काफी अच्छे हैं, इसिलिए श्रीलंका ने भारत से इस जाल से बहार निकलने के लिए इंडियन प्राइम मिनिस्टर नरेन्द्र मोदी से इसकी मांग की हैं, श्रीलंका के पीएम ने हाल ही में सूत्रों से कहा हैं की उन्हें भारत से इंटरनेशनल लेवल पर मदत चाहिए उन्हें भारत से निवेश चाहिए. एक पडोसी देश होने के नाते उन्होंने इस प्रकार की मांग की हैं.

श्रीलंका ने इंडिया के आलावा जापान से भी अपने लिए मदत की मांग की हैं, ऐसे में जापान उनकी इसमें कैसे मदत करता हैं ये देखना जरूरी हैं. हालाकि श्रीलंका की मदत करना भारत के लिए टेंशन की बात हैं, अगर श्रीलंका को कई से मदत नहीं मिली तो उन्हें चीन के साथ कई कॉन्ट्रैक्ट साइन करने पड सकते हैं, जिससे श्रीलंका का भारी नुकसान होने वाला हैं, इससे पाहिले भी चीन ने कर्जा देकर कई बड़े राज्यों को फसाया हैं उसमे नैजेरिया जैसे बड़े देश हैं, चीन भारत का हेशा से ही दुश्मन रहा हैं, जिससे भारत और चीन के बिच सीमा के ऊपर कई बार हमले होते हैं, इंडिया ने चीन को वक्त आने पर हमेशा से ही सबक सिखाया हैं, डोकलाम के विवाद के समय भी इंडिया ने चीन को अपना रुतबा दिखाते हुए शांत किया हैं.