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रूस ने NSG को लेकर चाइना के खिलाफ कह दी ये बड़ी बात PM मोदी भी हैरान

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परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) 48 देशों का समूह है जो,परमाणु सम्बन्धी चीजों के व्यापार को संचलित करता है। इसकी स्थापना मई1974 में हुई थी। NSG यह सुनिश्चित करता है कि सभी देश परमाणु हथियार का उपयोग शांतिपूर्ण काम के लिए करे जैसे कि बिजली बनाना ।

जैसा कि हम जानते हैं कि 1945 में अमेरिका ने हिरोशिमा नागासाकी पर परमाणु हमला किया था , उसके परिणाम से तो हम सब वाकिफ हैं और ऐसे से भयानक हादसों को रोकने के लिए NPT को लागू किया गया था।इसका उद्देश्य था कि परमाणु क्षमता या तकनीक फेलनी नही चाहिये मतलब इसका उपयोग सिर्फ शांतिपूर्वक काम के लिए ही होना चाहिए। NPT ने सिर्फ 5 देशों ( अमेरिका, रूस , ब्रिटेन, फ्रांस और चीन )परमाणु हथियार रख सकते हैं बल्कि कोई अन्य देश परमाणु हथियार नहीं रख सकता । भारत का ये मानना था कि ये हक सभी देशों को मिलना चाहिए और भारत ने ये संधि पर हकताक्षर नही किया था।भारत वर्ष 2004 से ही NSG सदस्यता हासिल करने में लगा हुआ है।वर्ष 2011 के बाद जितनी भी NSG की मीटिंग हुई हैं उसमें भारत की सदयता को लेकर चर्चा होती आयी है।पिछले वर्ष फिर एक बार भारत ने आवेदन किआ और इसके बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कई देशों से खुद बात भी की थी।उनकी बातचीत के बाद अमेरिका, मेक्सिको, स्विट्जरलैंड, जापान, ब्रिटेन भारत को समर्थन देने के लिए तैयार भी हो गए थे। रूस और अमेरिका ने तो भारत को  NSG सदयस्ता के लिए हस्ताक्षर देने का भी वादा किया था.

सीओल में हुई मीटिंग में 48 देशो में से 47 देशों ने भारत को समर्थन दिया ,परन्तु चीन ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया गोरतलब है कि चीन भारत के प्रवेश पर लगातार विरोध कर रहा है उसका कहना है कि जिन देश ने NPT पर हकताक्षर नहीं किया है वो NSG में शामिल नहीं हो सकते और अगर भारत को सदयता मिलती है तो फिर पाकिस्तान को भी मिलनी चाहिए।

NSG के नियमों के अनुसार अगर सदस्य देशों में से एक भी देश किसी की सदस्यता का विरोध करता है तो उसे सदस्यता नहीं दी जा सकती।चीन एक मात्र ऐसा देश है जो नही चाहता कि भारत को सदस्यता मिले।भारत के पुराने दोस्त रूस ने कहा कि NSG की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को पाकिस्तान से तोला नही जा सकता , रूस की ओर से ये भी कहा गया है कि वो चीन से इस बारे में अलग अलग स्तर पर बात भी करेंगे ।उन्होंने आगे ये भी कहा कि जब तक सारे देश इस बारे में प्रयास नहीं करते तब तक चीन मानेगा नहीं। अगर भारत का रिकॉर्ड देखा भी जाये तो भारत ने परमाणु शक्ति का दुरुपयोग नही किया है जोकि हमारे लिए एक अच्छा पहलू है।देखा जाए तो प्रधानमंत्री की बातचीत अमेरिका, स्विट्ज़रलैंड ब्रिटेन मान गए हैं और उनके समर्थन के बाद भारत NSG सदस्यता हासिल करने के और करीब पहुच गया है।चीन का तो काम है भारत के काम में दीवार बनकर खड़ा होना ।