Home देश इस वजह के कारन गोरखपुर में हुई थी BJP की हार

इस वजह के कारन गोरखपुर में हुई थी BJP की हार

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बीजेपी के अत्ता में आते ही एक के बाद एक चुनाव जीतती चली जा रही थी लेकिन उत्तरप्रदेश के उपचुनाव बीजेपी के हात से निकल गए हैं. बीजेपी के रहते कोंग्रेस समेत अन्य छोटे बड़े विरोधियों को एक बी जित हासिल नहीं की थी चाहे ओ गुजरात की इलेक्शन हो या उत्तरप्रदेश का लोकसभा चुनाव या फिर त्रिपुरा का चुनाव हो बीजेपी हर जगह तेजी से फैलते जा रही हैं, कोंग्रेस के खाते में सिर्फ निराशा ही दिख रही हैं, ऐसे में कोंग्रेस और समाजवादी पार्टी को यूपी के उप चुनाव में जित हासिल करने में कामयाबी मिल गई हैं. इस जित का राज अब अमित शाह ने खोला हैं.

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बीते दिनों उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में हुई हार के बाद टिप्पणी की है, उन्होंने कहा है कि चुनाव के वक्त ही बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का गठजोड़ इस हार में बड़ा कारक रहा शाह ने कहा कि पार्टी ने इस हार की समीक्षा करने के लिए एक समिति भी तैयार की है। पार्टी का इरादा हैक कि वो साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 50 फीसदी वोट साझा करने की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं, आगामी चुनावों में भी बसपा और सपा के गठबंधन के चलते भाजपा का समीकरण बिगड़ने के सवाल पर शाह ने कहा कि यह आसान नहीं है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आजतक का कोई भी चुनाव अपने हात से जाने नहीं दिया था.

एक चैनल को दिए साक्षात्कार में राज्यसभा सांसद शाह ने कहा कि मीडिया, गोरखपुर और फूलपुर की दो सीटों को लेकर खुश है, कांग्रेस की ओर से संसद परिसर में मिठाई बंटी कि हमने सभी उपचुनावों में 8 सीटें खोई हैं लेकिन यह कोई नहीं कह रहा कि हमने 11 प्रदेश छीने लिए हैं. कोई त्रिपुरा का नाम नहीं ले रहा, जहां हमने बीते दिनों भारी जीत हासिल की है. शाह ने कहा कि उपचुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, हर स्थानीय चुनाव का अलग दृश्य होता है. लेकिन आम चुनाव में बड़े नेता और बड़े मुद्दे शामिल होते हैं. साल 2019 में भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ज्यादा सीटे पाएगी तेलुगू देशम पार्टी के अलग होने और शिवसेना के 2019 में बिना गठबंधन अकेले चुनाव लड़ने के सवाल पर शाह ने कहा.

साल 2014 में कई पार्टियों ने हमसे हाथ मिलाया था 11 दल हमसे जुड़े थे और इनमें से सिर्फ ही पार्टी एक अलग हुई है. NDA नहीं टूटेगा कर्नाटक चुनाव पर एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा, हम कर्नाटक जीतेंगे जिस तरह सिद्धारमैया राज्य चला रहे हैं, उसमें निश्चित ही सत्ता विरोधी लहर काम करेगी. अमित शाह ने बेबाक तरीके से बताया कि उपचुनावों में स्थानीय समीकरण किस तरह काम करते हैं, जबकि आम चुनावों में तस्वीर अलग होती है. वह 2019 के आम चुनावों को लेकर आश्वस्त दिखे. लेकिन अमित शाह ने उपचुनाव के तुरंत बाद ही यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को साथ लेकर राज्यसभा में जित हासिल की हैं, इससे सभी विरोधियों की जित ख़ुशी निपट गई हैं. इस करारी हार से सभी विरोधियों की बोलती बंद हो गई हैं.

भाजपा सूत्रों की मानें तो गोरखपुर का उम्मीदवार तय करने में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खासी दिलचस्पी ली. गोरखपुर में लोग यह बात भी करते हैं कि अमित शाह शिव प्रताप शुक्ला पर काफी भरोसा करते हैं और उनके कहने पर ही उपेंद्र शुक्ला को उपचुनाव में भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया था. ऐसे में भाजपा के अंदर इस हार के लिए योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार ठहराना आसान नहीं है. पार्टी नेताओं के एक वर्ग के मुताबिक अब पार्टी के अंदर योगी कहेंगे कि अगर उम्मीदवार मैंने चुने होते तो ऐसा नहीं होता लेकिन योगी आदित्यनाथ ने ऐसा कुछ भी  कहा सीएम योगी ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को अपना पूरा सपोर्ट दिया, उनके ऊपर विश्वास जताया. इसी विश्वास के चलते पार्टी  इस राज्यसभा चुनाव में १० मेसे ९ सीटों के ऊपर जित के आई हैं.