भारत से दूर हुए ये दो प्रदेश PM मोदी भी रह गए हक्के-बक्के

भारत के पड़ोस देशो में चीन अपनी ताकदे दिखा रहा है. अब इसके असर भी दिखने  शुरू हुए है. चीन की इस चाल से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति को धक्का लगेगा. आपको को बतादे की हमारा पडोसी मुल्क में से एक श्रीलंका ने अपना हंबनटोटा बंदरगाह ९९ साल के लिए चीन को सौंप दिया है.

श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह की औपचारिक्ता पूरी होने के तुरंत बाद चीन ने नेपाल की ओर अपना कदम बढाया है. इसीके साथ नेपाल में चीन का गतिजोद्ता सरकार बनाने का रास्ता साफ़ हुआ. इन सब परिस्तितियोंको देखते हुए भारत के एक और पडोसी मालदीप पर चीन का  दबदबा बढ़ रहा है और ये बात भारत को चिंतित कर रही है. दुनिया के राजनैतिक तद्यो का ये मानना है की, इन पडोसी देशों में अस्थिर राजनीती है. इसी अस्थिर राजनीती  का फायदा चीन उठा रहा है. इसीके चलते चीन इन देशो के राजनीतीयोको लुभाने में कामयाब रहा है.नतीजा ये निकला की इन देशो ने भारत को नजरंदाज़ करना शुरू किया है. मालदीप ने तो भारत के राजदूतो की अनुमति के बिना ही तिन जन प्रतिनिधियोको सस्पेंड किया है. ये बात दिखाती है की ये भारत का सीधे तोर पे अपमान है.

चीन ने किया ये कारनामा  भारत के राजनीतीयोंको हैरान कर रहा है. अब भारत ने इन सब परिस्थितियों को देखते हुए यही उम्मीद जताई है की, पडोसी देश नेपाल, श्रीलंका, और मालदीप भारत की इन संवेदन शीलता को देखते हुए दुसरे देशो से और संबंध बढ़ाएंगे. आपकी जानकारी के लिए बतादे की ३ साल पहले नेपाल में जब आर्थिक नाकेबंदी को भारत ने समर्थन किया था उस समय नेपाल के प्रधानमत्री K P शर्मा ओली ही थे जिन्होंने भारत के बजाय चीन के साथ परगामंसंधी की थी. लेकिन इसके बाद जो हुआ वो सबको पता ही है, चीन ने उसी समय पलटी मारी क्योंकि ये आर्थिक तौर पे व्यावहारिक साबित नहीं हुआ. इसका नतीजा ये निकला की नेपाल को अपनी आर्थिक जरुरतोंको पूरा करने के लिए भारत पर ही निर्भर होना पड़ा. पिछले कुछ सालो से नेपाल पर चीन अपनी आर्थिक, सामाजिक तकदोंका उपयोग करके दबदबा बढा रहा है. चीन इन सब तरीको से भारत को चिंतित कर रहा है. आपको बतादे की मालदीप भारत की किनारपट्टी से  ३०० किलोमीटर दूर है. चीन ने कुछ दिनों पहले मालदीप के कुछ द्वीप पर्यटन के नाम पर लीज में लिए है. भारत को ये आशंका है, की कही न कही चीन उस स्थान पर सैनिक सुविधाए विकसित कर सकता है.