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कर्णाटक में BJP को मिली सबसे बड़ी जीत, इतने सीटों से जीती BJP

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कर्नाटक चुनाव विधानसभा  के निकले नतीजो से साफ़ दीखता है की कर्नाटक में कमल खिल आया है. जिससे भाजपा का सरकार बनाने का विश्वास बढ़ गया है. भाजपा का बहुमत देख भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहोल बढ़ चूका है.भाजपा की इस कर्नाटक की जीत से अब २०१९ के चुनाव का रास्ता और भी आसान हो चूका है.

कर्नाटक चुनाव विधानसभ की मतगणना जारी है.122 सीटों के रुझानों में भाजपा ने बड़ी बढ़त बनाई है.भाजपा 114 कांग्रेस 65, जेडीएस 41 व अन्य दो सीट पर आगे है। इस बीच, बेंगलूरु में भाजपा कार्यालय में जश्न भी शुरू हो गया है. इधर, कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनाने पर मंथन शुरू हो गया है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात कर प्रकाश जावेडकर बेंगलुरू रवाना हो गए हैं.अब भाजपा का कहना है  की अब किसी गठबंधन की  आवश्यकता नहीं है.हम अपनी जीत के प्रति आश्वत हैं.लेकिन हमने अपने विकल्पों को खुला रखा है.शनिवार को २२४ विधानसभा सदस्यीय में से २२२ में मतदान हुआ था.इसमें मुख्य मुकाबला भाजपा  कांग्रेस के बिच हुआ था.मतदान के बाद अलग  चैनलों पर एग्जिट पोल में  की त्रिशंकु विधानसभा की शंका  जताई थी. ऐसे स्थिति   में जेडीएस की भूमिका अहम होगी.

भाजपा को बहुमत मिलने पर येद्दियुरप्पा कर्नाटक के अगले सीएम होने की शंका जताई जाती है .भाजपा अगर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने में कामयाब रही तो स्पष्ट तौर पर बीएस येद्दियुरप्पा ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे.लेकिन २०१९ की इलेक्शन को मद्देनजर रखते हुए भाजपा दलित चेहरे को उपमुख्यमंत्री बना सकती है.अगर दो-चार सीटें कम पड़ीं तो निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाया जा सकता है.भाजपा कर्नाटक में बड़ी पार्टी बन सकती है और ऐसे स्थिति में भाजपा को जेडीएस का समर्थन जरुरी होगा.अगर जदएस 40-50 सीटें हासिल करने में सफल रहटा है , तो 30-30 (आधा-आधा कार्यकाल) फॉर्मूले पर सहमति बन सकती है. लेकिन तब भी भाजपा पहला कार्यकाल जदएस को देने पर शायद ही सहमत हो क्योंकि पूर्व में कुमार स्वामी भाजपा के साथ समझौता करके उससे मुकर चुके हैं.

कांग्रेस की ऐसे स्थिति में पार्टी को जदएस के साथ-साथ निर्दलीय विधायकों के समर्थन की भी दरकार होगी.इसमें सरकार की गठन की बात जेडीएस की संख्या पर निर्भर होगी.जेडीएस के पिछले कटुतापूर्ण संबंधो के कारन सिद्दरमैया मुख्यमंत्री नहीं बन सकेंगे. कांग्रेस को मुख्यमंत्री पद के लिए नया चेहरा तलाशना होगा। सियासी हलकों में चर्चा तो यह भी है कि चूंकि कांग्रेस और जदएस दोनों का ही प्रभाव पुराने मैसुरु क्षेत्र में है इसलिए संभव है जदएस कांग्रेस के साथ न जाए.भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस जेडीएस को समर्थन देने की सम्भावना जताई है.एक सम्भावना एचडी कुमार स्वामी के नेतृत्व में भी सरकार बनाने की है.जिसे भाजपा या कांग्रेस बाहर से समर्थन दें.भाजपा 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर जदएस का समर्थन करने पर सहमत हो भी सकती है.

कर्नाटक विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 113 है, क्योंकि अभी 222 सीटों के लिए मतदान हुआ है तो फिलहाल बहुमत के लिए 112 सीट की ही आवश्यकता है. इसी तरह, कांग्रेस भी भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए जदएस को बाहर से समर्थन दे सकती है। इसके अलावा उसका यह कदम 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए विपक्षी दलों के महागठबंधन में भी सहायक होगा. गोवा, मणिपुर और मेघालय से सबक लेकर कांग्रेस ने अपने शीर्ष नेताओं को मतगणना से पूर्व ही कर्नाटक भेज दिया है .उक्त तीनों ही राज्यों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी।सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ पार्टी नेता गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत बेंगलुरु पहुंच गए हैं . वहां पहुंचकर उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और अन्य पार्टी नेताओं से मुलाकात की.

कर्नाटक में भाजपा की जीत होने से गुजरात मॉडल कांग्रेस के कर्नाटक मॉडल के सामने मजबूत साबित होगा.2008 के चुनाव में येदियुरप्पा के चेहरे को आगे कर बीजेपी ने कर्नाटक का रण जीत दक्षिण भारत में खाता खोला था. इस बार फिर येदियुरप्पा का चेहरा पार्टी ने आगे किया. इस बार येदियुरप्पा कार्ड के साथ मोदी मैजिक का भी जोर था. संघ और बीजेपी ने 2019 के मद्देनजर संगठन के स्तर पर दक्षिण भारत में पिछले कुछ सालों में अपनी सक्रियता बढ़ाई है. कर्नाटक का चुनाव इस रणनीति का भविष्य तय करेगा. इसके बाद बीजेपी तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना-हैदराबाद पर फोकस कर सकेगी.. कर्नाटक में जीत 2019 के चुनावी रण से पहले बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हो सकती है.किसानों-दलितों के मुद्दों, रोजगार और विकास के गुजरात मॉडल को लेकर पार्टी तब और मुखर तरीके से विपक्ष का सामना कर पाएगी. इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊपर होगा.

कर्नाटक में एक बार फिर बीजेपी का कमल खिल गया है. सिद्धारमैया की सारी कोशिशें फेल हो गई हैं. वे लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने से लेकर कर्नाटक का अलग झंडा तक का कार्ड चले, लेकिन कोई काम नहीं आया है. बीजेपी की जीत का आधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा और सत्ता की हारी हुई बाजी को जीत में बदल दिया .बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के नारे के लिहाज से कर्नाटक के नतीजे काफी अहम हैं. पंजाब के अलावा कर्नाटक कांग्रेस के पास एक मजबूत गढ़ है. कर्नाटक के नतीजों के असर दूरगामी हो सकते हैं. जीतने पर बीजेपी आगामी विधानसभा चुनावों में और 2019 के चुनावी अभियान में पूरे मनोबल के साथ उतरेगी. तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज होगी और विपक्षी फूट का फायदा उठाने की रणनीति पर बीजेपी काम करेगी.