Home विदेश ट्रम्प ने अचानक ही इस देश के खिलाफ दे डाले, ये हाहाकारी...

ट्रम्प ने अचानक ही इस देश के खिलाफ दे डाले, ये हाहाकारी आदेश

SHARE

सीरिया में चल रहे हालातों का पूरी दुनिया पर असर पड़ता नजर आ रहा है. इसमें अमेरिका और रूस के संबंधो पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. ७ अप्रैल को सीरिया में हुए रासायनिक हमले के बाद अमेरिका का गुस्सा फुट पड़ा. अमेरिका ने इस हमले के लिए सीरिया सर्कार, रूस और इरान जिम्मेदार बताया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इन हमलों के बाद कहा की सीरिया के इन हालातों के लिए सीरिया के शासक बशर अल असद और उनका साथ देने वाले रूस और इरान जिम्मेदार है. और जल्द ही इन हमले के जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी होगी. उन्होंने बशर अल असद को जानवर तक कह दिया था. इसके बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाही को मंजूरी दे दी. अमेरिका ने सीरिया के रासायनिक हथियार बनाने और रखने के ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किये थे. अमेरिका ने दावा किया था की उसने सीरिया पर १०० से भी ज्यादा मिसाइल दाग दी थी. किन्तु सीरिया का कहना था की उन्होंने इसमें से अधिकतर मिसाइलों को मार गिराया था. इस हमले के नतीजों की अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पायी है.

अमेरिका ने कहा है की यदि सीरिया और उसके सहयोगी देश सीरिया के लोगों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करना बंद नहीं करते है तो आनेवाले समय में अमेरिका सीरिया पर और भी हमले कर सकता है. साथ ही इसमें अमेरिका और रूस में भी काफी तनाव की स्थिती बन चुकी है. अमेरिका द्वारा लगाये गए आरोपों पर रूस ने कहा है की यह रुसी राष्ट्रपति का अपमान है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. सीरिया पर हमले के बाद अशंका जताई जा रही है की अमेरिका अब रूस को अपना निशाना बना सकता है. जानकारों का कहना है की अमेरिका और रूस के बिच के यह हालात शीत युध्द के ही लक्षण है. सीरिया हमले बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का गुस्सा साफ़ नजर आ रहा है.

राष्ट्रपति ट्रम्प ने जैसे हमले के जिम्मेदार लोगों को सबक सिखाने की ठान ली है. सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को सबक सिखाने के बाद उन्होंने रूस को धमकी दी है. अमेरिका ने बीते शुक्रवार फ्रांस और ब्रिटेन के सहयोग से सीरिया पर हवाई हमले किये थे. और सीरिया को धमकी देते हुए कहा था कि सीरिया और उसके साथियों की हरकतें बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस हमले के बाद रूस ने अमेरिका पर कड़ी आपत्ति जताते हुए चेतावनी दी थी कि परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें. जैसे ही रूस खुलकर सीरिया के पक्ष में आया तो अमेरिका की सरकार ने उन्हें भी रूस को मुहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है. संयुक्त राष्ट्र की बैठक में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने रविवार, १५ अप्रैल को कहा कि अगर सीरिया फिर से रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करता है तो वह अमेरिका की प्रतिक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार रहे.

निकी हेली ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लक्ष्मण रेखा खींच दी है और अमेरिका सीरिया पर दबाव बनाए रखेगा. उन्होंने कहा, ‘‘शनिवार, १४ अप्रैल को की गयी सैन्य कार्रवाई से हमारा संदेश पूरी तरह स्पष्ट है. अमेरिका सीरिया के असद शासन को रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने देगा.’’ हेली ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा परिषद और रूस रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने वालों को जवाबदेह ठहराने के अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रूस के उस प्रस्ताव को भारी बहुमत से अस्वीकृत कर दिया है जिसमें उसने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा सीरिया पर किये गए हमले की निंदा की गयी थी.साथ ही सीरिया के रासायनिक हथियारों के ठिकानों को लक्षित कर गठबंधन द्वारा किये जा रहे हवाई हमलों को सुरक्षा परिषद का मत भी मिल गया है.

रूस की तरफ से बुलाई गई इस आपात बैठक में इस बात को लेकर निराशा भी व्यक्त की गई कि अंतरराष्ट्रीय संगठन की यह सबसे ताकतवर इकाई पिछले सात सालों से चले आ रहे सीरियाई संघर्ष से निपटने में नाकाम नजर आई है. रूस ने सुरक्षा संघटन को तत्काल बैठक बुलाने के लिए कहा था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में रूस के प्रस्ताव पर हुई इस बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, नीदरलैंड, स्वीडन, कुवैत, पोलैंड और आईवरी कोस्ट ने रूस के प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया है. सीरिया में ७ अप्रैल को हुए रासायनिक हमले के बाद पिछले एक सप्ताह में संयुक्त राष्ट्र संघटन में यह पांचवी बैठक थी. बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा कि उन्होंने हमलो में सीरिया में रासायनिक हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जिसे बशर-अल-असद अपने नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं

इस वोटिंग में रूस को सिर्फ चीन और बोलिविया का ही साथ मिला.सीरिया पर हुए हमले के बाद रूस द्वारा बुलाई गयी इस बैठक में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने एक बार फिर रूस और असद सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश सीरिया पर फिर से हमला करेंगे. सीरिया के कथित रसायनिक हमले को लेकर अमेरिका उसके सहयोगी देश रूस पर नए प्रतिबंध लगा सकता है. संयुक्त राष्ट्र में निक्की हेली ने रविवार को कहा कि इन प्रतिबंधों के जरिए उन कंपनियों को निशाना बनाए जाएगा जिन्होंने सीरिया के शासन को ये रसायनिक हथियार उपलब्ध कराए थे. रूस के विदेश मंत्रालय का कहना है कि सीरिया पर पश्चिमी देशों द्वारा यह हमले ऐसे समय में किये गए हैं जब देश के पास शांतिपूर्ण भविष्य का मौका था.

रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने फेसबुक पर लिखा, ”इन सबके पीछे जिम्मेदार लोग दुनिया में नैतिक नेतृत्व का दावा करते हैं और यह ऐलान करते हैं कि वे कुछ अलग हैं. आपको उस समय सीरिया की राजधानी पर हमले करने के लिए वास्तव में अलग होने की जरुरत है जब उसके पास शांतिपूर्ण भविष्य का मौका था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देश ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया पर सैन्य हमले के आदेश दे दिए. इस कार्रवाई में फ्रांस और ब्रिटेन ने उसका साथ दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई कार्रवाई का जवाब है. रूस ने इसे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपमान बताया है. उसका कहना है कि वह इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा