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ट्रम्प के फैसले से गुस्साए, इस मुस्लिम देश ने जारी किया ये हाहाकारी बयान

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पिछले साल दिसम्बर महीने में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक विवादित फैसला कर लिया था. जिस फैसले के तहत वह जेरुसलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने जा रहे है. और अपनी युएस एम्बसी को भी जेरुसलम में स्थलांतरित करेंगे. युएस की एम्बसी फिलहाल तेल अवीव में स्थित है.

इस फैसले का फिलिस्तान में कड़ा विरोध किया जा रहा है.फिलिस्तान के लोग जेरुसलम को अपनी भावी राजधानी के रूप में देखते है. इस विवादित फैसले के बाद जगह-जगह पर डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की निंदा की गयी.अमेरिका और इजराइल के झंडे जगह-जगहों पर जलाये गए. मिडिल ईस्ट मॉनिटर से मिली खबरों के अनुसार फिलिस्तीन के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्बास ने ट्रम्प के जेरुसलम कदम पर ट्रम्प के निर्णय के खिलाफ लड़ाई जारी करने का वादा किया है. फिलिस्तीन की अधिकारिक न्यूज एजेंसी डब्लूएएफए की जानकारी के अनुसार रामल्लाह के वेस्ट बैंक में एक बैठक के दौरान फिलिस्तानी मुहम्मद अब्बास ने कहा की “फिलिस्तीनी प्रशासन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प या किसी भी अन्य को इजराइल की राजधानी के रूप में जेरुसलम को मान्यता नहीं देने देगा.”

फिलिस्तान के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्बास ने कहा है की “फिलिस्तीनी सरकार ट्रम्प के जेरुसलम कदम के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखेगा और जब तक इजराइल-फिलिस्तीनी मुद्दे का हल नहीं निकल जाता तब तक अमेरिका या किसी भी देश को अपनी एम्बेसी जेरुसलम में स्थान्तरित करने नहीं देगा.” दोनों देशों के समाधान पर जोर देते हुए अब्बास ने कहा की “पूर्वी जेरुसलम सभी धर्मों का धार्मिक स्थान है, इस्लाम,इसाई और यहूदियों. धार्मिक लोग यहाँ आ सकते हैं और अपने धार्मिक महत्वों का पालन कर सकते हैं. उन्होंने कहा की “हम हमेशा कहते हैं पूर्व जेरुसलम हमारे देश की राजधानी है और यह सभी धर्मों के लिए खुली है.” मिडिल ईस्ट मॉनिटर के अनुसार राष्ट्रपति अब्बास ने अरबियों और मुस्लिमों को कब्जाए गए क्षेत्र, विशेषकर जेरुसलम में जाने के लिए कहा.

६ दिसंबर २०१७ को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जेरूसलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने की घोषणा की थी, जिसका फिलीस्तीनी क्षेत्रों में निंदा और क्रोधित विरोध प्रदर्शन किया गया. इजराइल और फिलिस्तीन के बिच संघर्ष चरण पर पहुँच चूका है. गाजा पट्टी पर चल रहे इस संघर्ष में लाखो फिलिस्तानी शामिल हो रहे है. इजराइल सेना के बलप्रयोग से यहाँ सैंकड़ो फिलिस्तानी अपनी जाने गवा चुके है. इसी बिच फिलिस्तीन के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्बास ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर दिया है. अब्बास ने मध्य पूर्व शांति ओराक्रिया में गतिरोध के लिए इजराइल और अमेरिका को जिम्मेदार बताया है. एक समाचार एजेंसी के अनुसार अब्बास ने यह टिपण्णी मोरोक्को के विदेश मंत्री नासेर बौरितो के साथ रामल्ला में एक बैठक के दौरान कही है.

उन्होंने कहा की इजराइल के कदम और अमेरिका की अनुचित नीतिया ही शांति प्रक्रिया में गतिरोध की मुख्य वजह है. जिसकी वजह से दोनों देशों के रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे है. फिलिस्तीन के राष्ट्रपति मुहम्मद अब्बास ने विश्व विश्व समुदाय से अपील की है की अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तावों के अधर पर एक शांति सम्मलेन आयोजित किया जाये जो की फिलिस्तान के हितों के लिए एक तंत्र विकसित किया जाये जिससे शांति प्रक्रिया में कोई बाधा न आ सके. फिलिस्तीन की सरकारी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति मुहम्मद अब्बास ने मोरोक्को के विदेश मंत्री को फिलिस्तीनी क्षेत्र के हालिया घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी है. जो की इजराइल और अमेरिका की नीतियों की वजह से रुका हुआ है. इजराइल और फिलिस्तीन के बिच का विवाद लम्बे समय से जारी है.

दोनों देशो में जारी इस विवाद में अमेरिका हमेशा से ही इजराइल का पक्ष लेता आया है. किन्तु अरबी देशों का झुकाव फिलिस्तीन की ओर रहा है. इस देशों के बिच विवाद मुख्य रूप से गाजा पट्टी क्षेत्र को लेकर है. गाजा पट्टी पर इजराइल और फिलिस्तीन दोनों ही देश अपना अधिकार बताते आ रहे है. इस क्षेत्र पर अधिकार को लेकर कई बार इन दो देशो में युध्द भी हो चूका है. भारत इस विवाद में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है. किन्तु किन्तु भारत हमेशा से ही फिलिस्तीन और इजराइल के बिच शांति चाहता रहा है. भारत के इन दोनों ही देशो से रिश्ते काफी अच्छे माने जाते है. अभी हाल ही में इजराइल के प्रधान मंत्री भारत की यात्रा पर आये हुए थे. और भारत के प्रधानमंत्रि भी इजराइल गए थे.

फिलिस्तीन के विदेश मंत्री रियाज़ मालेकी ने अमेरिका को पूरी दुनिया के लिए खतरा बताया है. मालेकी का कहना है की अमेरिका उन फिलिस्तानियों से दुश्मनी करता है जो अपने अधिकार प्राप्त करने का प्रयास कर रहे है. उन्होंने कहा की अमरीकी विदेश मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में अतिग्राहित धरती शब्द का प्रयोग न होना और इसको जार्डनि नदी के पश्चिमी तट और गज्जा पट्टी में बदलना, फिलिस्तीन धरती की कानूनी हैसियत को बदल नहीं सकता. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को दुनिया में मानवाधिकार के बारे में अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कुछ देशों के नाम का उल्लेख न करते हुए अतिग्राहित शब्द को जार्डन नदी के पश्चिमी तट से बदल दिया गया था और उसके स्थान पर इजराइल. गोलन हाइट्स. पश्चिमी तट और गज्जा शब्द का प्रयोग किया था.