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इस देश में आने वाला है अबतक का ये सबसे बड़ा खतरा, लोगों का जीना मुश्किल

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धरती पर किसी भी जीव का पानी के बिना जीवित रह पाना असंभव है. यहाँ पर हर जीव को पानी की जरुरत है. बढती जनसँख्या और ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ रहा धरती का तापमान आज गंभीर समस्या बन चुके है. प्रदुषण की वजह से प्रकृति का संतुलन बिगड़ चूका है, जिससे कही बाढ़ आ रही है तो कही बारिश की एक बूंद तक नहीं. जीवित रहने के लिए इंसान को पानी कितना जरुरी है यह जानते हुए भी इंसान की लापरवाही की वजह से आज धरती पर पानी की समस्या बहुत ही चिंताजनक बन गयी है. क्या आपने सोचा है की क्या होगा यदि धरती पर पानी ख़त्म हो जाये?

पुरे विश्व में पेय जल का संकट समय साथ और भी गंभीर बनता जा रहा है. नदियां सूख रही हैं, ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं, झीलें और तालाब भी लुप्त होने को हैं. लगातार बढ़ती जनसंख्या और घटते स्त्रोतों की वजह से हम खतरनाक हालात की ओर बढ़ रहे हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब आनेवाली पीढ़ी पानी के लिए तरसेगी. दुनिया में मौजूद पानी के स्रोत भी सीमित हैं, लिहाजा वे भी एक दिन खत्म हो जायेंगे. साउथ अफ्रीका की राजधानी केपटाउन में पानी की वजह से गंभीर हालात पैदा हो चुके हैं. सूत्रों का कहना है की केपटाउन में महज ९२ दिन का पानी बचा है. यहां पानी के लिए आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं. यहां पर छह बड़े बांध है जो लगभग पूरी तरह सूख चुके हैं.

अब यहां केवल बारिश से उम्मीद लगाई जा सकती हैं लेकिन अगर आने वाले दिनों में शहर में बारिश नहीं होती है तो इस पानी का स्तर २१ अप्रैल तक १३.५% से नीचे चला जाएगा और इसके बाद घरों में पानी सप्लाई बंद कर दी जाएगी. यह दुनिया का पहला शहर होगा, जहां पानी के लिए आपातकाल के हालात हैं. दक्षिण अफ्रीका की सरकार भी इस विषय को लेकर चिंतित है. पानी की कमी को लेकर लोगों में टकराव पैदा हो गया है. शहर में लोग सूखे को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और यहाँ हिंसा की स्थिति बनी हुई है. यह शहर लगातार तीन साल से सूखे की मार झेल रहा है. शहरी प्रशासन की लापरवाही की वजह से भी जल संरक्षण नहीं किया जा सका.

हालात इतने गंभीर हो गए है की जल आपूर्ति योजनाओं की रक्षा में सेना तैनात की गई है. केपटाउन के प्रशासन ने २१ अप्रैल को डे-जीरो घोषित किया है. कहा गया है इसके बाद लोगों के घरों में पानी आना बंद हो जाएगा. शहर के लोगों को पीने का पानी लेने के लिए लाइन में लगना होगा. इसके लिए शहर में २०० सेंटर बनाए जा रहे हैं. अभी घरों में रोजाना ८७ लीटर पानी की सप्लाई हो रही है लेकिन डे-जीरो से सिर्फ 27 लीटर पानी दिया जायेगा. केपटाउन की जनसंख्या लगभग 37 लाख हैं. प्रशासन के लोग घर-घर पहुंच कर लोगों को पानी बचानेेे के लिए जागरुक कर रहे है और उनको बताया जा रहा हैै की कम से कम पानी में काम कैसे चलाएं जाए.यहां का भूजल स्तर खतरनाक स्थिति तक नीचे पहुंच चुका है.

केपटाउन में मौजूद बांध प्रति व्यक्ति करीब १००० क्यूबिक मीटर पानी संग्रह करते हैं. केपटाउन का सबसे बड़ा बांध है थीवाटरस्क्लूफ़. शहर में ४१% पानी की आपूर्ति इसी डैम से होती है और इस बांध की क्षमता ४८ लाख करोड़ घन लीटर की है. शहर को प्रति दिन इस बांध से ६० करोड़ लीटर पानी की आूपर्ति होती है. थीवाटरस्क्लूफ़ बांध १० वर्ग किमी इलाके में फैला हुआ है. शहर में ६ बड़े बांध हैं, ९९.६% पानी की आपूर्ति इन्हीं से होती है. केपटाउन में अमुजुद इन हालातो से पानी का महत्त्व एक बार फिर सामने आ गया है. यह स्थिति सिर्फ अफ्रीका के केपटाउन की ही नहीं है, दुनिया में और भी शहर है जहा ऐसी स्थिति निर्माण होने की संभावनाए है. पानी की समस्या दुनिया के किसी भी देश या शहर में हो सकती है.

इसलिए जरुरी है की हम सही समय पर पानी का सही इस्तेमाल करे, मौजूदा पानी के स्त्रोतों को बचाने की हर कोशिश करे और पर्यावरण का संतुलन बनाये रखने पर ध्यान दे. दुनिया के क्षेत्रफल का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल से भरा हुआ है. पृथ्वी पर उपलब्ध कुल पानी से सिर्फ २.६% ही साफ पानी है. और इसका १% पानी मनुष्य इस्तेमाल कर पाते हैं. वैश्विक पैमाने पर इस पानी का ७०% कृषि में, २५% उद्योगों में और ५% घरेलू इस्तेमाल में इस्तेमाल किया जाता है. सन २००० में दुनिया की आबादी ६.२ अरब थी. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है की सन् २०५० तक दुनिया की जनसँख्या में ३ अरब की वृद्धि होगी और इसका ज्यादातर हिस्सा विकासशील देशों में जनसंख्या वृद्धि करेगा. और विकासशील देश पहले से ही जल तनाव से ग्रस्त हैं. इस लिए जल की मांग और बढेगी.

जल प्रदूषण आज विश्व के प्रमुख समस्याओं में से एक है. कई देशों की सरकारों ने इस समस्या पर समाधान खोजने के लिए कड़ी मेहनत की है. जल आपूर्ति को कई प्रदूषकों से खतरा है. किंतु सब से अधिक व्यापक विशेषकर अल्पविकसित देशों में है. कच्चे मलजल का प्राकृतिक जल में प्रवाह द्वारा इसके निपटान की यह विधि अल्पविकसित देशों में सबसे अधिक है. लेकिन यह अर्ध विकसित देशों जैसे चीन, भारत और इरान में भी प्रचलित है. मल, कीचड, गन्दगी और विषाक्त प्रदूषक, सब पानी में फ़ेंक दिए जाते हैं. मल उपचार के बावजूद समस्याएं खड़ी होती हैं. मल कीचड में तब्दील होता है, जो समुद्र में बहा दिया जाता है कीचड के अतिरिक्त उद्योगों और सरकारों द्वारा रासायनों का रिसाव जल प्रदूषण का प्रमुख स्रोत हैं. अनुमान लगाया जा रहा है की साल २०२५ में पानी की कमी गरीब देशों में और भी प्रबल होगी. जहाँ संसाधन सीमित हैं और जनसंख्या वृद्धि तेजी से हो रही है. जैसे की मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया के कुछ भाग.