Home विदेश इस देश ने मुस्लिम देशों के खिलाफ जारी किया ये हाहाकारी बयान

इस देश ने मुस्लिम देशों के खिलाफ जारी किया ये हाहाकारी बयान

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बांग्लादेश ने पाकिस्तान को एक नया झटका दिया है.इसलिए क्योंकि बांग्लादेश ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन का पर्यवेक्षक भारत की ओर सौपना चाहता है.शनिवार को हुई बैठक में बांग्लादेश के मंत्री अबुल हसन मुहमद अली ने ऐसा प्रस्ताव जारी किया.उन्होंने अब संघटन के विस्तार के लिए नए तरीके अपनाने की मांग की जिससे इसमें सुधर आये.

पाकिस्तान हमेशा भारत का बुरा चाहता है. विश्वपटल में भारत की छवि को बिघडने का प्रयास हमेशा पकिस्तान ने किया है.लेकिन अब उसके पडोसी देश बांग्लादेश ने ही पकिस्तान को करारा झटका दिया है.इसके कारन पकिस्तान की नींद भी अब उड़ गयी है.क्योंकि बांग्लादेश ने  भारत को मुस्लिम बहुल देशों के संगठन OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) का पर्यवेक्षक बनाया जाना चाहिए.शनिवार को हुई ढाका में (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) के सदस्य देशों  विदेशी मं त्रियों की बैठक  हुई . इसी बैठक    के दौरान  बांग्लादेश के मंत्री अबुल हसन महमूद अली संघटन में सुधार की मांग की.उन्होंने मांग करते हुए   कहा की भारत जैसे देशों को भी (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) पर्यवेक्षक सीट  पर नियुक्त किया जा सकता है.जो  मुस्लिम बहुल देश नहीं है.इसलिए पाकिस्तान इस मांग को पूरी   तरह से न होने का प्रयास जरुर करेगा.

बांग्लादेश  के मंत्री अबुल हसन महमूद अली ने संघटन के सुधार के बारे में कई प्रस्ताव रखे.महमूद अली ने आगे कहा की  उन गैर-OIC देशों के साथ भी दूरी को पाटने की जरुरत बताई.ताकि उनका कहना है की बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी OIC द्वारा किये गए  अच्छे कर्मो से अछूती ना रहे सबको इनका लाभ मिले.इसी वजह  कारण OIC के लिए पुनर्गठन और सुधार मत्वपूर्ण है.अली का कहना है की हमें अब नए तरीके से इस काम में जुटना होगा.उन्होंने कहा  वर्तमान युगों की जरुरंतो   करने के लिए हमें अपने काम, तरीके और कार्यप्रणाली की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करना होगा.हालांकि यह पहली बार नहीं है की ऐसे देशों का संघटन किया जा रहा है.इससे पहले भी ऐसे देशो के संघटनो को लेकर बात हुई है.पकिस्तान ने हमेशा ऐसे प्रस्तावों पर वोट किया है.

भारत ने इस्लामाबाद में होने वाली सार्क की बैठक में हिस्सा न लेने का फैसला लिया है .भारत इसका कारण पाकिस्तान को मानता है.इस साल की यह बैठक नौ और दस नवम्बर को होनेवाली है.भारत ने कहा है कि एक देश ने ऐसा माहौल बना दिया है जो शिखर बैठक के लिए उपयुक्त नहीं है.भारत ने जाहिर पकिस्तान पर निशाना साधा है.लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने पकिस्तान पर सीधे निशाना नहीं साधा.भारत के पाकिस्तान में उच्चायुक्त रह चुके जी पार्थसार्थी कहते हैं कि उड़ी हमले के बाद यह एक स्वभाविक कदम है.भारत के इस कदम पर जी पार्तिसार्थी का कहना है की इससे पहले नही उडी से पहले भारत सार्क में नहीं जाने के विकल्प के बारे में सोच रहा था.भारत सार्क का सदस्य है और इसके साथ बिमितेक का भी सदस्य रहा है.

बिमिटेक में भारत के पूर्व में स्थित सात देशों का जिक्र होता है .इसमें भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका म्यांमार और थाईलैंड ऐसे देशों का हैं.आर्थिकी एकीकरण के मामले में यह संघटन है.इस संगठन का मकसद यह है कि आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक साझा बाज़ार तैयार हो. इसके अलावा ऊर्जा के क्षेत्र में एक साझा ग्रिड बनाने का भी लक्ष्य है. भारत का मानना है की पकिस्तान की रुकावट की वजह से सार्क में आर्थिक और ऊर्जा लक्ष्यों से जुड़े उद्देश्यों को पूरा नहीं किया जा पा रहा है इसलिए भारत बिमिस्टेक के विकल्प के बारे में गंभीर है.बिस्मितेक के कई सदस्य से सार्क के भी सदस्य रह चुके है. है.गोवा मेंहोने वाली ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में सार्क के बजाए बिमिस्टेक के सदस्यों को अमंरित किया गया था .

रिपोर्ट के मुताबिक ,इसका मतलब साफ़ है की भारत का ध्यान सार्क के बजाये बिमिस्टेक की ओर है .भारत के इस कदम के साथ कुछ और भी देश इसका समर्थन करते हैं .इसमें बांग्लादेश और अफगानिस्थान खड़े है.रिपोर्ट का मानना है की भारत के इस निति पर भूटान और नेपाल भी उसके साढ़ आएंगे.लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अभी जो सार्क के तहत सहयोग है उससे भारत हटने वाला है. पकिस्तान का मकसद है की चीन को भी इसमें शामिल किया जाए.बल्कि चीन एशियाइ देश में शामिल नहीं होता.जहां तक द्विपक्षीय बातचीत का सवाल है तो पाकिस्तान जब तक चरमपंथ पर लगाम नहीं लगाता, तब तक उसके साथ द्विपक्षीय बातचीत का सवाल ही नहीं उठता.पाकिस्तान अपनी गतिविधियों से भारत के क्षेत्रीय सहयोग के रिश्तों पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकता है और ना ही भारत ऐसा करने देगा.

भारत ने पहले ही तय कर लिया था कि जरूरत पड़ने पर सार्क को एक तरफ रखकर दूसरे क्षेत्रीय संगठनों को आगे ले जाएगा. पाकिस्तान का कहना है कि सिर्फ़ ऐसा देश ही इस्लामी देशों के संगठन (ओआईसी) में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हो सकता है जिसका किसी सदस्य देश से विवाद न हो.पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता तस्नीम असलम ने भारत के नाम लिए बिना यह बयान दिया है.पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला के बयान पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की लेकिन कहा कि ओआईसी में किसी ग़ैर मुस्लिम देश को शामिल करने के बारे में विचार-विमर्श का दौर जारी है.दरअसल, सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि भारत को ओआईसी में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किया जाना चाहिए और पाकिस्तान को चाहिए कि वह इसका प्रस्ताव रखे.