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लालू यादव को कोर्ट ने दिया ये सबसे बड़ा झटका, इतने सालों की हुई जेल

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जैसे ही कांग्रेस के हातो से सत्ता छूती और भा ज पा सरकार में आयी, कांग्रेस के काले करतूत दुनिया के सामने आ शुरू हुआ है. कांग्रेस के कई बड़े नेताओ के अनगिनत कारनामो से रोज के अखबारों की सुर्खिया होती है. देश में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जंग छेड़ दी है. अब भ्रष्ट नेता एवं उद्योगपतियों का बच पाना मुश्किल हो रहा है. सैंकड़ो करोड़ के घोटालो से देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने के बाद इन भ्रष्टाचारियों का अंत नजदीक आ रहा है. कांग्रेस के नेता लालू प्रसाद यादव हमेशा ही चर्चा में रहे है. उनके कई घोटाले अब सामने आ रहे है.

चारा घोटाला भारत के बिहार प्रान्त का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार घोटाला है, जिसमें पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर ९५० करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये. सरकारी खजाने की इस चोरी में अन्य कई लोगों के अलावा बिहार के तत्कालीन मुख्यमन्त्री लालू प्रसाद यादव व पूर्व मुख्यमन्त्री जगन्नाथ मिश्रा पर भी आरोप लगा है. लोकसभा में तत्कालीन प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया और सीबीआई जाँच की माँग की गयी. यह मामला १९९५ में सामने आया और अब लगभग २ दशको से इस मामले की जांच हो रही है. इस मामले में लालू प्रसाद यादव पर कुल ६ मामले दर्ज किये गए है. जिनमे से ४ मामलो में सी बी आई ने उन्हें दोषी ठहराया है.

लालू प्रसाद यादव के साथ ही अन्य १९ लोगों को सी बी आई ने दोषी करार दिया है. बिहार पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र समेत १२ लोगों को सी बी आई की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है. सी बी आई ने सोमवार १९ मार्च को चौथे मामले पर सुनवाई की और इसमें लालू यादव समेत १९ लोगो को आरोपी बताया गया था. दुमका कोषागार मामले पर यह केस दर्ज था. इस मामले पर सजा की सुनवाई २३ मार्च के दौरान होना तय हुआ था. यह घोटाला करीब ३ करोड़ १३ लाख रूपए का था.आज लालू प्रसाद यादव की इस केस की सुनवाई पुरी हो चुकी है. सी बी आई की अदालत ने लालू प्रसाद यादव को ७ साल की जेल की कड़ी सजा सुनवाई है. यह उनकी आज तक की सबसे बड़ी सजा है.

सी बी आई की अदालत ने उन्हें कुल १४ साल की सजा सुनाई है और ६० साल का जुरमाना भी उन पर लगा दिया है. लालू यादव समेत दोषी ठहराए गए सभी १९ लोगों की सजा पर तीन दिनों तक सुनवाई चल रही थी. २१ से २३ मार्च तक सुनवाई पूरी होने के बाद शनिवार २४ मार्च को सजा का ऐलान किया गया. लालू के वकील ने कोर्ट से गुज़ारिश कि थी की उनकी सजा को कम किया जाए. वकील ने कोर्ट से कहा था कि लालू यादव की उम्र ७० साल हो चुकी है और वह कई बीमारियों से त्रस्त हैं. लेकिन कोर्ट ने लालू के वकील के गुज़ारिश को ना सुनते हुए सजा का ऐलान किया है. कोर्ट कहा है की अगर लालू जुर्माना नहीं देते हैं तो उन्हें एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी.

या सुनवायी उन पर दर्ज ६ में से २ घोटालो पर की गयी है. यह दोनों मामले साथ-साथ चलेंगे या अलग-अलग इसे अभी कोर्ट ने तय नहीं किया है. अगर सजाएं अलग-अलग चलीं तो लालू को 14 साल जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी. और कुल ६० लाख रूपए का जुर्माना भरना होगा. लालू यादव पहले ही चारा घोटाला के तीन अन्य मामलों में दोषी ठहराये जाने के बाद से रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं. इससे पहले लालू यादव को पहले और दूसरे केस में ५-५ साल की सजा हुई थी, जबकि तीसरे, देवघर केस में उन्हें ३.५ साल की सजा सुनाई थी. इस घोटाले की २ केस पर सुनवाई अभी बाकि है. यह सुनवाई आनेवाले दिनों में पूरी होगी और देखने वाली बात ये है की लालू प्रसाद यादव इन मामलो में दोषी पाए जाते है या नहीं.