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कोरिया के तानाशाह को लेकर अमेरिका आया एक्शन में, दिया ये बड़ा बयान

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग उन के बिच तानेबाजी हमेशा से ही जारी रही है. पिछले कुछ दिनों में इन दो नेताओ ने मिलने का फैसला करने के बाद इन संबंधो में सुधार की आशा की जा रही थी. किन्तु अब एक बार फिर अमेरिका ने उत्तर कोरिया को ललकारा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन के बिच आनेवाले दिनों में मुलाकात होनी तय है. इस मुलाक़ात पर पूरी दुनिया की नजरे टिकी हुई है. इन दोनों की मुलकात में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी है. इसमें सबसे बड़ा विषय है परमाणु हथियारों का परिक्षण और उनका इस्तेमाल. इस मुलाकात से पहले अमेरिका के वाइट हाउस ने उत्तर कोरिया और किम जोंग उन पर तंज कसा है. वाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स द्वारा जारी किये गए एक बयान में जोर देकर कहा गया है कि अमेरिका इस बार इस प्रक्रिया में भोला-भाला रवैया बिलकुल ही नहीं अपनाएगा और अमेरिका के पिछले प्रशासन द्वारा की गई गलतियों को नहीं दोहराएगा. व्हाइट हाउस ने कहा है कि उत्तर कोरिया अमेरिका को भोला-भाला न समझे.

उत्तर कोरिया जब तक अपने परमाणु और मिसाइल कायक्रमों का विखंडन करने की ओर कदम नहीं उठाता, तब तक अमेरिका उसे कोई रियायत नहीं देगा. सीएनएन चैनल के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया द्वारा इस सप्ताहांत से पहले अपने परमाणु और मिसाइल परीक्षणों पर रोक लगाने के फैसले को प्रगति का सूचक माना था. लेकिन सोमवार २३ अप्रैल को सारा सैंडर्स ने जोर देकर कहा कि अमेरिका इस प्रक्रिया में भोला-भाला रवैया नहीं अपनाएगा और पिछले अमेरिकी प्रशासन द्वारा की गई गलतियों को नहीं दोहराएगा. उन्होंने कहा, “हम उत्तर कोरिया को उसके शब्दों की तरह नहीं लेंगे. हमारा लक्ष्य प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त होते देखना है और हम अपना अधिक दबाव अभियान तब तक जारी रखेंगे, जब तक हम उत्तर कोरिया को पूर्ण रूप से परमाणु मुक्ति की ओर ठोस कदम उठाते नहीं देख लेते.”

सारा सैंडर्स ने आगे कहा की “हम इस प्रक्रिया में सीधे-साधे बनकर नहीं रहेंगे. हमने कुछ कदम सही दिशा में देखे हैं, लेकिन हमें अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है.” जब सारा से पूछा गया कि इस बढ़ती प्रगति को देखते हुए क्या अमेरिका कुछ प्रतिबंधों को वापस लेना जारी रखेगा तो सारा ने फिर से कहा कि “कोई भी प्रतिबंध तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक हम उत्तर कोरिया द्वारा परमाणु मुक्त होने की ओर ठोस कदम उठाते हुए नहीं देख लेते.” उत्तर कोरियाई के नेता किम जोंग उन के अमेरिकी राष्ट्रपति को मुलाकात का न्यौता स्वीकारे जाने के बाद से दोनों देशों के बीच काफी कुछ बदल गया है. एक-दूसरे पर गालियों और मानसिक विक्षिप्त होने की बौछार करने वाले दोनों नेताओं के सुर अब बदलते जा रहे हैं.

खासतौर पर उत्तर कोरिया को बर्बाद करने की धमकी देने वाले ट्रंप ने अब किम जोंग उन को एक बेहद सम्मानित शख्स बताया है और उम्मीद जताई है कि वे जल्द ही मिलेंगे. अमेरिका लंबे समय से किम परिवार पर बर्बरता एवं छल के लिए की आलोचना करता रहा है. और ट्रंप की उत्तर कोरियाई नेता की तारीफ, स्थिति में आया एक नाटकीय बदलाव है. ट्रंप ने कहा, ‘‘किम जोंग उन काफी खुले हुए हैं और हम जो देख रहे हैं, उससे लगता है कि वे एक बेहद सम्मानित इंसान हैं. इन सालों में उत्तर कोरिया ने काफी वादे किए, लेकिन वे कभी भी इस स्थिति में नहीं थे.’’ इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले साल किम को ‘‘लिटिल रॉकेट मैन ’ कहा था और उकसाए जाने पर उत्तर कोरिया को ‘‘बर्बाद’’ करने की धमकी दी.

वहीं किम ने ट्रंप को ‘‘मानसिक रूप से विक्षिप्त इंसान’’ बताया था.किन्तु दोनों के रिश्तों में आई इस नरमी के बावजूद अमेरिका अभी पूरी तरह से उत्तर कोरिया पर भरोसा नहीं कर पा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर जो प्रतिबंध लगाए हैं उन्हें हटाने में ट्रंप ने अब तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक यह कोरियाई देश परमाणु कार्यक्रमों की काफी हद तक खत्म नहीं कर दे तब तक ऐसा नहीं किया जाएगा. उन्होंने दोहराया कि उनकी किम से मुलाकात मई अंत या जून के शुरूआती सप्ताह में हो सकती है. लेकिन फिलहाल किसी तारीख की घोषणा नहीं की गयी है. व्हाइट हाउस का कहना है कि उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिका अपना ‘‘अधिकतम दबाव’’ अभियान जारी रखेगा.

इसके साथ ही परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर ठोस कदम उठाने तक प्योंगयांग पर से प्रतिबंध हटाने की संभावना को भी उन्होंने खारिज कर दिया. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने २४ अप्रैल को दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा ‘‘निश्वित तौर पर, लक्ष्य कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु निरस्त्रीकरण है. परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर ठोस कदम उठाने तक हम उत्तर कोरिया पर अपने अधिकतम दबाव अभियान को जारी रखेंगे.’’ इसके लिए पांच स्थलों पर विचार किया जा रहा है. उनमें से कोई भी अमेरिका में नहीं है. ट्रंप द्वारा अगले विदेश मंत्री के तौर पर नामंकित किए गए माइक पोम्पिओ भी तीन सप्ताह पहले उत्तर कोरिया के उच्च अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बातचीत करने प्योंगयांग पहुंचे थे. रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने पेंटागन में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान विश्वास जताया था कि शिखर वार्ता से ठोस परिणाम निकलेगा.