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भारत के खिलाफ इस देश से की पाकिस्तान ने शिकायत, मिला ये जवाब

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पाकिस्तान आये दिन भारत के साथ चल रहे कश्मीर विवाद को लेकर रोता रहता है. पकिस्तान का कहना है की भारत को उसे कश्मीर सौप देना चाहिए. उसने अपने देश में आतंकवाद को पनाह दे रखी है. वह भारत के साथ अपनी कश्मीर सीमा पर भी आतंकवादी ताकत का इस्तेमाल कर रहा है. पकिस्तान की अब आदत हो गयी है किसी बात के लिए भारत को दोष देने की. पकिस्तान ने आजतक कई बार कश्मीर की LOC पर शस्त्रसंधी का उल्लंघन किया है, लेकिन भारत की ओर से किये गए किसी भी गोलीबारी का गतिविधियों का वह बतंगड़ बनाता रहता है.

वैसे तो पकिस्तान में आतंकवाद को पनाह दिए जाने की वजह से वह दुनियाभर के अधिकतर देशों की नजर में बुरा बन चूका है, लेकिन वह यह बात मानने को बिलकुल ही तैयार नहीं है की यह उसकी गलती है. वह कई बार वैश्विक परिषदों में भी कश्मीर मुद्दे को उठाता है. इस बार भी पकिस्तान ने ऐसा ही कर जापान का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की, किन्तु जापान ने उल्टा पकिस्तान को ही सवाल किये. गुरुवार को पकिस्तान और जापान के राजदूतों के बिच मुलाकात हुई. इस मुलाकात के दौरान पकिस्तान ने कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की. उसने कहा की पाकिस्‍तान में जापानी राजदूत तकाशी कुरई के साथ मीटिंग में पाकिस्‍तान के सुरक्षा सलाहकार नसीर खान जंजुआ ने गुरुवार को कश्मीर मुड़े की बात छेड़ दी.

लेकिन जापान के राजदूत तकाशी कुरई ने इस बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया. नासिर खान जंजुआ ने कहा की कश्‍मीर की हालात से ध्‍यान हटाने के लिए भारतीय सेना एलओसी पर फायरिंग कर रही थी. जबकि जापानी राजदूत ने जंजुआ से उत्‍तर कोरिया-अमेरिका के संबंध पर चर्चा की और इसपर उनका पक्ष जानने की इच्छा जताई. जापानी राजदूत ने इसको टालते हुए अफगानिस्तान की स्थिति का मुद्दा उठा दिया. प्रसार माध्यमों के रिपोर्ट्स के अनुसार नासिर खान जंजुआ ने जापानी राजदूत से कहा कि कश्मीर की स्थिति से ध्यान भटकाने के लिए भारतीय सेना लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर फायरिंग करती है. जापानी राजदूत ने इस मुद्दे को नजरंदाज करते हुए अफगानिस्तान की स्थिति पर पाकिस्तान से जवाब मांगा. जिसके जवाब में पाक के सुरक्षा सलाहकार ने जापानी राजदूत को बताया कि प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने हाल ही में अफगानिस्तान की यात्रा की थी.

उन्होंने शांति वार्ता की पहल करने के लिए अफगानी राष्ट्रपति अशरफ घनी की तारीफ भी की. पकिस्तान के प्रधानमंत्री शहीद खाक्कान अब्बासी ने ६ अप्रैल को अफगानिस्तान का एक दिन का दौरा किया था. इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और चीफ एक्जीक्यूटिव अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से मुलाकात की थी. उन्होंने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई थी कि अफगानिस्तान की समस्या का कोई सैनिक हल संभव नहीं है. दोनों नेताओं ने कहा था कि अफगानिस्तान मसले का सबसे बेहतरीन हल राजनीतिक हल है. दोनों ने अपनी धरती एक दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किए जाने पर भी सहमति जताई थी. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का राग गाने वाले पाकिस्तान को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी है.

कश्मीर की समस्या का हल क्या है, क्या होगा यह कोई नहीं जानता. भारत दशकों से वहां आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रहा है. भारतीय सुरक्षा बल के कई सैनिक वहां शहीद हो चुके हैं. तमाम प्रदर्शनों में कश्मीरी लोगों ने भी जान गंवाई है. लेकिन वास्तविक मायने में शांति अभी तक नहीं आई. पाकिस्तान आए दिन कश्मीर का राग देश व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलापता रहता है. भारत और पाकिस्तान में संबंध हमेशा से ही ऐतिहासिक और राजनैतिक मुद्दों कि वजह से तनाव में रहे हैं. इन देशों में इस रिश्ते का मूल वजह भारत के विभाजन को देखा जाता है. कश्मीर विवाद इन दोनों देशों को आज तक कई उलझाए है और दोनों देश कई बार इस विवाद को लेकर सैनिक कार्रवाई कर चुके हैं. इन देशों में तनाव मौजूद है जबकि दोनों ही देश एक दूजे के इतिहास, सभ्यता, भूगोल और अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए हैं.

भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर विश्वभर में पाकिस्तान को अलग थलग करने की मुहिम छेड़ दी. संयुक्त राष्ट्र में भारत की विदेश मंत्री ने आतंक का पोषण करने वाले देशौं की निंदा की. पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में कहा कि कश्मीर छीनने का सपना पूरा नहीं होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान ‘खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते’ के साथ ही भारत ने सिंधु जल संधि की समीक्षा शुरु कर दी है. पाकिस्तान ने इसे युद्ध की कार्यवाही बताया और भारत के खिलाफ परमाणु हथियारों के उपयोग की भी धमकी दी. संधि रद्द होने के डर से पाकिस्तान ने विश्व बैंक का दरवाज़ा खटखटाया है. भारत ने नवंबर २०१६ में इस्लामाबाद में होने वाले दक्षेस शिखर सम्मेलन का बहिष्कार करने की घोषणा की थी. बांग्लादेश, अफगानिस्तान व भूटान ने भी भारत का समर्थन करते हुए बहिष्कार की घोषणा की.

भारत ने पाकिस्तान को दिए गए मोस्ट फेवर्ड नेशन के दर्जे पर पुनर्विचार की घोषणा की. २९ सितंबर २०१६ को भारत के डीजीएमओ ने प्रेस काँफ्रेंस में बताया कि भारतीय सेना ने आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल हमले किए. पाकिस्तान के सभी पड़ोसी देशों तथा अमेरिका, ब्रिटेन, रूस आदि पश्चिमी देशों का यह आरोप रहा है कि पाकिस्तान प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से विभिन्न आतंकी कार्यवाइयों में लिप्त रहा है. सन २०११ में ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान की राजधानी के पास अमेरिका द्वारा मारे जाने पर यह आरोप पुष्ट हुआ है. इसे ‘आतंकियों का स्वर्ग’ कहा जाता है और संसार का सर्वाधिक ख़तरनाक देश माना जाता है. प्रमुख इस्लामी आतंकी संस्थाएँ जैसे लश्कर-ए-तैयबा, लश्कर-ए-ओमर, जैश-ए-मोहम्मद, हरकतुल मुजाहिद्दीन, सिपाह-ए-सहाबा, हिज़्बुल मुजाहिदीन आदि सब के सब पाकिस्तान में रहकर अपनी आतंकी गतिबिधियाँ चलाते हैं. कई मामलों में आईएसआई से इन्हें सक्रिय प्रशिक्षण एवं अन्य सहयोग मिलते हैं.