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युद्ध की हालत में सेना ने रखी ये मांग, रक्षामंत्र्लय सहित मोदी भी हुए हैरान

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जैसा की सब जानते है की पाकिस्तान के साथ सिक्किम क्षेत्र में तक्रार हो रही है और ऐसे में रक्षा मंत्रालयद्वारा हथियारों और अन्य सैन्य सामग्री के खरीदने के लिए २०,००० करोड़ रुपयों की मांग की गई है. जानकारी के मुताबिक़ ये मांग पाकिस्तान और भारत के बीच बिघडे हालात में की गयी है.

सूत्रों के मुताबिक़ हाल ही में हुए घटनाक्रमोसे इस मांग का कोई संबंध नहीं है. फिलहाल ये एक ऐसा समय है जीस वक्त मंत्रालय अधिक बजेट चाहती है लेकिन हाल के घटनाक्रम के साथ इसका किसी भी रूप में कोई लेना-देना नहीं है. मंत्रालय ने 2.74 लाख करोड़ रुपये की बजटीय आवंटन के अलावा 20,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग और की है. सुत्रो ने ये भी जानकारी दी है की ये मांग इसलिए की गई है क्योंकि अधिग्रहण की काम आगे बढ़ाने के कारण वह अपने बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पहले ही खत्म कर चुकी है. जानकारी के मुताबिक़ खरीद की प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है इस वजह से सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय इससे पहले ही अपने बजट के करीब 50 फीसदी तक खर्च कर चुका है.

ऐसे में ही इन सब खर्चो के अलावा और भी विभिन्न खरीद पर आयात शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है. सूत्रों ने ये भी बताया है की हाल ही में बलों को अधिक खरीद शक्तियां देने के कारण धन की जरूरत है. ये भी जानकारी सामने आ रही है की हाल ही में संवेदनशील सुरक्षा खरीद का वित्तीय अधिकार रक्षा मंत्रालय ने तीनों सेनाओं के उप सेनाप्रमुख को सौंप दिया है. इससे पहेले भी उप सेनाप्रमुख को 40,000 करोड़ रुपये तक का खर्च करने का अधिकार दिया गया था. ये खर्चा 46 तरह के गोला बारूद तथा 10 तरह के हथियार प्लेटफार्म उप सेनाप्रमुख खरीदने के लिए दिया था लेकिन ऐसी भी खबरे थी की २०१७ साल के शुरवात में सेना के सामानों के आयात पर से कस्टम ड्यूटी को सरकार ने ना मंजूरी देते हुए उसे हटाया था.

स्वदेशी सामानों और हथियारों का इस्तेमाल बढ़ सके इसलिए कस्टम ड्यूटी का फैसला लिया था और कस्टम ड्यूटी के वजह से सेना को अपनी खरीद पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता था. अभी हालात ऐसे है की भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले दो महीने से तनातनी जारी है इस वजह से सीमा पर दोनों देशों के बीच किसी भी समय युद्ध होने की संभवता है. खबर तो ये भी है की कुछ दिन पहेले सी ए जी रिपोर्ट में बताया गया था की युद्ध शुरू होने की स्थिति में सेना के पास महज 10 दिन का ही पर्याप्त गोला-बारूद है और फिर उन्होंने इस बात का भी खुलासा कर दिया की भारतीय सेना के पास कुल 152 तरह के गोला-बारूद हैं जिनमें से केवल 31 का ही स्टॉक संतोषजनक है.

भारत और पाकिस्तान के इस युद्ध की स्थिति में इस बात पर ध्यान देना बहोत जरुरी है की यदि युद्ध होता है तो फिर सीमा पर भारतीय सेना के पास कम से कम इतना गोला-बारूद तो किसी भी हाल में होना ही चाहिए, जिसके तहत भारतीय सेना 20 दिनों के किसी सघन टकराव की स्थिति से निपट सकें और युद्ध किस स्थिति में सीमा पर बने रहे. जानकारी के मुताबिक़ इससे पहले भारतीय सेना को 40 दिनों का सघन युद्ध लड़ने के लायक गोलाबारूद अपने वॉर वेस्टेज रिजर्व में रखना होता था, जिसे साल 1999 में घटा कर केवल 20 दिन कर दिया गया था. भारत और पाकिस्तान में इस युद्ध हालात में सूत्रों के अनुसार सामने आयी हुई यह रिपोर्ट गोलाबारूद की भारी किल्लत उजागर करती नजर आती है.