Home विदेश मचा हाहाकार, काम करने गए इस मुस्लिम देश में फंसे 3000 भारतीय

मचा हाहाकार, काम करने गए इस मुस्लिम देश में फंसे 3000 भारतीय

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खरिफा नेशनल कम्पनी में कई प्रवासी भारतीय अपना वेतन न मिलने के कारण फस चुके है.कई प्रवासी भारतीयों की वीसा की अवधि भी ख़त्म हो गयी है .कहा सा मदद भी नहीं मिल रही .ऐसे वक्त पर अब प्रवासी भारतीय यहाँ के भारत सरकार पर उनकी नजरे टिकी हुई है.

कुवैत में रहनेवाले प्रवासी भारतियों का हाल कुछ गंभीर हुआ है.कुवैत में रहनेवाले भारतियों के पास  घर पर  कुछ खाने को तो कुछ खरदीने के लिए भी पैसे नहीं है.इसी के कारण वहा के भारतीय कहते है की हमारी सिर्फ एक ही दरख्वास्त है की हमें हमारे घर भेजा जाये.कुवैत स्थित भारतियों का कहना है की उन्हें घर भी नहीं भेजा जा रहा है.वहा का एक भारतीय कर्मचारी तो कहता है की मुझे कभी कभी आत्महत्या करने का भी ख़याल में आता है.इसीलिए भारतीय कर्मचारियो ने यह बायाँ सोशल मीडिया पर किया शायद  जिससे कोई मदद का हाथ बढ़ जाए. उन्होंने कहा की हम भारतीय दूतावास में भी मदद के लिए जाते है लेकिन वहा दूतावास से भी उन्हें निराशा के साथ बहार पड़ना पड़ता है.भारतीय कर्मचारियों का कहना है की अगर हम करे तो अब क्या करे.

कुवैत में फसे हुए भारतीय कर्मचारियों ने खुद ये लफ्ज निकाले है ताकि भारत से कोई मदद उनको मिले.कुवैत में स्थित एक इन्फ्रास्ट्रकचर कम्पनी जिसका नाम खराफी नेशनल है, उसमें ७३०० भारतीय कर्मचारी फंसे हुए है.अब तक दस महीने होने के बावजूद भी इन्हें इनका वेतन नहीं मिला है.एक साल से ज्यादा का समय हो गया ना इन कर्मचारियों के पास खाने को खाना और ना पैसे. जो हर रोज़ अपना पेट भरने के लिए जद्दोजहद कर रहें है.इनमे से कई भारतीय कर्मचारी तो ऐसे है जिन्हें ना वेतन मिला है और कई भारतीयों के पास के वीसा है उसकी अवधि भी भी कुछ महीने पाहिले ख़त्म हो चूका है.इसका मतलब यह है कि वे बिना जुर्माना भुगते घर भी नहीं जा सकते है, और भुगतान करने के लिए उनके पास पैसे नहीं है.

इसका मतलब यह है कि वे बिना जुर्माना भुगते घर भी नहीं जा सकते है, और भुगतान करने के लिए उनके पास पैसे नहीं है. अब उनकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उन्हें यह तक समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वो इस दलदल से कब बाहर निकलेंगे.कुवैत में काम करने वाले तमिलनाडु मूल के मुरुगन ने कहा कि, “मेरे पास मेरे बच्चों और पत्नी को देने के लिए भी पैसे नहीं है. मैने एक साल से अपने घर में पैसे नहीं भेजें है. हम में से कुछ के वीज़ा हैं हमें वीज़ा की अवधि खत्म होने की वजह से भारी जुर्माना देना होगा. मुझे भारत वापस जाने के लिए 80,000 रुपये का भुगतान करना होगा. मैं इतने पैसे कहाँ से लाऊंगा.” आपको बता दें कि, वीज़ा की अवधि खत्म होने के बाद 2 दिनार(424 रुपए) प्रति दिन का शुल्क देना होगा.

 

ऐसे परेशानी के हाल में वहा की समाजी कार्यकर्त्ता ने भारतियों के लिए हाथ बढ़ाया..इन परेशान हाल प्रवासियों के लिए मदद का हाथ बढाने के लिए सामने आने वाली शख्सियत है कुवैत की सामाजिक कार्यकर्ता शाहीन सय्यद है, जो भारतीय मूल की रहने वाली है.रिपोर्ट के मुताबिक़ , वर्ल्ड न्यूज़ अरेबिया से बात करते हुए शाहीन ने बताया कि, उन्होंने प्रवासियों की मदद करने का फैसला किया. उनका कहना है की यहाँ के लोग भूखे प्यासे ही अपनी जिंदगी काट रहे है.. कुछ दिनों तक तो शाहीन ने इन्हें अपने पास से खाना खिलाया. लेकिन प्रवासियों की तादाद अधिक होने की वजह से वह इनका पेट भरने के लिए असमर्थ होने लगीं, तब उन्होंने कुवैत के स्थानीय सिख समुदाय के बात करके भूखे प्रवासियों का पेट भर ने का इंतज़ाम किया.

अब इसके कारण उनको एक वक्त का खाना मुहय्या करने के लिए राजी हो गए.उसके बाद उन्होने स्थानीय मुस्लिमों से बात की जिससे खाना मिल पा रहा है,अब कुवैत स्थित भारतीय कर्मचारियों की उम्मिदे भारत सरकार पर टिकी हुई है.भारतीय कर्मचारियों के मन में सवाल खड़ा है की अब इन हालात के लिए आखिर अब कौन जिम्मेद्दार है.अब ऐसे स्थिति में भारतीय कर्मचारी करे तो क्या करे ,वोह आत्महत्या भी नहीं कर सकते क्योंकि स्वदेशा में उनकी कोई राह देख रहा है और कोई है जो उनकी आशए पर जिंदगी जी रहा है.इसीलिए भारतीय प्रवासियों की अपने वतन की सरकार पर उम्मिदे टिकी हुई है क्योंकि वहा से ही उन्हें कही मदद मिल सकती है.उन्हें उस पल का इन्तेजार है जीस पल भारत सरकार उनकी मदद कर सकेगा,उन्हें पैसो का भुगतान करने में कोई मदद करे.

भारतीय प्रवासियों का कहना है की आधिकारिक तौर पर कुवैत में फसे भारतियों की भारत सरकार की मदद करनी ही चाहिए और प्रवासियों को उनका हक्क मिलना चाहिए.कर्मचारियों की परेशानी को मद्देनज़र रखते हुए कुवैत सरकार ने अवैध तरीकों से रहने पर मजबूर प्रवासियों के लिए जुर्माने को माफ़ करने का ऐलान किया है. सरकार के इस फैसले से वहां के हजारों भारतीय प्रवासियों को राहत तो मिली है. दरअसल, वेतन न मिलने की वजह से हजारों भारतीय प्रवासियों को मजबूरन अवैध तरीके से कुवैत में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है. मंगलवार को कुवैत सरकार ने ऐलान किया कि इन भारतीयों पर किसी प्रकार का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. यह रियायत 29 जनवरी से 22 फरवरी के लिए मिली है. वहा वीसा अवधि खत्म होने का ऐलान तो किया है लेकिन प्रवासियों के वेतन का क्या जो उन्हें अभी तक नहीं मिला.अब प्रवासी भारत की उम्मीदों पर ही अपना पल बिता रहे है.