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चीन तोड़ी सारी हदें, अपने ही इस मित्र देश को दिया ये बड़ा धोखा

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चीन और उत्तर कोरिया की दोस्ती वक़्त के साथ मजबूत होती नजर आ रही है. लेकिन चीन कोई भी काम खुद का फायदा देख कर ही करता है. चीन का उत्तर कोरिया से दोस्ती करना भी उसके छुपे हितों का ही नतीजा है. इस दोस्ती के पीछे उसले व्यापारिक, आर्थिक और कुटनैतिक हित छुपे हुए है.

कोरिया देश के बटने के बाद कोरियाई प्रायद्वीप उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया बनकर दुनिया के सामने उभरा. कोरियाइ प्रायद्वीप के दोनों देशों के बीच गुरुवार २६ अप्रैल को वर्षों बाद पहला शिखर सम्‍मेलन होने जा रहा है. इसमें उत्तर कोरिया की तरफ से किम जोंग उन हिस्‍सा लेंगे तो वही दक्षिण कोरिया की तरफ से वहां के राष्‍ट्रपति मून जे इस शिखर सम्मलेन में शामिल होंगे. इसके बाद मई में किम की अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप से भी वार्ता होनी तय है. किम जोंग उन की मून जे और डोनाल्ड ट्रम्प के साथ होने वाली इन दोनों बैठकों पर पूरी दु‍निया की नजर है. लेकिन इसमें सबसे ज्‍यादा दिलचस्‍पी यदि किसी देश की है तो वो चीन है. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस मुद्दे के हल से सबसे ज्यादा फायदा चीन को ही होने वाला है.

जानकारों ने कुछ समय पहले एक बात का अनुमान साफ कर दिया था कि यदि चीन चाहेगा तभी उत्तर कोरिया बातचीत के लिए आगे आएगा. मौजूदा समय में उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया और अमेरिका से वार्ता के लिए राजी हो चुका है. ऐसे में चीन की दिलचस्‍पी इस विषय में बढ़ती चली जा रही है. इसकी कुछ वजह काफी अहम है. चीन के सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने इसको लेकर कुछ बातें कहीं हैं. ग्लोबल टाइम्स अखबार ने एक तरफ जहां उत्तर कोरिया के बदले नजरिए का पूरी दुनिया से स्‍वागत करने की अपील की है, तो वहीं दूसरी तरफ उसने कहा है कि यदि इस मुद्दे का हल हो जाता है और कोई समझौता हो जाता है, तो यह कोरियाई प्रायद्वीप समेत चीन के लिए भी काफी फायदेमंद होगा.

उत्तर कोरिया का करीब ९० फीसद कारोबार चीन से होता है. चीन ही उसको कई जरूरी चीजों की आपूर्ति करता है. चाहे वो तेल हो या फिर कोयला या अन्‍य दूसरी चीजें. इस वजह से उत्तर कोरिया में दिन के साथ शुरू होने वाली दिनचर्या का चीन एक अहम बन चूका है. पिछले दिनों जब उत्तर कोरिया को लेकर दुनियाभर में तनाव चरम पर था और संयुक्‍त राष्‍ट्र ने उसके खिलाफ प्रतिबंध और भी कड़े कर दिए थे उस वक्‍त भी चीन ने उत्तर कोरिया को गलत तरीके से ही सही लेकिन कोयला समेत दूसरी चीजों की आपूर्ति थी. इस बात का खुलासा पहले जापान ने किया था बाद में अमेरिका ने भी इस तरह का बयान दिया था कि संयुक्त राष्ट्र के लगाए प्रतिबंधों के बावजूद चीन उसकी मदद कर रहा है.

उत्तर कोरिया शांति की राह पर चल पडा है, यदि उत्तर कोरिया चाहेगा तो दक्षिण कोरिया और चीन के साथ मिलकर एक विशेष आर्थिक जोन बनाकर विकास की राह पर आगे जा सकेगा. रूस और चीन से मिलती सीमा पर उत्तर कोरिया ने एक स्पेशल इकनॉमिक जोन पहले से ही बना रखा है. चीन की सीमा पर इसको साल १९९२ में बनाया गया था. यहां पर ज्यादातर कंपनियां चीन या रूस की हैं. इसके अलावा हाल ही में यहां मंगोलिया ने भी अपना कारोबार शुरू कर दिया है. चीन और उत्तर कोरिया के बीच कई वर्षों से संबंध रहे हैं. इन संबंधों की मजबूती इस बात से भी साफ़ हो जाती है कि पिछले महीने उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन ने अपनी पहले विदेश यात्रा भी चीन की ही की थी.

किम जोंग उन की यह यात्रा इस बात को भी स्पष्ट करने के लिए काफी है कि उनके लिए चीन कितना अधिक मायने रखता है. स्पेशल इकनॉमिक जोन बनाने की बात कर के चीन ने काफी हद तक उत्तर को‍रिया को लेकर अपनी भावी रणनीति भी साफ कर दी है. यह साफ़ है की स्‍पेशल इकनॉमिक जोन बनाकर वह उत्तर कोरिया में भी वही दांव खेलना चाहता है जो अब तक दूसरे देशों में खेलता आया है. इन साब बातो में एक और एहेम बात यह भी है की अभी तक चीन भारत के पड़ोसी देशों को अपनी कर और आर्थिक ढांचे में सुधार करने की बात कर अपनी गिरफ्त में ले रहा था, लेकिन अब उत्तर कोरिया भी कहीं न कहीं उसके निशाने पर आ गया है यह बात स्पष्ट है.

चीन की तरफ से बार-बार यह बात कही जाती रही है कि उत्तर कोरिया को लेकर वह काफी अहम भूमिका निभा सकता है. चीन का यह भी मानना रहा है कि वह दुनिया में उत्तर कोरिया की छवि को सुधारने में भी सहायक हो सकता है. गौरतलब है कि अमेरिका में दो गुट काम करते हैं. एक गुट चाहता है कि अमेरिका को उत्तर कोरिया को लुभाने का काम करना चाहिए. चीन की जिलिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झांग हूझी का मानना हैं कि दुनिया को उत्तर कोरिया की कही बातों पर विश्‍वास करते हुए ओग बढ़ना चाहिए. उत्तर कोरिया ने दो दिन पहले ही एक प्रस्‍ताव को पास कर अपनी बदली रणनीति को सभी के सामने रखा है. इस प्रस्ताव के तहत दुनिया के सा‍थ मिलकर चलने और बेहतर माहौल बनाने की भी बात कही गई है.

जिलिन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झांग हूझी का ये भी कहना है कि किम जोंग उन के सत्‍ता में आने के बाद उत्तर कोरिया ने काफी तरक्‍की की है. लेकिन इस विकास की गति को अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिबंधों ने रोकने का काम किया है. उन्‍होंने उन बातों की तरफ भी इशारा किया है जो चीन की भावी मंशा में प्रकट किए गए हैं. झांग का कहना है की उत्तर कोरिया के सस्‍ते मजदूरों का फायदा पूरी दुनिया को मिल सकता है. इसके अलावा उसकी भौगोलिक स्थिति और विदेशी निवेश का भी फायदा उठाया जा सकता है. चीनी मीडिया का मानना है कि अमेरिका और कुछ दूसरे देश उत्तर कोरिया द्वारा की गई घोषणा का सम्‍मान नहीं कर रहे हैं. इसकी वजह दुनियाभर से उत्तर कोरिया पर जरूरत से ज्‍यादा दबाव बताया जा रहा है.