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चाइना को मिला करार जवाब, अब इस देश का ये पोर्ट होगा India का मिलिट्री बेस

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भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी इस हफ्ते ओमान सह ३ देशो का दौरा कर भारत लौटे है. उनके ओमान दौरे पर उन्होंने कुछ ऐसे समजौते किये है जिससे भारत रणनीतिक तौर पर एकदम मजबूत हो गया है.

भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओमान के सुलतान कसुब बिन सैद अल सैद से मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात में द्विपक्षीय चर्चा सफल रही. इस दौरान ८ समजौतो पर हस्ताक्षर किये गये है. उनमे से एक महत्वपूर्ण समजौता है ओमान के दुक्म पोर्ट के बारे में. इस समजौते के जारी होने के बाद भारत ओमान के दुक्म बंदरगा का उपयोग कर सकेगा. इस समजौते से भारत की रणनीतिक स्थिति बहुत ही मजबूत हो गयी है. इस समजौते अनुसार, भारत दुक्म बंदरगा में अपने जहाजो को सैर करा सकता है. भारतीय नौसेना के जहाज भी इस बंदरगा का उपयोग कर सकेंगे. इस समजौते से भारत हिन्द महासागर में अपनी स्थिति मजबूत बना सकेगा. और इस तरह चीन से होने वाले समुद्री आक्रमण का भी मूह तोड़ जवाब अब दिया जा सकता है.

भारत ने इससे पहले ही कई अन्य देशो से दोस्ती कर ली है जिससे वह चीन के साथ मुकाबला करने के लिए सक्षम हो गया है. भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगा तक व्यवसायिक पहुँच हासिल कर ली है. और अब ओमान की ओर से दुक्म बंदरगा का प्रयोग करने की भी अनुमति मिल गयी है. यह दोनों करीबी अंतर पर स्थित होने के कारण भारत के लिए फायदेमंद साबित होंगे. चीन के लिये यह बहुत ही चिंताजनक बात बन चुकी है की भारत बहुत ही ज्यादा तेजी से अपनी ताकद बढा रहा है. भारत की इस सफलता से पाकिस्तान से मध्य एशिया तक चीन के बढ़ते प्रभाव को कम किया जा सकेगा. अगर ग्वादर बंदरगा को अपना मिलटरी बसे बनाता है तो भारत भी इस लड़ाई के लिए अब तैयार है.