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चीन के खिलाफ ये देश आया एक्शन में, लाखो की संख्या में सैन्य तैनात

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चीन और अमेरिका को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशो में गिना जाता है. दोनों ही देश आर्थिक रूप से बहुत ही मजबूत है. इन देशों के सैन्य भी दुनिया में बहुत ताकतवर माने जाते है. चीन का सैन्य दुनिया सबसे अधिक है तो वही अमेरिकी सैन्य दुनिया में सबसे आधुनिक और शक्तिशाली है. जाहिर ही यह दोनों देश एक दुसरे के प्रतियोगी है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के शी जिनपिंग अपने देश के प्रति पूरी लगन से कार्यरत है. दोनों नेताओं को दुनियाभर में सक्रीय नेताओं के रूप में जाना जाता है. यह दो देश अब जल्द ही भीड़ जाने की आशंका है.

चीन दक्षिण चीन सागर में अपने पैर पसार रहा है. चीन हमेशा ही अपने हर सीमा को बढ़ने ककी कोशिश में रहता है. किन्तु दक्षिण चीन सागर पर अमेरिका की भी नजर है. अमेरिका और चीन के बिच दक्षिण चीन सागर को लेकर टकराव होने की सम्भावना है. अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध के बाद अब दक्षिण चीन सागर को लेकर भी तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. अमेरिका ने एक बार फिर से विवादित दक्षिण चीन सागर में गश्त लगायी है, और ऐसा कर उसने चीन को खुली चुनौती दे दी है. दक्षिण चीन सागर के इस क्षेत्र में २० मिनट के अंतराल में अमेरिका के २० एफ-१८ लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी और शक्तिशाली विमानवाहक पोत यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट पर उतरे. इस तरह से अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत का शक्ति प्रदर्शन दिखाया.

चीन हमेशा से ही दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा जताता आया है, जिस कारण उसका कई पड़ोसी देशों के साथ विवाद चल रहा है. इसका विरोध करने में भारत का नाम भी शामिल है.अमेरिका का परमाणु शक्ति वाला युद्धपोत एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का नेतृत्व कर रहा था. और उसे विवादित दक्षिण चीन सागर पर गश्त के लिए लाया गया था. अमेरिकी सेना ने विवादित क्षेत्र में इसे नियमित प्रशिक्षण बताया है. यह युद्धपोत अमेरिका के डिफेंस सहयोगी फिलिपींस के पोर्ट की ओर बढ़ा है. सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में नौसैनिक गश्ती करने वाला केवल अमेरिका अकेला देश नहीं है. यहां चीन, जापान और अन्य दक्षिणपूर्व एशियाइ देशों की नौसेनाएं भी गश्त करती रहती हैं. तीन दशक पुराने विमानवाहक पोत के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए स्ट्राइक ग्रुप कमांडर रीयर ऐडमिरल स्टीव कॉलर ने कहा है की ‘हमने आसपास चीन के कई जहाज देखे हैं.’

उन्होंने कहा है की ‘वे उन नौसेनाओं में से एक हैं, जो दक्षिण चीन सागर में गश्त करती हैं लेकिन मैं आपको बता दूं कि हमने जिन जहाजों को देखा है उस पर पेशेवर काम ही हो रहे थे.’ अमेरिका के युद्धपोत ने ऐसे वक्त में दक्षिण चीन सागर में गश्त की है, जब कुछ दिनों पहले ही इस क्षेत्र में चीन की वायुसेना और नौसेना ने बड़े पैमाने पर युध्दअभ्यास किया था. कुछ विश्लेषकों ने असामान्य रूप से इसे चीन की नौसेना की बढ़ती ताकत का प्रदर्शन भी माना था. अमेरिकी सैन्य अधिकारी कॉलर ने कहा की ‘दक्षिण चीन सागर से होकर गुजरना हमारे योजना के हिसाब से नया नहीं है और न ही किसी प्रतिक्रिया के तौर पर ही है. यह एक संयोग है कि इसी समय पर ऐसा हो रहा है.’

कॉलर ने फिलिपींस के सैन्य अधिकारियों को भी एक लाख टन वजनी विमानवाहक पोत का टूर कराया और फ्लाइट ऑपरेशन को दिखाया. कॉलर ने कहा की ‘दक्षिण चीन सागर में और आसपास हम जो भी गतिविधिया करते हैं या किसी भी जलक्षेत्र में जब हम होते हैं तो इसको लेकर एक अंतरराष्ट्रीय कानून है. और इसी कानून को हम मानते हैं.’ पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बन चुकी है. जिस कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. अब दक्षिण चीन सागर पर अमेरिका की गश्त की वजह से दोनों देशों के बीच का तनाव और बढ़ सकता है. यह भी आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी जहाजों के बार-बार दक्षिण चीन सागर में आने से यह क्षेत्र जंग का मैदान भी बन सकता है.

चीन अपने तटीय क्षेत्रों के आसपास अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन को लेकर कड़ी आपत्ति जताता रहा है. यहां तक कि वह उस क्षेत्र को लेकर भी विरोध जताता है, जिसे अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मार्ग बताते हुए स्वतंत्र नौवहन पर जोर देता आया है. पिछले महीने भी अमेरिका का एक शक्तिशाली युध्दपोत दक्षिण चीन सागर में चीन की सीमा के करीब पहुँच गया था. अमेरिकी नौसेना का विध्वंसक पोत दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा बनाए गए कृत्रिम द्वीप के समीप तक पहुंच गया था. युद्धपोत के विवादित द्वीप के १२ नौटिकल मील के दायरे तक पहुंचने से बीजिंग ने काफी नाराजगी जताई थी. अमेरिकी नौसेना का २३ मार्च का यह अभियान रणनीतिक जल क्षेत्र में चीन के नौवहन की आजादी सीमित करने के प्रयास के मुकाबले के तौर पर देखा गया था.

२३ मार्च को अमेरिकी नौसेना का मुस्टिन नामक विध्वंसक जंगी जहाज़ चीन के दक्षिण चीन सागर के संबंधित टापुओं के पास के समुद्री क्षेत्र में अनधिकृत रूप से जा पहुंचा था. चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेन क्वोछांग ने इसपर कहा कि “चीनी नौसेना की ५७० और ५१४ जहाज़ ने तुरंत ही कार्यवाही की, कानून के अनुसार अमेरिकी जंगी जहाज़ की पहचान और सत्यापन किया गया, चेतावनी दी और इसे निष्कासित किया गया.” रेन ने कहा कि “दक्षिण चीनसागर के कई द्वीपों और इसके पास के समुद्री क्षेत्र पर चीन का निर्विवाद सार्वभौमिक अधिकार है. अमेरिका ने कई बार वहां जंगीजहाज़ भेजे है. इस कार्यवाही से गंभीर रूप से चीन की संप्रभुता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाया गया है, अंतर्राष्ट्रीय संबंध के बुनियादी मापदंड का उल्लंघन किया गया, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए एक खतरा है.

अमेरिका की इस कार्यवाही से चीन और अमेरिका के बीच संबंध, दोनों देशों की सेनाओं के बीच संबंध का वातावरण को नुकसान भी पहुंचाया गया है. यह चीन के खिलाफ गंभीर राजनीतिक और सैन्य उत्तेजक कार्रवाही है. चीनी सेना इसका दृढ़ विरोध करती है.” पैरासेल द्वीपसमूह में ट्रिटन द्वीप के को चीन शिक्षा द्वीप करार देता है. इस द्वीप पर ताइवान और वियतनामा भी दावा करते हैं. चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है. वियतनाम, फिलीपीन, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके कुछ हिस्सों पर अपना दावा करते हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से यहाँ अमेरिकी नौसेना पोत की गतिविधियां विवादित द्वीप तक पहुंच गयी है. दक्षिण चीन सागर में दोनों देशों के बिच जारी विवाद और अभी शुरू हुआ व्यापारिक युध्द दोनों देशों को जल्द ही आमने सामने ला सकता है.