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कोरिया का सनकी तानाशाह जल्द ही करेगा इस कट्टर विरोधी देश से मुलाक़ात

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दुनिया में राजनैतिक घटनाये काफी गति ले रही है. दुनिया के शक्तिशाली देशों के नेता अब जल्द ही एक दुसरे से मिलने की योजनाए बना रहे है. इन मुलाकातों से वैश्विक राजनीती एक नया मोड़ ले सकती है. चीन, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के नेताओं के बिच इस साल मुलाकात होनी तय है. उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बिच कई दशको से तनातनी जरी है. दोनों देश एक दुसरे के विरोध रहे है. वही अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्ते भी कुछ खास अच्छे नहीं है. उत्तर कोरिया के किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बिच हमेशा ही एक दुसरे को चेतावनी और ताने देने का सिलिसिला चलता आ रहा है.

दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बिच सम्बन्ध सुधारने के लिए यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण हो सकती है. उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया पहले एक ही देश था कोरिया. कोरिया के विभाजन के बाद यह दो स्वतंत्र देश बन गए है. लेकिन इन दो देशों की मौजूदा स्थिति बिलकुल ही भिन्न है. एक तरफ दक्षिण कोरिया एक प्रगत देश है. तो वही उत्तर कोरिया एक काफी पिछड़ा हुआ देश है. यहाँ पर लोगों को इनेर्नेट इस्तेमाल करने पर भी प्रतिबन्ध लगाये गए है. लेकिन अब उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रपति मून जे के बीच २७ अप्रैल को शांति वार्ता होनी है. इसके अलावा मई में किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच वार्ता होनी तय हुआ है. यह दोनों ही वार्ता दुनियाभर के लिए बेहद अहम हैं.

यह वार्ताए अहम् तो है ही, लेकिन इन दोनों वार्ताओं में एक देश अहम भूमिका निभाने वाला है. और यह अहम् देश है चीन. चीन, उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा कारोबारी देश है.उत्तर कोरिया अकेले चीन के साथ करीब ९० फीसदी का कारोबार करता है. चीन से उसको सारी जरूरी चीजों की आपूर्ति की जाती है. इस तरह से यहां के भविष्‍य को लेकर होने वाली वार्ता में चीन की अहम भूमिका होनी तय है. चीन के लिए ही उत्तर कोरिया अहम नहीं है बल्कि उत्तर कोरिया के लिए भी चीन काफी अहम देश है. ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि प्रतिबंधों के बावजूद चीन उसका साथ हर मौके पर देता रहा है. किन्तु चीन इस बात को भी कहता रहा है कि वह किम के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ है.

चीन से उत्तर कोरिया का करीबी रिश्‍ता इस बात से भी समझा जा सकता है क्‍योंकि पिछले माह याने मार्च में ही किम जोंग उन ने बीजिंग की यात्रा की थी. इस यात्रा के दौरान उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग से मुलाकात की थी. उनकी इस यात्रा का मकसद दक्षिण कोरिया के मून जे और अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली आगामी वार्ता से पहले रणनीति बनाना ही था. किम के सत्ता में आने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा भी रही थी. वह अपनी निजी ट्रेन से चीन पहुंचे थे. साथ ही इस यात्रा के दौरान कड़ी सुरक्षा का इंतजाम किया गया था और इस यात्रा के बारे काफी गोपनीयता भी बरती गयी थी. उन्‍होंने चीन की यात्रा भी इसलिए ही की थी क्‍योंकि वह उसकी अहमियत को पहचानते हैं.

किम जोंग उन की इस यात्रा की जानकारी देते हुए चीन ने कहा था कि उत्तर कोरिया अपने देश में कोरियाई प्रायद्वीप में शांति लाने, तनाव कम करने के साथ-साथ निशस्‍त्रीकरण के लिए भी पूरी तरह से तैयार है. इसके लिए दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका को भी सकारात्‍मक रवैया अपनाना होगा. चीन संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का स्‍थायी सदस्‍य है, और साथ वह उत्तर कोरिया का पड़ोसी मित्र देश भी है. दोनो देशों के बीच करीब १४२० किमी लंबी सीमा है. चीन की सरकार भी इस बात को मानती है कि वह इस साल होने वाली आगामी वार्ता में अहम भूमिका निभा सकती है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन वार्ता के जरिए कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्‍थापित करने और तनाव कम करने को लेकर प्रतिबद्ध है.

चीन की जिलिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और को-इनोवेशन सेंटर फॉर कोरियन पेनिनसुला स्‍टडीज के रिसर्च फेलो वांग शेंग का कहना है कि किम जोंग उन और शी जिन पिंग की बैठक के दौरान परमाणु निश्‍स्‍त्रीकरण के साथ-साथ चीन की भूमिका को लेकर भी सहमति बनी थी. इस दौरान यह आरोप भी लगे है कि चीन कहीं न कहीं उत्तर कोरिया की छवि को कम कर रहा है और आगामी वार्ता को लेकर लकीर खींचने की कोशिश कर रहा है. वांग शेंग ने यह भी कहा है कि किम ने बीजिंग यात्रा के दौरान इस बात को साफ कर दिया था कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति को लेकर यदि दक्षिण कोरिया और अमेरिका सकारात्मक रवैया अपनाएंगे तभी यहां पर तनाव कम हो सकेगा. इसके लिए दोनों देशों को बेहतर वातावरण बनाना होगा.

उनके मुताबिक मौजूदा समय में चीन और अमेरिका के संबंधों में आए तनाव के बाद भी चीन उत्तर कोरिया की मदद को अग्रसर है। इसकी वजह यह भी है कि चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने का हमेशा से ही हिमायती रहा है। वांग भी मानते हैं कि यदि आगामी वार्ता में दोनों देश सकारात्मक रवैया अपनाते हुए मेज पर बैठेंगे तो मुमकिन है कि यहां पर शांति स्‍थापित हो सके। इसके लिए यह भी जरूरी है कि दोनों एक दूसरे को सम्‍मान दें और उनकी जरूरतों का ख्‍याल भी रखें। इसके अलावा आपसी विश्‍वास और आपसी हित भी इस वार्ता में अहम कड़ी साबित होंगे। इनके अलावा परमाणु निश्‍स्‍त्रीकरण के मुद्दे पर भी दोनों देशों को गंभीरता से विचार करना जरूरी होगा.

ये दोनों देशों की जिम्‍मेदारी है. इस बैठक के दौरान इस पर भी सहमति बनी कि आगामी वार्ता के दौरान उत्तर कोरिया की जरूरतों को भी ध्‍यान में जरूर रखा जाएगा. वांग का मानना हैं कि मुश्किल हालातों में भी चीन उत्तर कोरिया की मदद कर सकता है. उनके मुताबिक कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्‍थापना को लेकर चीन की भूमिका को किसी भी सूरत से नकारा नहीं जा सकता है. वांग के मुताबिक मौजूदा समय में चीन और अमेरिका के संबंधों में आए तनाव के बाद भी चीन उत्तर कोरिया की मदद को अग्रसर रहा है. इसकी वजह यह भी है कि चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने का हमेशा से ही हिमायती रहा है. वांग ये भी मानते हैं कि यदि आगामी वार्ता में दोनों देश सकारात्मक रवैया अपनाते हुए मेज पर बैठेंगे तो मुमकिन है कि यहां पर शांति स्‍थापित हो सके.