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इस वजह के कारन ये 10 देश जल्द ही अगले 20 साल में खत्म हो जाएँगे

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दुनिया इतनी खुबसूरत है. कहते है की पृथ्वी सबसे सुन्दर ग्रह है, किन्तु क्या आप यकीं करेंगे के दुनिया के कुछ देश ऐसे है जो आनेवाले २० सालो में अपना अस्तित्व खो देंगे?  जी ये बिलकुल सच है.  दुनिया में कुछ ऐसे देश है जो २० सालो के बाद अस्तित्व में नहीं रहेंगे. इसकी अलग अलग वजह है. कुछ देशो की अर्थव्यवस्था इतनी ख़राब है वह बाख नहीं सकते, कुछ देशो में चल रहे आतंरिक राजनीती की वजह से वे अशांत है, कुछ मानवी हस्तक्षेप से, कुछ बट जायेंगे, कुछ पर्यावरण में बदलाव से तो कुछ शायद युध्द में नष्ट हो जायेंगे. यह बिलकुल अकल्पनीय बात है लेकिन दुनिया में अभ्यासको ने यह नतीजे बताये है. इन देशो में दुनिया के कुछ प्रमुख देश भी है. आपको यकीं नहीं होगा की दुनिया में आज इतना बड़ा नाम होने वाले यह देश कुछ सालो बाद नष्ट हो जायेंगे. हम आज आपको बताएँगे की कौनसे है यह १० देश और क्या वजह है इनके भविष्य में नष्ट होने की.

उत्तर कोरिया बहुत दिनों से चर्चा में है उसके कायदे और कानूनों की वजह से. यहाँ के कानून आत्म निर्भरता के लिए बहुत ही सख्त है. इस देश की सरकार के मुताबिक, यहाँ के लोग सिर्फ उन चीजों का उपयोग कर सकते है जो उनके देश में प्राप्त है. लेकिन अगर देखा जाये, तो उत्तर कोरिया के पास उतने साधन मौजूद नहीं है की वे २० सालो तक गुजारा कर सके.  किम जोंग की नीतिया यदि ऐसी ही रही तो यहाँ पर आतंरिक गृह युध्द होना तय है. और फिर यहाँ की मौजूदा सरकार बेदखल की जाएगी. यहाँ के कानून नागरिको को सख्त बांधे हुए है, जैसे की यहाँ सिर्फ कुछ ही लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते है. देश में जातीयता की बहुत बड़ी समस्या होने वाला देश बेल्जियम भी अपना अस्तित्व खोने की कगार पर है.

यहाँ ३ जाती के लोग स्थित है. उत्तर कोरिया में डच भाषा का प्रयोग होता है जो फ्लैडर्स नाक का एक इलाका है, ओउर्व बेल्जियम में जर्मन भासा, और दक्षिण बेल्जियम जो की वेलोनिया के नाम से जाना जाता है वह फ्रेंच भाषा का प्रयोग होता है. यहाँ फ्लैडर्स के लोग अपनी आज़ादी चाहते है, याने अपना एक स्वतंत्र देश, तो वही वेलोनिया के लोग भी अपना एक स्वतंत्र देश है. इससे यह बात तो तय है की आनेवाले सालो में बेल्जियम ३ हिस्सों बट जायेगा और २ नए देशो का जन्म होगा. चीन दुनिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और शक्तिशाली देशो में से एक है. लेकिन फिर भी उसे नष्ट होने का खतरा है. कुछ दशको से हुई औद्योगिक क्रांति के कारन यहाँ का पर्यवारण संतुलन बिघाड चूका है.

यहाँ की सरकार ने इस बात पर गौर नहीं किया और अब हालात गंभीर हो चुके है. चीन की आधे से ज्यादा नदिया और जलाशयों का पानी पूरी तरह प्रदूषित है और पिने के लिए असुरक्षित है. देश में हर साल २.५ दश लक्ष लोगो की मौत प्रदुषण की वजह से हो रही है. चीन की सरकार ने बताया है की यहाँ का मौजूद पिने लायक पानी २०३० तक ख़त्म हो जायेगा. यदि जल्दी कोई कदम नहीं उठाये गए तो देश का बचना नामुमकिन है. यूरोप का दूसरा  सबसे बड़ा देश स्पेन जो की २००८ के बाद लगातार गिरता आ रहां है. इसकी अथव्यवस्था धोके में है. यहाँ की बेरोजगारी बहुत गंभीर समस्या है, जनसँख्या के २४% लोग यहाँ बेरोजगार है. दूसरी बड़ी समस्या ये है की यह देश आनेवाले सालो में २ हिस्सों में बत जायेगा.

पश्चिम स्पेन का एक केटलोनिआ नमक समुदाय स्पेन के खिलाफ आज़ादी के लिए अपने कदम उठा रहा है. यहाँ के लोग भी इस बात का समर्थन कर रहे है. वही उत्तर स्पेन में बास्को नाम का क्षेत्र है जहा के लोग बास्को भाषा बोलते है और वे भी स्पेन से आज़ादी चाहते है. दुर्भाग्य की बात यह है की यह दोनों आन्दोलन आतंकवादियों के नेतृत्व में चल रहे है. कुछ सालो पहले एक संघटन का अनम हुआ जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया. जो इस्लामिक स्टेट के नाम से जाना जाता है. साल २०१४ में बना हुआ यह संघटन अपनी निर्दयी कर्मो से पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना और कई देशो का दुश्मन भी बना. ऐसी स्थिति है की इस्लामिक स्टेट एक तरफ है और पूरी दुनिया उनके खिलाफ ऐसे इस देश का ख़त्म होना तय है.

आपको यकीं नहीं होगा लेकिन इंग्लैंड भी इस सूचि शामिल है. २०१४ में स्कॉटलैंड ने अपनी आज़ादी के लिए आन्दोलन किया, यह असफल रहा किन्तु उन्होंने इंग्लैंड की सरकार को हिला कर रख दिया. यहाँ के वेल्स और उत्तरी आइसलैंड में भी आज़ादी के लिए आन्दोलन चल रहे है. यदि इनमे से किसी एक देश को आज़ादी मिल जाये तो यक़ीनन देश कई हिस्सों में बट जायेगा और एक बड़ी अर्थव्यवस्था टूट जाएगी. दुनिया की महासत्ता अमेरिका के हालात भी कुछ ऐसे ही है. यहाँ साल २०१२ में बहुत बड़ा नागरी युध्द हुआ. सम्भावना है की टेक्सास और अलास्का दोनों ही स्वतंत्र देश बन जायेंगे. अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने कुछ ऐसी नीतियाँ बनायीं को मुस्लिमो के खिलाफ है, जिससे कई देश अमेरिका के खिलाफ भी हो सकते है.

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ग्लोबल वार्मिंग का शिकार बना मालदीव भी कुछ सालो में अस्तित्व में नहीं होगा. ग्लोबल वार्मिंग के कारन यहाँ के समुद्र का स्टार बढ़ता ही जा रहा है. जिससे आनेवाले सालो में मालदीव पूरी तरह समुद्र में डूब जायेगा. ९/११ के हमले बाद अशांति से घिरा हुआ इराक भी इस नष्ट होने का खतरा झेल रहा है. यह देश जटिल राजनीती और युध्द के लिए केंद्र बन गया. ऊपर से अमेरिका की कुछ दशको से यह कोशिश रही है वह इराक के तेल भण्डारो पर राज करे. दूसरा बड़ा खतरा है आई एस आई एस का. वे लगातार इराक पर हमला कर रहे है और कहा जा रहा है की कुछ सालो में इस पर कब्ज़ा कर लेंगे. सद्दाम हुसैन ने पूरी कोशिश की थी की यह देश अलग हिस्सों में ना बटे.

सद्दाम हुसैन की मौत के बाद यह देश अब बटने की राह पर है. देश में सुन्नी, कुर्ग और शिया नामक ३ संघ है. इराक की अज की स्थिति से यह तय की या तो ये देश नष्ट हो जायेगा या फिर विभाजित हो जायेगा. इराक जैसे ही ख़त्म होने की कगार पर है लीबिया. यह देश एकतर्फी राजनीति और गृह युध्द का शिकार है. इस देश में १९५१ तक इटली के उप्निवेशक नियंत्रण में था. इसके बाद कर्नल गद्दाफी का शासन आया जिसमे लाखो लोगों की मौत हुई. बताया जाता है की यह गद्दाफी की क्रूर राजनीती का नतीजा था. इस क्रूर राजनीती के खिलाफ २०११ में मानवी युध्द हुआ जिसमे गद्दाफी की बेरहमी से मार दिया गया. इसके बाद देश आज़ाद हो गया लेकिन यहाँ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बिखर गयी. लोगो ने अपने देश का सहयोग करना छोड़ दिया और अपनी जाती की तरफ उनकी वफादारी बढ़ने लगी. अज देश ३ हिस्सों में बात चूका है जो की त्रिपोलितानिया, सयरेनैके और फेज्ज़ं है. यदि इनमे एकता नहीं आई तोह यह देश निश्चित रूप से बट जायेगा.