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डोकलाम को लेकर चीन ने दिया ये बड़ा बयान, PM मोदी भी रह गए हैरान

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चीन की पुरानी आदत है हालात देख कर अपने रंग बदलना. चीन अपने फायदे के अनुसार अपने बयान और अपनी भूमिका बदल देता है. चीन ने अपनी तरफ से दोक्लाम मुद्दे पर एक बयान दिया है जो भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्टपति शी जिनपिंग की मुलाकात से ठीक पहले आया है.

चीन ने अब डोकलाम मुद्दे पर अपनी ओर से नरमी के संकेत दिखाते हुए एक नया बयान जारी कर दिया है. चीन के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा कि डोकलाम विवाद भारत और चीन के बीच परस्पर विश्वास की कमी के कारण हुआ है. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि दोनों देशों को अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने एवं धीरे धीरे सीमा विवाद का हल करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच इस हफ्ते होने वाली अनौपचारिक शिखर वार्ता से पहले चीन के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं. भारत और चीन के सैनिकों के बीच पिछले साल सिक्किम के पास डोकलाम इलाके में तनातनी हुई थी और दो महीने से ज्यादा समय तक गतिरोध बना रहा था.

चीन के उप विदेश मंत्री कोंग ने डोकलाम विवाद के बारे में पूछे जाने पर प्रसार माध्यमो से कहा ‘पिछले साल भारत और चीन के बिच दोक्लाम सीमा पर हुई घटना से एक तरह से दोनों देशों के बीच परस्पर विश्वास की कमी का पता चल रहा है.’ यह पूछे जाने पर कि क्या पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात में डोकलाम मुद्दा और सीमा विवाद का मुद्दा भी उठाया जायेगा, कोंग ने कहा कि दोनों नेताओं ने अनौपचारिक शिखर वार्ता करने का फैसला किया है इसलिए नहीं कि सीमा से जुड़े सवाल अब भी अनसुलझे हैं और अनौपचारिक शिखर वार्ता के दौरान हमें इसके बारे में बात करने की जरूरत है , बल्कि इसलिए क्योंकि दोनों देश विदेश रणनीति में एक दूसरे के लिए बेहद महत्व रखते हैं.

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब ३४८८ किलोमीटर लंबे हिस्से पर दोनों देशो में विवाद जारी है. दोनों देश इसके हल के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच २० चरणों की बातचीत कर चुके हैं. कोंग ने कहा की ‘साफ तौर पर सीमा से जुड़ा सवाल महत्वपूर्ण है. दोनों देशों को अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने के लिए मिलकर काम करना होगा और धीरे धीरे इसका हल करना होगा. सीमा विवाद के उचित समाधान से दोनों देशों के बीच सहयोग एवं परस्पर समझ गहरा होगी और आपसी विश्वास बढ़ेगा.’ उन्होंने कहा कि भारत और चीन को परस्पर विश्वास बढ़ाने के लिए और ज्यादा प्रयास करने की जरूरत है. भारत के राजदूत राजदूत गौतम बंबावले ने मार्च में कहा था की चीन सेना ने डोकलाम में यथास्थिति में बदलाव करने की कोशिश की थी.

इसीलिए भारत को इसपर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करनी पड़ी. चीन ने सिक्किम खंड के डोकलाम में सड़क निर्माण की गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई थी. जिसके बाद ७३ दिनों तक चला गतिरोध पिछले साल २८ अगस्त को समाप्त हो गया. सिक्किम क्षेत्र के दोकलम में पिछले साल भारतीय सेना ने चीनी सेना को भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से को अन्य देश से जोड़ने वाले चिकन नैक नामक मशहूर और बेहद पतले सीमाक्षेत्र में सड़क बनाने से रोक दिया था. इस क्षेत्र पर चीन के अलावा भूटान भी अपना अधिकार बताता रहता है. गौतम बंबावाले का कहना था कि डोकलाम जैसी घटनाओं से बचने का सबसे सही तरीका है दोनों देशो में स्पष्ट बातचीत. जब डोकलाम जैसी घटनाएं घटती हैं तो इसका साफ़ मतलब है कि दोनों देश आपसी बातचीत में एक दूसरे के साथ स्पष्टवादी नहीं हैं.

किन्तु उस वक़्त चीन ने भारत के इस बयान से साफ़ असहमति जताई थी. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हू चुनयिंग ने बम्बावले के बयान पर जवाब में कहा था की ‘डोकलाम चीन का हिस्‍सा है क्योंकि हमारे पास इसकी ऐतिहासिक संधिपत्र हैं. चीन की गतिविधियां हमारे सार्वभौमिक अधिकारों के भीतर है. यथास्थिति को बदलने जैसी कोई चीज नहीं है. पिछले साल हमारे ठोस प्रयासों और हमारी बुद्धि के लिए धन्यवाद की हमने पिछले साल इस मुद्दे को ठीक से हल कर लिया था. हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष इससे कुछ सबक जरुर सीखेगा और संधिपत्रों को मानेगा.और भारत यह सुनिश्चित करने के लिए चीन के साथ मिल कर काम करेगा कि द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर वातावरण अनुकूल हो.’’ बीआरआई के जरिये चीन अपने पुराने सिल्क रोड नेटवर्क को फिर से खड़ा करना चाहता है.

इस प्रकल्प के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए भारत की सहमती जरूरी है. लेकिन भारत ने इसपर हस्ताक्षर नहीं किये है. इस प्रकल्प के तहत चीन और पकिस्तान के बिच ५७ अरब डॉलर की लगत से आर्थिक गलियारा बनाया जा रहा है. चीन से पकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक जाने वाला यह गलियारा पाक के अवैध कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है. यह हिस्सा भारत का है. चीन के इस प्रकल्प को भारत ने संप्रभुता का उल्लंघन माना है. पीएम मोदी एयर राष्ट्रपति जिनपिंग के बिच इस सप्ताह होने वाली अनौपचारिक बैठक में उठ सकता है. दूसरी तरफ चीनी विदेश मंत्री कोंग शियानायु ने कहा है की अनौपचारिक वार्ता का मतलब है दोनों नेता मित्रतापूर्ण मोहोल में सहयोग बढ़ने के लिए विचारो का आदान प्रदान कर सकते है. यह न सिर्फ दोनों देशों और लोगों बल्कि इस क्षेत्र एवं विश्व के शांतिपूर्ण विकास के लिए भी अहम् है.