Home विदेश किम जोंग को मिलने को लेकर ट्रम्प ने लिया ये हाहाकारी फैसला

किम जोंग को मिलने को लेकर ट्रम्प ने लिया ये हाहाकारी फैसला

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कुछ ही महीनो में अब अमेरिकी राष्ट्रपति और किम जोंग उन के बिच बैठक होनेवाली है .इस बैठक में कोई पाच जगह मिलने के ठिकान पर विचार हो रहा है. दोनों देशों के बिच होनेवाली इस बैठक को कई लिहाज से मत्वपूर्ण माना जाता है.लेकिन अभी इस बैठक का समय और ठिकान तय नहीं है.

अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप किम जोंग उन अब प्योंगयोंग नहीं जायेंगे.लेकिन इस का आर्ट ऐसा नहीं की यह बातचीत रद्द की जाएगी या फिर इसमें ट्रम्प शामिल नहीं होंगे.अब इनके मिलने की जगह बदल गयी है ,दरअसल ,यह दोना नेता अब वहा मिलेंगे जहा  पिछले दिनों  दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे से किम जोंग उन की मुलाकात हुई थी.इस के बारे में खुद सुजाव अमेरिकी राष्ट्रपति के तरफ से आया था और इसके लिए खुद अब किम जोंग उन ने भी इस फैसले को हरा झंडा दिखाया है.किम जोंग उन और मून जे की २७ अप्रैल को जो बैठक हुई वो पुन्जोनाम गाव में हुई थी .जो दक्षिण और उत्तर कोरिया के बिच स्थित है.यहां 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद से ही युद्ध विराम लागू है.यह सीमा रेखा दुनिया में से खतरनाक सीमा रेखाओं से एक सीमा है.इसी के कारन  उत्तर और दक्षिण कोरिया की सीमा एक बार फिर से चर्चा का विषय बनने के साथ-साथ ऐतिहासिक वार्ता का भी गवाह बनने वाली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ पीस हाउस में बैठक लेने का सुजाव दिया है.और यह पीस हाउस दक्षिण और उत्तर कोरिया के बिच में स्तिथ है.ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि उत्तर कोरिया के साथ शिखर बैठक के लिए कई देशों पर विचार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा की किम जोंग उन के साथ बैठक के लिए पञ्च जगहों पर विचार है. लेकिन किसी तीसरे देश की अपेक्षा पीस हाउस/फ्रीडम हाउस ज्यादा महत्वपूर्ण और स्थायी जगह है। तीन से चार हफ्ते में ट्रंप और किम की मुलाकात होने की संभावना है। गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि किम के साथ शिखर वार्ता के लिए पांच जगहों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि वह कई बार यह भी कह चुके हैं कि बातचीत नहीं भी हो सकती है।

किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रम्प के बिच होनेवाले कई बातें अहम होगी .इसके साथ उनके वार्ता का अहम बिंदु कोरिया प्रायद्वीप को परमाणु हथियार से मुक्त बनाना है.हालाखी इस बारे में किम के तेवर कुछ नरमी में नजर आ रहे है.पिछले दिनों में हुई किम जोंग उन की मून जे की मुलाकात में भी परमाणु के बारे में कई अहम बातें हुई .जिसमे किम जोंग ने कहा की अगर अमेरिका कोरियाई युद्ध को औपचरिक रूप से ख़त्म कर देती है तो उत्तर कोरिया भी परमाणु पर रोक लगा सकती है.किम जोंग ने कहा की अमेरिका उत्तर कोरिया पर हमला न करने का वचन दे तो उत्तर कोरिया भी परमाणु हथियार त्यागने को तैयार है.लेकिन इसीके साथ किम जोंग उन ने कहा की अगर अमेरिका ऐसा नहीं करती तो इस पर फिर से विचार विवर्ष होगा.

किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति के बिच की यह बैठक कही लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है.किम जोंग उन भी इस बैठक को सकारात्मक रूप से देख रहे है .किम जोंग उन ने कहा की बैठक की बातचीत शुरू होने से ट्रम्प जान जायेंगे की में ऐसा शख्स नहीं हु की दक्षिण कोरिया और अमेरिका पर परमाणु हथियार से हमला करूँगा.उन्होंने ये भी कहा की अगर आपसी चर्चा बढ़ी और दोनों के बिच विश्वास बढ़ा तो काफी अच्छा होगा.अभी तक हलाखी दोनों के बिच बैठक का समय और ठिकान निश्चित नहीं हु लेकिन यह अभी तय है की इस कार्यक्रम में अब दक्षिण कोरिया भी मौजूद रहेगा.यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है की क्योंकि पहली बार कोई पद पर रहते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति कोरिया के प्रमुख से बात करने जा रहे है.

 

अमेरिकी राष्ट्रपति और किम जोंग उन के बिच होनेवाली इस बैठक पर छह देशों की निगाहें रखी हुई है. क्योंकि परमाणु हथियारों पर रोक लगाने के लिए यह देश वर्षों से  इन्तेजार कर रहे है.जानकारों की दिलचस्‍पी इस बात को लेकर है कि इस बाबत छह देशों की वार्ता दोबारा शुरू होगी या नहीं.इन छह देशों में उत्तर और दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस और अमेरिका शामिल हैं. यॉनहॉप एजेंसी की मानें तो जानकार इस बात से इंकार नहीं कर रहे हैं कि कोरिया प्रायद्वीप को लेकर इन देशों की बैठकों का दौर दोबारा शुरू हो सकता है.जानकारों के मुताबिक इसको लेकर उत्तर कोरिया भी शायद पीछे न हटे और ऐसा करने पर अपनी सहमति व्‍यक्त करे. इस बारे में जापान की मीडिया ने यहां तक कहा है कि पिछले दिनों किम ने जो बीजिंग की यात्रा कर शी चिनफिंग के समक्ष अपनी बात रखी है उसके बाद इस सिक्‍स नेशन टॉक को लेकर सहमति बनी है.

जानकरों की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस बैठक में जापान भी मौजूद रहेगा .लेकिन जापान की मौजदगी से अब कोरिया खफा हो जाएगा.इसी के कारण जापान हमेशा काफी समय से अगवा हुए नागरिकों की कोरिया से मांग कर रहा है.लेकिन उत्तर कोरिया इसी को लेकर साफ़ इनकार दे रही है.आपको बतादे की छह देशों की यह वार्ता २००३ साल में हुई थी.२००५ वार्ता के बाद अहम समझौता भी हुआ था.जिस समझौते में उतर कोरिया को उरक्षा की गारंटी भी दी गयी थी.लेकिन वर्ष २००९ में उत्तर कोरिया के परमानु परिक्षण से इस समझौते को निलंबित कर दिया गया था.इसके बाद इन दोनों देशों में बातचीत नहीं हुई.इसके अलावा यह बैठक इस लिहाज से भी खास है क्‍योंकि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच बदजुबानी का लंबा सिलसिला चला है.एक ओर जहां ट्रंप ने किम को रॉकेट मैन कहा वहीं किम ने ट्रंप को बूढ़ा तक कह डाला था.आइए जानते हैं दोनों नेताओं ने कब-कब और क्‍या-क्‍या कहा.