Home देश इस मुस्लिम देश में जिंदगी में पहली बार खोला जाएगा पहला सिनेमाघर

इस मुस्लिम देश में जिंदगी में पहली बार खोला जाएगा पहला सिनेमाघर

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सऊदी अरब वैसे तो वहा की आरामदायी जिंदगी और शान शौकत भरी जिंदगी के लिए मशहूर रहा है. यहाँ पर अभी भी राजाओं का राज है. यहाँ की अधिकतर जनसँख्या मुस्लिम है. लेकिन इस देश में कुछ अजीब ही कायदे कानून लागु है. यहाँ के कुछ नियम हमारी समझ के बहार है. यहाँ की औरतों पर भी कई ऐसे सख्त कानून लागु किये गए है. सऊदी अरब में पिछले तिन दशको से सिनेमा देखने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिए गए थे. यहाँ के सिनेमा घर पिछले ३ दशको से बंद रहे है. लेकिन अब यह सिनेमा घर कल खुलने वाले है.

तिन दशकों के लंबे इंतजार के बाद, सऊदी अरब का पहला सिनेमा घर बुधवार को खोला जाएगा. सऊदी के लोग राज्य के पहले सिनेमाघर के खुलने के लिए बेहद उत्साहित है और वह कल के दिन का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे है. सऊदी के लोग ख़ुशी से फूले नहीं समां रहे है. सऊदी में सिनेमा घर का खुलने की खबर से बिलकुल ईद जैसा मोहोल बन गया है. अल अरेबिया के मुताबिक, सऊदी अरब ने घोषणा की कि वह राज्य में मनोरंजन क्षेत्र को विकसित करने की योजना के भाग के रूप में अगले १५ वर्षों में १५ सऊदी शहरों में ४० सिनेमाघरों को खुलवाएगें. साल २०३० तक करीब २५ सऊदी शहरों में १००० सिनेमा घर खोले जाएंगे. सऊदी अरब में क़रीब ३५ साल बाद पहली बार कोई फ़िल्म दिखाई जाएगी. फ़िल्म ब्लैक पैंथर के साथ ये शुरुआत हो रही है.

दुनिया के सबसे बड़े सिनेमा चेन एएमसी के साथ हुए करार के मुताबिक, अगले पांच सालों तक सऊदी अरब के १५ शहरों में सिनेमा हॉल खोले जाएंगे. सऊदी सूचना मंत्रालय ने पुष्टि की है कि २०३० तक ३५० सिनेमा थिएटर २५०० स्क्रीन के साथ कई सऊदी शहरों में खोले जाएँगे. ताकि सऊदी के हर शहर में रहने वाले लोग सिनेमा का लुत्फ़ उठा सकें. सऊदी ने सिनेमा घर खोलने के लिए ६६५ मिलियन डॉलर का खर्चा किया है. इसे सऊदी अरब में मनोरंजन व्यवसाय को वापस लाने के पिछले १० सालों से चल रहे प्रयासों से जोड़ कर विज़न २०३० के तहत देखा जा रहा है. विज़न २०३० क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की आर्थिक और सामाजिक सुधार की एक महत्वाकांक्षी योजना है. रुढ़िवादी मुस्लिम राष्ट् सऊदी अरब र में १९७० के दशक में सिनेमा हॉल थे.

लेकिन कट्टरपंथी मुस्लिम धार्मिक नेताओं के आदेशों पर उन्हें बंद कर दिया गया था. कुछ दिनों पहले भी जनवरी में एक बड़े मुफ़्ती शेख अब्दुल अज़ीज़ अल अल-शेख ने सिनेमा से जुड़ी बुराइयों को लेकर चेतावनी दी थी, उन्होंने कहा था कि अगर इन्हें अनुमति दी जाती है तो वो नैतिकता को भ्रष्ट कर देंगे. किंग सलमान ने अपने सबसे छोटे बेटे मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बनाया, वे ३२ साल के हैं. ये एक तरह से ये युवा आबादी के नज़रिए से किया गया फ़ैसला था. लेकिन मोहम्मद बिन सलमान के पास एक मुश्किल ज़िम्मेदारी है. उनके राज में सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था बदल रही है, जहां तेल पर निर्भरता कम होगी और जिसकी वजह से युवा नागरिकों का जीवन स्तर वैसा नहीं होगा जैसा इससे पहले की पीढ़ियों का था.

उन्हें सरकारी नौकरियां नहीं मिलेंगी और प्राइवेट सेक्टर में उन्हें ज़्यादा मेहनत करनी होगी. घरों की क़ीमत तो पहले ही एक बड़ी दिक्कत रही है, इसके साथ स्वास्थय और शिक्षा का भी निजीकरण किया जा रहा है. सऊदी अरब के अधिकारी बताते हैं कि सालों तक यहां के लोग रूढिवादी रहे लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि यहाँ का समाज पहले की अपेक्षा खुला, ऊर्जावान और तकनीक पसंद है. १० लाख से ज़्यादा सऊदी लोग विदेशों में पढ़े हैं और बाकी अब भी पारंपरिक रहन-सहन में ही डूबे हुए हैं. महिलाओं की स्थिति पढ़ाई करने, घूमने और काम करने के हिसाब से बहुत अलग-अलग है क्योंकि इन मामलों में उनके घर के पुरूष उनके लिए फ़ैसला लेते हैं. जहां तक फ़िल्मों की बात है तो तकनीक आने के बाद सिनेमा पर लगा बैन बेतुका ही था.

२०१४ के एक सर्वे के मुताबिक सऊदी अरब के दो-तिहाई इंटरनेट यूज़र्स हर हफ़्ते एक फ़िल्म ऑनलाइन देखते हैं. हर १० में से ९ सऊदी लोगों के पास स्मार्टफ़ोन है. यहां तक कि लोग सस्ती फ्लाइट लेकर बहरीन या दुबई भी फ़िल्म देखने चले जाते हैं.सऊदी की सरकारी एयरलाइन सऊदी एयरवेज़ में फ्लाइट में फ़िल्में देखने की भी सुविधा है. हालांकि वहां के हिसाब से आपत्तिजनक चीज़ें जैसे खुली बांहें या वाइन की तस्वीरों को ‘ब्लर’ कर दिया जाता है. वहां पर फिल्म महोत्सवों में फिल्में पॉप स्क्रीन पर दिखाई जाती हैं. सऊदी अरब का पहला सिनेमा सरकार के अपने पैसे से खुल रहा है जिसे पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड कहा जाता है. सरकार ने अंतरराष्ट्रीय कंपनी एएमसी के साथ साझेदारी की है. सरकार ना सिर्फ़ सिनेमा की इजाज़त दे रही है बल्कि उसे उम्मीद है कि इससे आर्थिक फ़ायदा भी होगा.

सरकार के नियुक्त किए गए धार्मिक नेता अभी भी हैं जो अपने रूढिवादी विचार फैलाते रहते हैं लेकिन राजनीतिक नेताओं के फैसलों से असहमति रखते हैं. २०१७ में सऊदी अरब के मुफ़्ती ने कहा कि सिनेमा में शर्मनाक और अनैतिक चीज़ें दिखाई जाएंगी और सिनेमा जाने से पुरूष और स्त्रियों का मेलजोल बढेगा. एक बार के लिए इस पर बहस भी हुई लेकिन अब बहस नहीं है. सरकार अब ऐसे संकेत दे रही है कि उनकी शक्तियां और प्रभाव पहले की अपेक्षा कम होंगे. इसलिए ये सिनेमा ये भी दिखाता है कि कैसे गहरे राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलाव मनोरंजन के ज़रिए सामने आ रहे हैं. सिनेमा टिकट शुरू में ५० रियाल का होगा. आगे कीमतें बढ़ भी सकती है. सऊदी सिनेमाघरों के लिए आधिकारिक ट्विटर अकाउंट “alcinema_sa” बनाने के बाद तीन घंटे में ४२००० फोलोवेर्स हो गये. इसका पहला ट्वीट “हम वापस आ रहे हैं” इसमें एक पॉपकॉर्न इमोजी है.

क्राउन प्रिंस ने पिछले दिनों ऐसे कई फ़ैसले लिए हैं, जिनमें महिलाओं को कार चलाने की अनुमति देना भी शामिल है. सऊदी अरब सुन्नी प्रभुत्व वाला है और यहाँ का शाही परिवार वहाबी सिद्धांतों को मानता है. सुन्नी ख़ुद को इस्लाम की सबसे धर्मनिष्ठ और पारंपरिक शाखा से मानते हैं. सुन्नी शब्द ‘अहल अल-सुन्ना’ से बना है जिसका मतलब है परम्परा को मानने वाले लोग.मंत्रालय ने कहा है कि इस कदम से सिनेमा उद्योग को करीब सवा तीन करोड़ की आबादी वाले घरेलू बाज़ार का लाभ मिलेगा. सऊदी अरब संस्कृति और सूचना मंत्रालय ने अपने जीडीपी को सिनेमा क्षेत्र के योगदान का अनुमान 24 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान लगाया है. प्रिंस मोहम्मद ने यह भी घोषणा की है कि सऊदी अरब में जून २०१८ से महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति दी जाएगी, रुढ़िवादी धार्मिक नेता इसका भी विरोध करते रहे हैं.