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ये छोटासा मुस्लिम देश आया एक्शन में, अमेरिका को दे डाली ये धमकी

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इरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने अपने दुसर कार्यकाल में अब शपथ ली है.शपथ लेने के बाद  उन्होंने  अमेरिका को २०१५ में किये परमाणु समझौते से हटने से चेतावनी दी.शपथ ग्रहण समारोह से पहले यूरोपीय संघ की विदेश निति प्रमुख फ्रेदेरिका मोघेरिणी से मुलाकात की.ईरान की अमेरिका  के समझौते से होनेवाली संभवता के बारे में बताया

.हसन रूहानी ने २०१५ में हुए दुनिया के शक्तिशाली देशों के बींच हुए परमाणु करार के सुरक्षा के लिए व्यापक कोशिशो की संभवता जताई.इरान ने २०१५  के अमेरिका से की ऐतिहासिक समझौते पर कडा जवाब देने की प्रतिबध्दता दर्शाई है. इरान ने विश्वास भी जताया है की इससे देश का बड़ा नुक्सान नहीं होगा.इरान के राष्ट्रपति  हसन रूहानी ने कहा है की २०१५ की  परमाणु सवंर्धन के  ऐतिहासिक समझौते से अलग होने  की संभवता से इरान की अर्थव्यवस्था से कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा. हसन रूहानी ने कहा की अमेरिका  परमाणु करार में किसी भी तरह का फेरबदल करती है तो उसके मुताबिक उसे प्रतिबन्ध लगाया जाएगा.इरान भी अमेरिका से होनेवाले निर्णय का अंदाज लेते हुए अपने अर्थव्यवस्था की  ओर  भी कदम बढ़ाये है.ताकि उसका परिणाम देश की अर्थव्यवस्था पर न पड़े.

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने रूहानी के हवाले से बताया कि ईरान संयुक्त व्यापक कार्रवाई योजना (जेसीपीए) के नाम से प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने के संभावित फैसले के लिए पूरी तरह तैयार है.इरान ने अमेरिका को धमकी दी है की वोह दोबारा परमाणु संवर्धन शुरू न करे .इरान ने कहा है की अगर परमाणु संवर्धन हटायेंगे तो ही युरेनियम का उत्पादन शुरू करेंगे. इरान कहता है की न मानने पर सख्त कदम भी उठाये जायेंगे.हालाखी युरेनियम का उपयोग परमानु बम के लिए इस्तेमाल होता है.अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमानु सवर्धन से हटने के लिए १२ मई तक की सीमा रखी है.

इरान के प्रशासन ने इरान के अमेरिका से अलग होने के सभाव्ता को देखकर अपनी बाजार की मुद्रा सुधर ली है.पिछले सप्ताह में मुद्रा दरों को स्थिर रखने के लिए गैर सरकारी विदेशी मुद्रा बाजारों में मुद्रा खरीदने , बेचने और स्थानान्तरण करने के लिए प्रतिबन्ध लगाया गया था.इरान के परमाणु विभाग के प्रमुख ने कहा की अगर अमेरिका परमाणु समझौते को तोड़ देती है तो उनको जवाब में तेहरान की प्रतिक्रिया के लिए तैयार होना पडेगा.अली अकबर सालेही का कहना है की इरान को ऐसा नहीं होगा इसकी पूरी उम्मीद है और हम दुसरे पक्ष के लिये स्तब्ध है.रूहानी ने शनिवार को दी गयी सरकारी टेलीविज़न पर परमाणु समझौते के बारे में कुछ बाते बताई .हलाखी उनमे होने वाले कुछ ब्योरो के बारे में नहीं बताया गया.उनोने इसमें सिर्फ अमरीका के इस समझौते से अलग होने का जिक्र किया. अमेरिकी प्रतिनिधि द्वारा सबंधित प्रतिबन्ध सम्बंधित  एक विधायक को पारित किये जाने के बाद इरान ने बयां जारी किया.

कई महीनो की  चली हुई इस चर्चा को ख़त्म करते हुए अमेरिका राष्ट्रपति ने ईरान रणनीति के बारे में नया फैसला सुनाया जिसका मसकद क्षेत्र को कथित तौर पर अस्तित करने पर तेहरान क प्रभाव को कम करने को है.हलाखी इसमें परमाणु करार को ख़त्म करने की कोई बात नहीं.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को सबसे बुरा समझौता कहा.उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा की ईरान कभी परमाणु बनाने में सक्षम न हो पायेगा.अमेरिका प्रशासन ने पेहले से ही ईरान पर प्रतिबन्ध लगाये हुए है.त्रुम्फ कहते है की ईरान को परमाणु हथियार बनाने पर कभी भी रोक लगाने के लिए और अधिक काम करूँगा.ईरान के विदेशी मंत्री मोहम्मद जावेरी ने कहा की ईरान को लगाये नए प्रतिबन्ध के कारन ईरान और अमेरिका के सबंध पेहले से ख़राब हुए.

ईरान के प्रशासन का कहना है की इरान को लगाये हुए नए प्रतिबन्ध मतलब २०१५ में हुए परमाणु समझोंते का साफ़ साफ़ उल्लंघन है.जरीफ का बयान प्रतिबन्ध लगाने के एक दिन बाद आया है.प्रेस टीवी रिपोर्ट के मुताबिक कहा जाता है की अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड  ट्रफ के प्रशासन ने कहा है की उसने ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल  को लेकर नए प्रतिबन्ध लगाये जायेंगे.जारिफ इसका प्रतिउत्तर देते हुए कहते है की यह समझौते की भावना का उल्लंघन है.हम इसे देखेंग की ये समजौते के पत्र का उलंघन है और उसके अनुसार ही हम अपनि करवाई शुरू करेंगे.उन्होंने ये भी कहा की नए प्रतिबंधों से अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय माहौल खराब करना चाहती है.उन्होंने कहा की मध्यपूर्व में अमेरिका का समर्थन करनेवालों देशों पर प्रतिबन्ध लगाकर भी ट्रम्प कहते है की परमाणु करार एक बुरा समझौता है.

इरान के परमाणु वार्ताकार ने गुरुवार को कहा की परमाणु मुद्दे से सबंधित बातचीत में बड़े मतभेद बरकरार है और अंतिम समझौते पर पहुचना कठिन है.ईरानी प्रतिनिधियों और पि५ प्लस१ तिन यूरोपियों सदस्यों ने विनयं में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में मुलाकात की और नेव्योर्क में होनेवाली बातचीत के बारे में अपने विचार पेश किये.ईरान के उपविदेशमंत्री अब्बास अराकची ने बैठक के दौरान कहा की इरान को नवंबर के अंत तक अंतिम समझोते की उम्मीद थी.लेकिन अभी भी बहुत मतभेद है इसलिए वार्ता कठिन है.आकाराची ने कहा की हम आशावादी है लेकिन हमारी रह मुश्किल है.पिछले साल नवंबर में हुए समझौत के तहत ईरान पश्चिमी देशों के प्रतिबन्ध में छुट मिलने के बदले अपनी कुछ परमाणु गतिविधियों को रोक लगाने से सहमत हुआ था.अब सभी नतीजों के समयसीमा बढाकर नवंबर तक कर दी गयी है.