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रूस और चीन से मुकाबले को अमेरिका कर रहा है, ये बड़ा काम

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पिछले कुछ दिनों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की राजनीती तेजी से बदलाव किये जा रही है. सीरिया पर किये गए हमलो के बाद अमेरिका और रूस के बिच बना तनाव, चीन और अमेरिका के बिच शुरू हुआ व्यापारिक युध्द इसमें सबसे प्रमुख घटनाए है. इन घटनाओं के बिच अमेरिका काफी कृतीशील नजर आ रहा है.

सीरिया सरकार, रूस और ईरान पर रासायनिक हमलो का आरोप अमेरिका द्वारा लगाया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके जवाब में सीरिया पर हवाई हमले भी किये है, जिससे रूस क्रोधित हो गया है. रूस का कहना है की यह किसी साबुत के बिना किया गया हमला है. अमेरिका द्वारा किये गए इस हमले पर रूस ने चेतावनी जारी कर दी है. रूस ने कहा है की अमेरिका को इसके नतीजों के लिए तैयार रहना होगा. इसके नतीजे दर्दनाक और भयावह रहेंगे. साथ ही रूस ने मध्य पूर्व में अपना सैन्य भी तैनात कर दिया है. रूस ने अपने युध्दपोत और लड़ाकू टैंक सीरिया के तरफ तैनात कर दिए है. जिससे यह साफ़ हो रहा है की अमेरिका के खिलाफ लड़ने के लिए रूस खुद को सक्षम बना रहा है.

साथ ही चीन और अमेरिका के संबंधो में भी कड़वाहट आ गयी है. अमेरिका ने चीन पर बौधिक साम्प्रदा की चोरी का आरोप लगाया था. जिसके बाद अमेरिका ने चीन से आयात किये जाने वाली चीजो पर अतिरिक्त शुल्क लागू कर दिया है. चीन ने इस कार्रवाही के जवाब के रूप में अमेरिका से चीन में आयात होने वाली चीजो पर भी शुल्क बढ़ा दिया है. इससे चीन और अमेरिका के बिच व्यापारिक युध्द की स्थिति बन गयी गई है. जानकारों का कहना है की यह एक प्रकार से शीत युध्द के हालात है. साथ ही चीन और अमेरिका के बिच दक्षिण चीन सागर में भी विवाद जारी है. पिछले महीने अमेरिका ने अपने तिन युध्दपोत चीन के सागरी क्षेत्र के काफी करीब गश्ती करवाए थे. चीनी नौसेना ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया था.
रूस और चीन से बढ़ते खतरे के मद्देनजर अब अमेरिका ने भी हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की कवायद शुरू कर दी है. वर्त्तमान समय में अमेरिका के रूस के साथ संबंध बेहद बुरी स्थिति में है. साथ ही चीन से भी लगातार दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिक को धमकी दी जाती रही है. इसके मद्देनजर अमेरिकी वायुसेना इसके विकास पर करीब एक बिलियन डॉलर खर्च कर रही है. इसके लिए लॉकहिड मार्टिन को करीब ९२८ मिलियन डॉलर का अनुबंध पत्र भी दिया गया है. यह मिसाइल आवाज की गति से भी तेज चलने में सक्षम होती है. हाईपरसोनिक कंवेंशनल स्‍ट्राइक वैपन प्रोग्राम की दिशा में यह बड़ा कदम है. अमेरिका इसके अलावा टेक्टिकल बूस्‍ट ग्‍लाइड प्राग्राम भी तैयार कर रहा है. यह डापरा की मदद से तैयार किया जा रहा है.
यह दोनों ही एक एडवांस प्रोटोटाइप विकसित करने में लगे हैं जिन्‍हें अमेरिकी जेट के जरिए छोड़ा जा सकेगा. भविष्य में हाइपरसोनिक मिसाइल जंग का रुख बदलने में काफी अहम भूमिका निभाएंगी. अमेरिका के डिफेंस विभाग के अधिकारी ने इस बात को सार्वजनिक तौर पर कह दिया है. उन्होंने कहा हैं कि हाइपरसोनिक हथियार अमेरिका के मिसाइल सिस्‍टम को नाकाम करते हुए हमला करने में सक्षम हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि हाइपरसोनिक मिसाइल के जरिये अमेरिका अपने ऊपर होने वाले किसी भी परमाणु हमले को नाकाम करने की योजना पर काम कर रहा है. आवाज की गति से भी तेज या फिर ५ मैक से तेज उड़ने वाली मिसाइल को हाइपरसोनिक मिसाइल की श्रेणी में शामिल किया जाता है. यह मिसाइल किसी भी मिसाइल सि‍स्‍टम को ध्‍वस्‍त कर सकती है.
पेंटागन रिसर्च एंड डेवलेपमेंट के प्रमुख माइकल ग्रिफिन का मानना हैं कि इस तरह की मिसाइल बनाने की काबलियत चीन और रूस दोनों के ही पास है, इस लिहाज से अमेरिका को खतरा बढ़ गया है. उन्‍होंने हाइपरसोनिक मिसाइल के विकास को पहली प्रा‍थमिकता बताया है. उनका कहना है कि इस तरह के खतरे को भांपते हुए यह भी जरूरी है कि हमारे पास ऐसी तकनीक और मिसाइलें हों जिन्‍हें हम बेहद कम समय में लड़ाकू विमानों से दाग कर हमला नाकाम कर सकें. अमेरिका ने इस वर्ष फरवरी में एक हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था, लेकिन वह असफल रहा था. प्रक्षेपण के करीब चार सैकेंड बाद ही इसके सिस्‍टम में गड़बड़ी के चलते इसको नष्‍ट कर दिया गया था. यह मिसाइल ३५०० मील प्रति घंटे की गति से जा सकती थी.
यह मिसाईल आधा घंटे में ही दुनिया के किसी भी हिस्से में अपने लक्ष्य पर निशाना लगा सकती थी. इसकी जानकारी देते हुए पेंटागन ने माना था कि इसमें तकनीकी खराबी के बाद इसका नियंत्रण कंट्रोल से बाहर जा सकता था, लिहाजा इसको नष्‍ट कर दिया गया ठ. यह मिसाइल दो फरवरी को अलास्का के कोडिएक लॉन्च सेंटर से प्रक्षेपित की गई थी. एडवांस्ड हाइपरसोनिक हथियार का निर्माण सांडिया नेशनल लेबोरेट्री और सेना ने तीन चरणों में किया था. इस परीक्षण के असफल होने से अमेरिकी कार्यक्रम को तगड़ा झटका लग गाय था. इस मिसाइल के विकास को लेकर अमेरिका में मची खलबली कि वजह यह भी है कि रूस ने पिछले महिने ही अपनी नई हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. ‘जिरकोन’ नाम की इस हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल की रफ्तार लगभग ७४०० किमी. प्रति घंटा बताई गई थी.
इस मिसाइल की एक सबसे बड़ी खासियत यह थी कि एक बार लॉन्‍च करने के बाद इसको रोकपाना नामुमकिन होता है. रूस की इस मिसाइल ने अमेरिका के होश उड़ा दिए हैं. यह परीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिका और रूस के बीच सीरिया समेत कई मुद्दों पर तनातनी काफी बढ़ गई है. रूसी जानकारों का मानना हैं कि यह तीसरे विश्‍व युद्ध का कारण भी बन सकता है. जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच शीतयुद्ध का यह दूसरा दौर है जो बेहद घातक साबित हो सकता है. रूस की इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग ४०० किमी. तक है. इसे साल २०२२ तक रूस की सेना में शामिल कर लिया जाएगा. इस मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग किया गया है, जो कि हवा में से ऑक्सीजन का प्रयोग करता है.