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कर्णाटक में bjp के बहुमत साबित करने के पीछे ये असली वजह आयी सामने

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कर्नाटक विधानसभा के नतीजों के बाद बीजेपी बहोत बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई है. लेकिन कर्नाटक में सत्ता स्थापित करने के लिए बीजेपी को बहुमत साबित करना होगा और उसके के लिए बीजेपी को महज १५ दिन की अवधि मिली है. हाला की कर्नाटक में अब बीजेपी की सरकार बन गई है.

बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. गवर्नर ने उन्हें १५ दिन में बहुमत साबित करने का समय दिया है. लेकिन १०४ विधायकों के साथ बीजेपी को बहुमत के लिए ८ विधायकों की जरूरत है. बीजेपी ने बहुमत साबित करने के लिए एक ख़ास योजना बनाई है. ऐसे में बीजेपी की नजर लिंगायत विधायकों पर हैं. जानकारी के मुताबिक़ आपको बता दे की बीजेपी के एक धड़े का तर्क है कि लिंगायत विधायक कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन से नाखुश हैं. लिंगायत विधायक वोक्कालिगा समुदाय के कुमारस्वामी को इसका मुखिया बनाया गया है. सूत्रों की माने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर दर्जन भर से ज्यादा लिंगायत विधायक चुन कर आए हैं. लेकिन वे जेडीएस से नाखुश हैं और वह येदियुरप्पा के साथ जाने क संभावना जताई जा रही है.

आपको बता दे इसके अलावा बीजेपी की नजर दो निर्द्गीय विधायकों पर भी है. हाला की वह दोनों निर्द्गीय विधायकों को कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में देखा गया था. दूसरी तरफ लिंगायत को अलग धर्म के रूप में मान्यता देने के बावजूद लिंगायत समुदाय का ज्यादा झुकाव कांग्रेस की तरफ न रहकर बीजेपी की तरफ रहा. ऐसे में बीजेपी और लिंगायत समुदाय से आने वाले येदियुरप्पा की नजर कांग्रेस के लिंगायत विधायकों पर है. उन्हें उम्मीद है कि लिंगायत समुदाय से सीएम होने पर वे उन्हें समर्थन दे देंगे. बता दें कि साल २००७ चुनाव से ही वोक्कालिगा और लिंगायत राजनीतिक रूप से एक दूसरे के धूर विरोधी हैं. इस दौरान जेडीएस ने अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया था यह जानकारी मिलि है. ऐसे में यह देखने वाली बात होगी के बीजेपी अपनी योजना में कामयाब होती है या नहीं.