Home देश शुरू हुआ विश्वयुद्ध,अमेरिका ने इस मुस्लिम देश पर किया पहला हमला

शुरू हुआ विश्वयुद्ध,अमेरिका ने इस मुस्लिम देश पर किया पहला हमला

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सीरिया में अशांति ने अपना राज्य बना लिया है. यहाँ पर हालात इतने गंभीर हो चले है की यहा हमलों का सिलसिला अब रुकने का नाम ही नहीं ले रहा. सीरिया में पिछले हफ्ते रासायनिक हमले किये गए. इन हमलो में सैंकड़ो लोगों की जाने गयी. यहाँ हुए इन हमलों को लेकर अमेरिका और रूस के बिच बवाल खड़ा हो गया. पहले तो इन हमलों का आरोप अमेरिका पर लगाया जा रहा था लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह साफ़ कह दिया की अमेरिका का इन हमलो से कोई तलूक नही है और वह इन हमलों की कड़ी निंदा करता है.

साथ ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा की सीरिया में हो रहे इन हमलों के लिए सीरियायी सरकार ही जिम्मेदार है और राष्ट्रपति बशर अल असद को रूस और इरान का समर्थन मिल रहा है. उन्होंने यह चेतावनी भी दी थी की इन हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. जिसके बाद रूस ने भी अपना बयान जारी कर दिया था, रूस ने कहा की यह हमला हमने नहीं करवाया है और यह परिस्थितियाँ अमेरिका और रूस के बिच युध्ध स्थिति निर्माण कर सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह धमकी दि थी की वह फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिल कर रूस के मित्र देश याने सीरिया पर मिसाइल दाग देगा. इसी चेतावनी का अमल करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी तरफ से सीरिया पर हमले की अनुमति दे दि है.

सीरिया में पिछले हफ्ते ७ अप्रैल को बेगुनाह लोगों पर किए गए रासायनिक हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरिया पर शुक्रवार रात मिसाइलों से हमला किया है. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, दमिश्क और होम्स में १०० से भी ज्यादा मिसाइलें दागी गईं थी. सीरियाई सेना का दावा है कि उसने इनमें से कई को मार गिराया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया पर सैन्य हमले के आदेश दे दिए हैं. इस कार्रवाई में फ्रांस और ब्रिटेन ने उसका साथ दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई कार्रवाई का जवाब है. तो वहीं, रूस ने इसे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपमान बताया है. उसका कहना है कि वह इसे बर्दाश्त नहीं करेगा.

उन तीनों जगहों को मिसाइलों से निशाना बनाया गया है. जहाँ रासायनिक हमले हुए थे. देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा “फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू कर दिया गया है.” साथ ही ट्रम्प ने सीरिया की असद सरकार के समर्थक देशों रूस और ईरान से अपनी नीतियों में बदलाव करने को भी कहा है. देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा “फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू कर दिया गया है.” साथ ही ट्रम्प ने सीरिया की असद सरकार के समर्थक देशों रूस और ईरान से अपनी नीतियों में बदलाव करने को भी कहा है. सीरिया में अमेरिकी हमले से रूस बहुत भड़क गया है. पुतिन ने कहा है हम अब अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक रुसी राजदूत ने चेतावनी भरे लिहाज में कहा की अमेरिकी इन हमलों के बाद अब नतीजों के लिए तैयार रहे. अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी जेम्स मैटिस ने बताया कि अब तक हमें नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. सीरिया पर इन हमलों के बाद पेंटागन ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि सीरिया में तीन जगहों को निशाना बनाया गया. दमिश्क का साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, ऐसा आरोप है कि यहां केमिकल और बायोलॉजिकल हथियार बनाए जाते हैं. होम्स, यहां रासायनिक हथियार को रखा जाता है. और होम्स के पास का एक ठिकाना, जहां रासायनिक हथियार उपकरण को स्टोर किया जाता है और यह एक अहम कमांड पोस्ट है. सीरिया के सरकारी टेलीविजन पर भी अमेरिका के फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर सीरिया पर हमला करने की खबरें दिखाई जा रही हैं.

ब्रिटेन की प्रधान मंत्री टेरिजा मे ने इस हमले में ब्रिटेन के शामिल होने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा है की “बल प्रयोग के अलावा कोई और व्यवहारिक विकल्प नहीं था.” उन्होंने ये भी कहा है की इस मिसाइल हमले का मकसद “सत्ता परिवर्तन” नहीं था. ट्रम्प ने कहा है की यह हमले सीरियाई सरकार के रासायनिक हथियार बनाने के ठिकानो पर किया गए है. उन्होंने बताया की इन हमलो का मुख्य उद्देश्य रासायनिक हथियारों का इस्येमाल, प्रसार और उत्पादन पर अंकुश लगाने की कोशिश थी. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा की या किसी इंसान नहीं बल्कि एक शैतान के अपराध है. किन्तु सीरिया के सरकार ने ऐसे किसी भी हमले इनकार कर दिया है. उन्होंने पहले इन हमलों को अफवा भी बताया था.

ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तुर्की, जॉर्डन, सऊदी अरब, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड्स, इजरायल, स्पेन सभी अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं. ये सभी देश सीरियाइ राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ हैं. सीरिया में साल २०१३ में पहली बार रासायनिक हमला किया गया था. सीरियाई सेना ने पूर्वी घोउटा में राकेट से सरीन नर्व एजेंट छोड़ा था. इसमें १०० से ज्यादा लोग मारे गए थे. सीरियाई सेना ने अप्रैल २०१७ में खान शेखाउन में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया था. इसमें ८० लोग मारे गए थे. इस साल की शुरुआत में भी सीरिया सेना ने विद्रोहियों के खिलाफ गैस का इस्तेमाल किया था. फिर ७ अप्रैल को रासायनिक हमला किया गया.नाटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टाेलेनबर्ग ने कहा “मैं यूएस, यूके और फ्रांस की कार्रवाई का समर्थन करता हूं.

इससे सरकार की आनेवाले समय में सीरिया के लोगों पर रासायनिक हमले करने की क्षमता कम हो जाएगी. नाटो ने कहा की वह रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लए खतरा मानता है. यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सामूहिक और प्रभावी प्रतिक्रिया की मांग करता है.” गेर्मानि की चांसलर और क्रिस्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन की नेता अंजेला मर्केल ने पहले ही ऐलान कर दिया था की जर्मनी सीरिया के खिलाफ अमेरिकी सैन्य के हमलो में शामिल नहीं होगा. मर्केल ने मिडिया से कहा है की अगर सैन्य करवाई हुई तो जर्मनी भाग नहीं लेगा और मैं दृढ़तापूर्वक यह साफ़ करना चाहती की सैन्य हस्तक्षेप पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. अंजेला मर्केल ने ये भी कहा है की रासायनिक हथियार का प्रयोग हमेशा ही अस्वीकार्य होगा.