Home विदेश बर्बाद हुआ कोरिया का तानाशाह, चीन ने कोरिया को दिया ये सबसे...

बर्बाद हुआ कोरिया का तानाशाह, चीन ने कोरिया को दिया ये सबसे बड़ा झटका

SHARE

चीन कई बार ऐसे फैसले लेता है जो बहुत ही अपुर्वानुमेय होते है. चीन हमेशा ही अपने खुद के हित के बारे में सबसे पहले सोचता है. यदि वह किसी भी देश की मदत भी करता है तो उसका खुद का फायदा उसमे खोज ही लेता है. ऐसे में यदि कोई देश चीन से दोस्ती भी कर ले तो उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकता है. कई बार चीन अपने ऊपर कोई सवाल उठने से पहले किसी देश से अपने सम्बन्ध को तोड़ भी सकता है. वह पहले खुद के बारे मे सोचता है और फिर किसी भी मित्र देश के बारे में.

चीन और उत्तर कोरिया की दोस्ती की चर्चा हर तरफ हो रही है, किन्तु इन दो देशों में भी कुछ मतभेद है ये अब साफ़ हो रहा है. चीन हमेशा ही उत्तर कोरिया का एक अच्छा दोस्त रहा है. लेकिन अब चीन ने उत्तर कोरिया को एक बड़ा झटका दे दिया है. चीन ने उत्तर कोरिया पर लगाम कसते हुए दोहरे उपयोग में आने वाली ३२ चीजों का उत्तर कोरिया में निर्यात करने पर प्रतिबंध लगा दिया है. ये ऐसी चीज़े हैं जिनका हथियारों के निर्माण में इस्तेमाल होता है.वाणिज्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार इन चीजों की सूची में रेडिएशन मॉनीटरिंग उपकरण और ऐसे सॉफ्टवेयर शामिल हैं जिनका इस्तेमाल फ्लुइड डायनैमिक्स और न्यूट्रॉन के लिए किया जाता है. चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार देर रात अपनी वैबसाइट पर एक वक्तव्य जारी कर इस बात की जानकारी दी है.

चीनी वाणिज्य मंत्रालय के इस वक्तव्य के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रस्ताव संख्या २३७५ के मुताबिक दोहरे उपयोग वाली ३२ वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया दिया गया है. उत्तर कोरिया के छठे परमाणु परीक्षण को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गत सितंबर में प्रस्ताव २३७५ को अंगीकार किया था और उसी के तहत चीन ने इन सामानों के निर्यात पर रोक लगा दी है. रविवार को प्रसारित किये गए मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ये प्रतिबंध परंपरागत हथियारों के विकास पर भी लागू होता है. चीन की तरफ से यह घोषणा उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन, दक्षिण कोरियाई नेता और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच होने वाले आगामी मुलाकात के पहले आई है. चीन उत्तर कोरिया का एक मात्र प्रमुख व्यापार सहयोगी देश है.

चीनी आंकड़ों के मुताबिक तो पिछले साल की तुलना में इस साल फरवरी में उत्तर कोरिया के चीन के निर्यात में ३२.४ फीसदी की कमी आई थी. समुद्री खाद्य और कपड़ों सहित उत्तरी कोरिया के आयात में फरवरी में ९४.७ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. क्योंकि चीनी कंपनियों ने अमेरिका प्रतिबंधों के बाद प्योंगयांग के साथ व्यापार करने से खुद को दूर कर लिया है. उत्तर कोरिया के लिए चीन बेहद महत्वपूर्ण है. बाहरी दुनिया से जुड़े रहने के लिए उत्तर कोरिया बहुत हद तक चीन पर ही निर्भर है. इन दो देशों के बीच बहुत सी चीजों की अदला-बदली होती है और दोनों कई मायनों में एक-दूसरे के लिए अहम हैं.पिछले दो दशकों में उत्तर कोरिया से चीन घूमने जाने वालों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोत्तरी हुई है.

चाइना नेशनल टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल २०१६ में २१०००० उत्तर कोरियाई लोग चीन घूमने आए थे. हालांकि चीन घूमने जाने वाले लोगों में लैंगिक असमानता रही- उदाहरण के तौर पर साल २०१५ में घूमने जाने वाले ८४ फ़ीसदी पर्यटक पुरुष थे. वैसे नॉर्थ कोरिया इन द वर्ल्ड वेबसाइट की मानें तो ज़रूरी नहीं कि ये आंकड़े सटीक ही हों. कई बार ऐसा होता है कि कुछ उत्तर कोरियाई लोग जल्दी-जल्दी और बेहद कम वक्त के लिए चीन आते हैं. ऐसे में उनकी गिनती एक से ज़्यादा बार हो जाती है. साल २०१५ में चीन जाने वाले ज़्यादातर लोग काम के सिलसिले में वहां गए. जिनकी संख्या ९४ हज़ार के करीब थी. हालांकि इस बात का कोई तय आंकड़ा मौजूद नहीं है जो ये बताए कि उत्तर कोरिया के कितने लोग दूसरे देशों में काम करते हैं.

पर अनुमान है कि करीब ५० हज़ार से एक लाख उत्तर कोरियाई लोग दुनिया के दूसरे देशों में काम करते हैं. उत्तर कोरिया सबसे ज्यादा कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम का आयात करता है. इसके अलावा मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल्स और लॉरी का भी आयात करता है. पिछले साल एक चाइनीज़ शिपिंग कंपनी को उत्तर कोरिया से लग्ज़री चीजों की स्मगलिंग करने का दोषी पाया गया था. उन लग्ज़री सामानों की सूची जिसे यूएन से मान्यता है: दरी और कशीदे, पोर्सलीन और बोन चाइना के सामान, स्नोमोबाइल और रेसिंग कार. चीन सबसे ज़्यादा कोयले का आयात करता है. इसके अलावा लोहा, समुद्री खाना और कपड़ों का भी आयात होता है. उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन पिछले महीने बीजिंग गए थे. जहाँ उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की.

सात साल पहले उत्तर कोरिया का नेता बनने के बाद ये उनका पहला विदेश दौरा था. उनकी इस यात्रा का मकसद दक्षिण कोरिया के मून जे और अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली आगामी वार्ता से पहले रणनीति बनाना ही था. किम के सत्ता में आने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा भी रही थी. वह अपनी निजी ट्रेन से चीन पहुंचे थे. साथ ही इस यात्रा के दौरान कड़ी सुरक्षा का इंतजाम किया गया था और इस यात्रा के बारे काफी गोपनीयता भी बरती गयी थी. उन्‍होंने चीन की यात्रा भी इसलिए ही की थी क्‍योंकि वह उसकी अहमियत को पहचानते हैं. किम जोंग उन की इस यात्रा की जानकारी देते हुए चीन ने कहा था कि उत्तर कोरिया अपने देश में कोरियाई प्रायद्वीप में शांति लाने, तनाव कम करने के साथ-साथ निशस्‍त्रीकरण के लिए भी पूरी तरह से तैयार है.