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ये है भारत की 9 सबसे गजब ट्रेन, ऐसे दृश्य आपने जिन्दगी में पहले कभी नहीं देखे होंगे

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भारत में आज रेल का जाल बहुत बड़े मात्रा में फैला हुआ है. लेकिन भारत में कई ऐसी रेलवे और रेल ट्रैक है जो आपके सफ़र को रोमांचक बना देंगे.

भारतीय रेल दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रेलगाड़ी है. भारत में पहली रेलवे १८५३ में मुंबई और ठाणे के बिच पहली रेलगाडी चली थी. भारतीय रेल देश के दुर्गम इलाको तक पहुँच चुकी है. भारतीय रेल आज करोडो लोगो का भार लेकर चलती है. दिन में ३० लाख लोगो की सेवा कर भारतीय रेल दुनिया की सबसे बड़ी परिवहन प्रणाली बन चुकी है. भारतीय रेल ७०,२४१ डिब्बो के साथ हर दिन ३० लाख लोगो की सेवा करती है. भारतीय रेल की पटरिया देश में १ लाख १५ हजार किलो मीटर का जाल बनाये हुए है. कुछ लोगो के लिए रेल का सफ़र उनकी दिनचर्या का एक हिस्सा है. लेकिन बहुत से लोग पर्यटन के लिए और सफ़र का आनंद लेने के लिए रेल सफ़र का पर्याय अपनाते है. भारत के कई रेल मार्ग और सफ़र इतने रोमांचक है की उनका सफ़र यादगार बन जाता है.

आज हम जानकारी दे रहे है ऐसी ही रेलगाड़ी और रेल मार्ग के बारे में. ९वे स्थान पर है चेन्नई रामेश्वरम रेल मार्ग. चेन्नई को रामेश्वरम को जोड़ने वाला यह रेलमार्ग १९१४ में बनाया गया था. यह पुल कंक्रीट से बने १४५ खाबो से बना हुआ है. १९१४ में जब इसका काम पूरा हुआ, तो यह अपने आप में ही एक आविष्कार था. इस पुल के बनने से पहले यहाँ परिवहन के लिए सिर्फ नांव का ही विकल्प था. यह एक बहुत ही मशहूर बंदरगा रहा है. लेकिन यहाँ परिवहन का कोई और संधान नहीं था, इसलिए अंग्रेजो को यहाँ पुल बनने की जरुरत महसूस हुई. इस रेल का सफ़र यात्रियों को रोमांचित कर दिया है. इस रेलमार्ग की मशागत के लिए हमेशा लोग तैनात रहते है. समुद्र की लहरे रेल यात्रियों को आकर्षित करती है.

मुम्बई से गोवा जाने वाला रेल मार्ग इस सूचि के ८वे स्थान पर आता है. यह सफ़र मांडवी एक्सप्रेस द्वारा किया जा सकता है. इस यात्रा में आप घने जंगलो की खूबसूरती के साथ ही खतरनाक रेलमार्ग का भी आनंद उठा सकते है. इस रेल सफ़र की विशेषता यह है की इस सफ़र में आप एक तरफ सह्याद्री के पहाड़ और एक तरफ समुद्र का दिलकश नज़ारा देख सकते है. यह रेलगाड़ी ९२ सुरंगो और २००० पुल से हो कर गुज़रती है. इस सफ़र में मान को मोह लेने वाले ऐसे ही दृश्यों के लिए यह रेलमार्ग मशहूर है. यह खुबसूरत सफ़र कराने वाली रेल यात्रा दो विशेष पर्यटन स्थलों को जोडती है. जिस कारन आपन ही सिर्फ सफ़र करेंगे बल्कि इन स्थानों का आनंद भी आप उठा सकते है.

७वे स्थान पर है कोकण रेलवे. इसे संक्षिप्त रूप में के आर भी कहा जाता है. कोकण रेलवे भारतीय रेल का एक एहेम हिस्सा है. कोकण रेलवे की स्थापना २६ जनुअरी १९९८ में हुई थी. कोकण रेलवे मुंबई को मंगलुरु से जोडने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है. यह रेलगाड़ी ३ राज्यों को जोडती है, जिनका नाम है महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक. कोकण रेलवे का मुख्यालय मुंबई में स्थित है. कोकण रेलवे के सफ़र में दिखने वाली बहती नदिया, घाटियाँ और ऊँचे पहाड़ किसीका भी मान मोह ले सकते है. यदि कोई एक बार इस ट्रेन का सफ़र करे, तो बार बार इस सफ़र पर जाने का मन जरुर करता है.३ राज्यों से गुजरने की वजह से इस रेल सफ़र में अलग अलग वातावरण और प्रकृति की खूबसूरती का आनंद उठा सकते है.

कालका शिमला टॉय ट्रेन है अगली रेलगाड़ी. यह इस सूचि में छटे स्थान पर है. कालका भारत का एक मशहूर पहाड़ी इलाका है. इस टॉय ट्रेन का मार्ग ९६ किलो मीटर लम्बा है. यह रेल १०२ सुरंगों और ८२ पुलों से गुजरती है. इस रेल का निर्माण १९०३ में शुरू हुआ था. इस रेल को गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा सम्मानित किया गया है ९६ किलो मीटर की ऊँचाई पर चलने वाली सबसे तेज रेलगाड़ी के रूप में. इस ट्रेन का सफ़र आपके अन्दर के बच्चे को जगा देता है. यहाँ की वादिय मन को प्रसन्न कर देने वाली है. इस रेल का यह सफ़र केवल ५ ही घंटों का है किन्तु यह ५ घंटे आपके जीवन हमेशा के लिए यादगार बन जायेंगे. यूनेस्को को द्वारा इन वादियों को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया है.

५वे स्थान पर है महाराजा एक्सप्रेस. इस ट्रेन को भारत की सबसे राजसी रेल का सम्मान प्राप्त हुआ है. यह रेलगाड़ी जयपुर से होते हुए दिल्ली से आगरा का सफ़र कराती है. यह रेलगाड़ी २०१० से चल रही है. इसे दुनिया की २५ लक्ज़री ट्रेन में भी शामिल किया गया है. इस रेलगाड़ी का साधारण टिकेट है ४० हजार रूपए प्रति व्यक्ति और विशेष टिकेट १ लाख २५ हजार प्रति व्यक्ति है. यह रेलगाड़ी दिल्ली से निकलकर आगरा जाती है. सफ़र के दौरान यह जयपुर के महलो के दर्शन कराती है और साथ ही राजस्थान के वैभव का भी आप अनुभव ले सकते है. २३ डिब्बो वाली इस ट्रेन में २ अत्याधुनिक भोजनालय है. यह रेलगाड़ी राजा महाराजाओ के ठाट की याद दिलाती है. इसमें रहने के लिए ४३ कक्ष मौजूद है.

जल्पैगुरी से दार्जिलिंग का रेल मार्ग इस सूचि में चौथे स्थान पर है. यह एक टॉय ट्रेन है जिसका सफ़र है जल्पैगुरी से दार्जिलिंग. दार्जिलिंग में स्थित एक बहुत ही सुन्दर इलाका है जल्पैगुरी. यहाँ के चाय बगान पुरे भारत में मशहूर है. इस सफ़र में आप कांचनगंगा का भी दर्शन कर सकते है. यह रेलगाड़ी हिमालय की पहाडियों से गुज़रती है जिसके कारन यह सफ़र बहुत ही रोमांचक बन जाता है और आपन का दिल जित लेता है. यह रेलगाड़ी चाय के बागानों से गुज़रती है. यह बागानों के इतने पास से गुज़रती है की आप चाय की सुगंध का भी आनंद उठा सकते है. इन वादियों के वातावरण और हिमालय की खूबसूरती से आप साड़ी थकानो को पूरी तरह भूल जायेंगे. इस रेल सफ़र पर एक बार जरुर जाना चाहिए.

तीसरे स्थान पर है चिल्का रेलवे रूट. यह रेल है भुबनेश्वर से बेरहामपुर के बिच. भुबनेश्वर से बेरहामपुर में चलने वाली यह रेलगाड़ी भारत के प्राकृतिक सौन्दर्य के दर्शान कराती है. इस सफ़र में आप उड़ीसा के पूर्वी घाट और चिल्का झील से गुज़रते है. इस सफ़र का सबसे अहम् आकर्षण है चिल्का पक्षी उद्यान जिससे यह रेल गुजरती है. यह पक्षी उद्यान विदेशी पक्षियों के लिए जाना जाता है. यहाँ आपको चारो ओर अलग अलग पक्षी देखने को मिल सकेंगे. और इसी कारन यह रेल विदेशी पर्यटकों का आकर्षण बनी हुई है. इस सफ़र में आप प्रकृति की खूबसूरती का पूरा आनंदे ले सकते है. इस सफ़र में आप खुद को बहुत ही शांत और शिथिल महसूस करेंगे. अलग अलग पक्षियों के दर्शन से आपका मन खुश हो जायेगा.

मंगला लक्षदीप मलयालम एक्सप्रेस इस सूचि में दुसरे स्थान पर है. यह रेलगाड़ी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से निकलकर केरला के कोचीन में एर्नाकुलम जंक्शन का सफ़र कराती है. यह भारतीय रेल की एक बहुत ही शानदार रेलवे है. यह रोजाना कोकण रेलवे मार्ग से गुजरने वाली रेलगाड़ी है. यह भारत की दूसरी सबसे फ़ास्ट रोजाना चलने वाली रेल है. यह देश के ८ राज्यों से गुजरते हुए ३०२७ किलो मीटर का सफ़र करती है. यह सफ़र कुल ५० घंटों का है. लेकिन इस सफ़र में मिलने वाले रोमांचक अनुभव जिंदगीभर के लिए यादगार बन जाते है. सफ़र दौरान आप भारत के ८ राज्यों के नज़ारे का आनंद ले सकते है साथी ही अलग अलग प्प्राकृतिक नज़ारे आपका मन मोह लेंगे. यह ५० घंटो का सफर आपकी थकावट नहीं देगा.

और इन सबसे ऊपर है क्रमांक पर आनेवाली दुध्नोई मेंदिपथर रेलवे. असम के गोलपारा रेलवे स्टेशन से गारो हिल्स जिले के मेंदिपथर तक एक बहुत ही रोमांचक रेल मार्ग बना है. इस रेल मार्ग का उदघाटन ३० नवम्बर २०१४ को हुआ. दुध्नोई मेंदिपथर रेलवे उत्तरी पूर्व के २ राज्यों को जोडती है. यह रेलमार्ग २० किलो मीटर लम्बा है. इस मर का १० किलोमीटर हिस्सा असम में और १० किलो मीटर मेघालय में है. इस मार्ग पर ५३ छोटे पुल, ७ बड़े पुल और ७ सुरंगे बनायीं गयी है. इस सफ़र में प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत दर्शन आपको हो जायेगा. यह रेल विदेशी पर्यटकों के बिच बहुत ही तेजी से लोकप्रिय हो रही है. और इसकी वजह ये है की यह २ बहुत की खुबसूरत राज्य याने मेघालय और आसाम की दिलकश वादियों से गुजरती है.