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भारत से पानी मिलाना हुआ बंद तो गुस्से में आया पाक, दे दिया ये बड़ा बयान

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भारत और पकिस्तान में सिन्धु नदी को लेकर चल रहा विवाद आभू जारी है. सिन्धु नदी भारत से हो कर पकिस्तान जाती है. दोनों देशो ने इस नदी पर अपनी अपनी परियोजनाए बनाना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान ने भारत से अपने अधिकारियों को सिंधु नदी घाटी में भारतीय परियोजना का निरीक्षण करने की अनुमति देने को कहा है. नई दिल्ली में स्थायी सिंधु आयोग की दो दिवसीय बैठक में पाकिस्तान ने भारत से यह आग्रह किया. भारत ने कहा है कि सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुसार वह व्यवस्था करेगा. यह जानकारी शुक्रवार को अधिकारियों से मिली है.

भारत और पाकिस्तान ने बीच शुक्रवार को स्थायी सिंधु आयोग की बैठक हुई. इस बैठक में सिंधु जल संधि से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई. स्थायी सिंधु आयोग की यह अब तक की ११४वीं बैठक है. यह शनिवार को भी जारी रही. इस दौरान भारत की कुछ पनबिजली परियोजनाओं की डिजाइन पर पाकिस्तान की आपत्ति व संधि के तहत दूसरे मुद्दों पर दोनों देशो में चर्चा की गयी. शुक्रवार को ११४वे बैठक के दौरान दोनों देश सिंधु नदी पर जम्मू-कश्मीर में भारत की दो जलविद्युत परियोजनाओं पाकल दुल और लोअर कालनई पर अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे. दोनों देशों के बीच चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच इस मुद्दे पर बैठक में सरलता से बातचीत हुई. लेकिन इन दो परियोजनाओं पर पाकिस्तान के विरोध के बीच जम्मू-कश्मीर में एक अन्य भारतीय जलविद्युत परियोजना पर बात ही नहीं हो पाई है.

इस जलविद्युत परियोजना के डिजाइन पर भी इस्लामाबाद को आपत्ति है. भारत ने इस पर वार्ता की पेशकश की, लेकिन पाक प्रतिनिधिमंडल ने इसके लिए पहले ही आयोग से ऊंचे यानि सचिव स्तर पर वार्ता जारी होने की बात कहकर प्रस्ताव नकार दिया. भारतीय प्रतिनिधिमंडल में सिंधु जल आयुक्त पीके सक्सेना, तकनीकी एक्सपर्ट और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि थे, जबकि छह सदस्यीय पाक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह कर रहे हैं. पिछली बार पाकिस्तानी टीम के अधिकारियों ने साल २०१४ में भारत में सिंधु नदी घाटी का दौरा किया था. सिंधु नदी की सहायक नदी चिनाब की घाटी पर भारत की दो परियोजनाएं बनी हैं. इसके तहत पाकल दुल में १००० मेगावाट व लोअर कालनई में ४८ मेगावाट जलविद्युत बनेगी. लेकिन पाकिस्तान की ओर से इन परियोजनाओं के लिए बांध निर्माण को सिंधु संधि का उल्लंघन बताया जा रहा है.

लेकिन १९६० में हुई सिंधु जल बंटवारा संधि के अनुसार भारत इन परियोजनाओं के डिजाइन को सही बता रहा है. दोनों ही देश एक-दूसरे के यहां की स्थिति जानने के लिए इस संधि के तहत निरीक्षण करते रहते हैँ. दोनों देशो में कुल ११८ दौरे हुए हैं. जिसमें भारत में पाक ने ७० बार और पाक में भारत ने ४८ दौरे किए है. साल २०१४ में आखिरी बार पाकिस्तान के अधिकारियों ने सिंधु नदी घाटी की जांच की थी. दोनों देश साल में कम से कम एक बार स्थायी सिंधु आयोग की बैठक में वार्ता करते हैं. पिछली बार मार्च २०१७ में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बैठक आयोजित की गई थी. भारत और पकिस्तान की जनसंख्या लगातार और तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में पानी की बढती मांग ज़ाहिर है. दोनों देशो में बढ़ रहे प्रदुषण के साथ मौजूदा जल स्त्रोत प्रदूषित हो रहे है.

पिने योग्य पानी की मात्रा घटती जा रही है. आनेवाले सालो में पानी की समस्या दोनों ही देशो में गंभीर रूप ले सकती है. दोनों देशों के बीच १९६० में सिंधु जल समझौता हुआ था. इस समजौते के तहत भारत के पास व्यास, रावी और सतलुज और पाकिस्तान के पास सिंधु, चेनाब और झेलम नदी के पानी के इस्तेमाल का अधिकार है. लेकिन इनमे से ज्यादातर नदियां भारत से होकर गुजरती हैं. ऐसे में पाकिस्तान को डर सता रहा है कि भारत कहीं उसके जलस्रोत पर रोक न लगा दे. और इसी डर की वजह से पाक के भारत से भिड़ने के लक्षण है. भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर के विवादित क्षेत्र में हजारों की संख्या में मजदूर दिन रात हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट्स की खुदाई के लिए लगे हुए है.

दोनों देश यहां नीलम या किशनगंगा नदी पर बड़े से बड़े पावर प्लांट्स स्थापित करने में जुटे हुए है. लाइन ऑफ कंट्रोल के दोनों ओर दो प्रॉजेक्ट्स पूरे होने वाले हैं. दोनों ही देश नीलम नदी का अधिकतम पानी चाहते है. इसलिए नीलम नदी पर दोनों देशो के बीच में पानी को हथियाने को लेकर तनाव चल रहा है. भारत व पाकिस्तान दोनों ही विकासशील अर्थव्यवस्था में आते है. ऐसे में बढ़ती आबादी के चलते इन्हें अधिक मात्रा में जल की आवश्यकता है. इसी के लिए भारत व पाकिस्तान ने नीलम नदी के तट पर अपने-अपने प्रोजेक्ट चालू कर रखे है. पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में चिंता जताई थी कि पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति नहीं होने से पाकिस्तान की खाद्य आपूर्ति व दीर्घकालिक विकास के लिए कड़ी मुसीबत उत्पन्न हो सकती है. नीलम नदी का पानी अंतत: सिन्धु नदी से जाकर मिलता है.

सिन्धु एशिया की सबसे लंबी नदी है. और सिन्धु नदी दोनों देशों की संवेदनशील सीमाओं को तय करने का काम भी करती है. बढ़ती जनसंख्या के कारण दोनों देशों में जन संसाधनों में कमी आ रही है और दोनों देश ताजे पानी पर नियंत्रण बनाए रखने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं. किशनगंगा कहलाने वाली नीलम नदी तिब्बत से निकलकर कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान जाती है. पाक के पंजाब प्रांत के साथ ही कुछ अन्य बड़े हिस्से की पानी की जरूरत इसी नदी के पानी से पूरी होती है. अगर इन प्रोजेक्ट्स का काम इसी तरह से चलता रहा तो ये मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच में तनाव की स्थिति उत्पन्न कर सकता है. इसका सबसे ज्यादा डर पाकिस्तान को है. क्योंकि भारत में पानी की बढ़ती जरूरतों की वजह से इस नदी पर बन रहे पकिस्तान के प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं.