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पाक में इस धर्म के लोगों को बेमौत मारा जा रहा है

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पकिस्तान में हो रही हिंसा बढती ही जा रही है. दक्षिण-पश्चिम बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर में दो हमलों में बंदूकधारियों ने एक ईसाई परिवार के चार सदस्यों सहित नौ लोगों की हत्या कर दी है. इस मामले पर पुलिस की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक यह दोनों ही घटनाएं सोमवार २ अप्रैल की हैं. वहीं, परिवार पर हुए हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन आईएसआईएस ने ले ली है. घटना में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय के एक परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि एक महिला को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया है.

पाक की एक मिडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक बलूचिस्तान के शहर क्वेटा में शाह जमान रोड पर रिक्शे पर जा रहे चार इसाईओं पर बीके सवार चरमपंथियों ने अंधाधुंध फायरिंग की. इस हमले में ४ इसाईओं की मौत हो चुकी है. और एक नाबालिक लड़की को अस्पताल में भारती कर दिया गया है. गोलीबारी करने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए. पुलिस ने आशंका जताई है की यह हमला इसाईओं को ही लक्ष्य बनाकर किया गया है. पकिस्तान की कुल १८ करोड़ की आबादी में सिर्फ २ प्रतिशत से भी कम लोग इसाई है. पकिस्तान में अमूमन इशनिंदा का आरोप लगाकर गैर इस्लाम मानने वालों को इस तरह से हत्याए आम बात है. इसी कारन पिछले कुछ वर्षो में उन पर हमले की घटनाओ में बढ़त हुई है.

पकिस्तान में हुई इस घटना की अंतरराष्ट्रिय स्तर पर पाकिस्तान की सरकार को आलोचनाओ का भी सामना करना पड रहा है. इस से पकिस्तान की प्रतिमा दुनियाभर एक ऐसे देश के रूप में उभरकर सामने आ रही है जहा गैर इस्लाम धर्मावलंबी सुरक्षित नहीं रहे है. हाल ही में पकिस्तान में एक ईसाई व्यक्ति और उसकी गर्भवती पत्नी को जिन्दा जला दिया गया था. लाहोर के बाहरी इलाके में नवम्बर २०१४ में ईशनिंदा का आरोप लगाकर घटना को अंजाम दिया गया था. ईसाई दम्पति शहजाद मसीह और शमा कोट राधा किशन इलाके में इंट भट्ठी के मजदुर थे. उन पर कुरान को अपवित्र करने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद करीब एक हजार लोगों की भीड़ ने हमला किया था. इस दंपति को बुरी तरह मार पिट की गयी.

मार पिट के बाद उन्हें जलते भठ्ठे में फेंक दिया गया था. स्थानीय मौलवी ने मस्जिद से घोषणा कर दंपति के हिलाफ भीड़ को भड़काया था. उसके बाद लोगों की भीड़ ने ईसाई दंपत्ति को चरों तरफ से घेर कर हत्या कर दी थी. दूसरी घटना में, क्वेटा के कामबरनी रोड पर दो समूहों में हिंसक संघर्ष हो गया जिसमें पांच लोग मारे गये और नौ अन्य घायल हो गए. कहा जा रहा है कि अल्पसंख्यक शिया मुसलमान हजारा अपने समुदाय के लोगों के खिलाफ हो रही हिंसा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. उसी दौरान दो गुटों में संघर्ष हो गया. आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ईसाई परिवार पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है. संगठन ने अपनी संवाद समिति अमाक पर इस संबंध में बयान जारी किया है.

दूसरे हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी स्पष्ट नहीं है. पाकिस्तान के एक कोर्ट ने एक ईसाई व्यक्ति और उसकी गर्भवती पत्नी को जिंदा जलाने घटने पर छाए गए मुकदे में २० आरोपितों बरी कर दिया. लाहौर के बाहरी इलाके में नवंबर २०१४ में ईशनिंदा का आरोप लगाकर घटना को अंजाम दिया गया था. कोर्ट ने २० आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था. कोर्ट के अधिकारी के मुताबिक, गवाहों के बयान के बाद इनके खिलाफ हत्या का आरोप साबित नहीं हो प्या है. ईसाई दंपती शहजाद मसीह और शमा कोट राधा किशन इलाके में ईंट भट्ठे के मजदूर थे. उन पर कुरान को अपवित्र करने का आरोप लगा कर करीब एक हजार लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया था.

प्रांतीय पुलिस प्रमुख मोआज्जम जाह अंसारी कहा कि ईसाई परिवार पर यह हमला जानबूझ कर जाति को निशाना बनाने जैसा लग रहा है. हमले में महिला के पिता और तीन अन्य रिश्तेदार मारे गये हैं. अंसारी ने कहा है कि हम जांच कर रहे हैं कि यह रंजिश थी या फिर उन्हें जाति के आधार पर निशाना बनाया गया था. पाकिस्तान में बसे अल्पसंख्यकों ने पिछले दिनों दो दिन का एक सम्मेलन किया था जिसमें हिन्दू, ईसाई, सिख और मिर्जा हुसैन अली नमूरी बेतुत्लाह के अनुयाईयों ने भाग लिया था. सम्मेलन में सभी लोगों ने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि पाकिस्तानी मुस्लिम समाज और अधिकारियों द्वारा हर पहलू से शोषण किया जा रहा है. सेना में भर्ती, सिविल नौकरियां बैंकों तथा अन्य संस्थाओं में अल्पसंख्यकों को नौकरी का मौका ही नहीं दिया जाता.

फिर भी यदि उनकी भर्ती हो भी जाती है तो उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर तैनात नहीं किया जाता और उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है. एक हिन्दू पत्रकार सतनाम ने कहा कि अगर कोई हिन्दू अपनी काबिलियत के बल पर ऊंचे पद पर पहुँच भी जाए तो उसे किसी मुस्लिम जूनियर अधिकारी के नीचे काम करना पड़ता है. पाकिस्तानी कानून में हाउसिंग कॉलोनियों में हिन्दू न तो कोई प्लॉट खरीद सकता है न को मकान. प्रभुदेवा नामके एक हिन्दू ने सकूर में अपने एक मुस्लिम मित्र के नाम पर प्लाट खरीदना पड़ा क्योंकि वह वहाँ जमीन नहीं खरीद सकता था. आज़ादी के बाद हुए विभाजन के बाद भी पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में हर जगह हिन्दुओं का वर्चस्व था मगर आज सभी हिन्दू वहाँ दोयम दर्जे का जीवन जीने को मजबूर हैं.

मैगवार जाति के पढ़े-लिखे हिन्दू नौजवानों ने एक संस्था बनाई है पुकार मैगवार साथ जिसने भविष्य की कई योजनाएं बनाई हैं. पाकिस्तान की १८ करोड़ से अधिक की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी दो फीसदी से भी कम है. बँटवारे के ७० साल बाद भी पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. पाकिस्तान सरकार हिन्दुओं की संख्या कम दिखाने के लिए आँकड़ो में फेरबदल करती है थरपाकर में हिन्दू बहुसंख्या में हैं लेकिन सरकार ने मुसलमानों का बहुमत दिखाने के लिए हिन्दुओं और मुसलमानों की संख्या क्रमशः ४९ और ५१ प्रतिशत कर दी है. पाकिस्तान के संविधान में कहा गया है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सरकार को हिफ़ाज़त करनी पड़ेगी और उन्हें नौकरियाँ देनी होंगी लेकिन हक़ीक़त में ये सब बातें कागज़ों पर ही सीमित है. पाकिस्तान के स्कूलों हिन्दुओं के बच्चों को हिन्दू धर्म के बारे में नहीं पढ़ सकते न कोई हिन्दू अपने बच्चे को हिन्दू धर्म के बारे में पढ़ा सकता है, हर हिन्दू बच्चे को इस्लाम की शिक्षा लेना जरुरी है.