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सीरिया आया एक्शन में, रातोरात अमेरिका के खिलाफ कर दिया ये बड़ा कांड

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७ अप्रैल को सीरिया में हुए रासायनिक हमले से दुनिया अभी भी प्रभावित है. दुनियाभर के नेताओ में इस हमले के बाद तनातनी जारी है. इसमें प्रमुख रूप से रूस और अमेरिका का नाम सामने आ रहा है. सीरिया में हुए इन हमलों के जवाब में अमेरिका ने फ्रांस और ब्रिटेन के सहयोग से सीरिया के रासायनिक हथियार बनाने और रखने के ठिकानो को लक्ष्य बनाते हुए शुक्रवार को हवाई हमले किये थे. हालाँकि सीरियाइ सेना का कहना है की उन्होंने इनमे से अधिकतर मिसाइलों को पहले ही मार गिराया था. सीरिया ने अब इस हमले की प्रतिक्रिया में हमला कर दिया है.

सीरिया के वायु सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि उन्होंने मंगलवार को शायरत सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल से हमला किया है. वायु सुरक्षा बालो ने यह भी कहा है कि शायरत के साथ ही नजदीकी दुमायर सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है. स्पूतनिक न्यूज एजेंसी के हवाले से ये खबर सामने आई है. सीरिया के सरकारी टीवी चैनल ने दावा किया है कि सीरिया ने होम्स शहर में मौजूद मिलिट्री बेस को निशाना बनाते हुए भेजे गए ९ इजराइली मिसाइल को सफलता से मार गिराया है. सीरिया पर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से हवाई हमले हो रहे हैं और इन्हीं हमलों के तहत दागी गई इजराइली मिसाइलों को सीरिया ने मार गिराया है. स्पुतनिक न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्ट के मुताबिक शायरत सैन्य ठिकानों पर ९ मिसाइल से हमले किये गए हैं.

हालांकि इन मिसाइलों के स्रोतों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है. ३ मिसाइल उत्तर पूर्वी दमिश्क में दुमायर हवाइ अड्डे को निशाना बनाते हुए दागी गयी थी जिसमें सीरियाई सुरक्षा बलों ने भी हस्तक्षेप किया था. इन हमलों को लेकर अभी तक किसी तरह की कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है. सीरिया की मीडिया के दावों के मुताबिक ये मिसाइल एयर बेस पर को निशाना बनाकर दागे गए थे लेकिन उन्हें मार गिराया गया. सीरिया की मीडिया ने सबूत के तौर पर मिसाइल मार गिराने की तस्वीरें भी जारी की हैं. रूस के दावों के मुताबिक सीरिया पर अटैक करने आए करीब ७० मिसाइल अब तक मार गिराए गए हैं. इससे पहले शनिवार १४ अप्रैल की सुबह को को ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया में सैनिकों और नागरिकों को निशाना बनाते हुए १०० क्रूज़ और हवाई मिसाइलों से हमला किया था.

७ अप्रैल को सीरिया पर रासायनिक हमला किया गया था जिसमें ५० से अधिक लोगों की मौत हो गई थी जिसके जवाबी कार्रवाई में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर इस सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था. अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, दमिश्क और होम्स में १०० से भी ज्यादा मिसाइलें दागी गईं थी. सीरियाई सेना का दावा है कि उसने इनमें से कई को मार गिराया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया पर सैन्य हमले के आदेश दे दिए हैं. इस कार्रवाई में फ्रांस और ब्रिटेन ने उसका साथ दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यह शैतान की इंसानियत के खिलाफ की गई कार्रवाई का जवाब है. तो वहीं, रूस ने इसे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपमान बताया है.

उसका कहना है कि वह इसे बर्दाश्त नहीं करेगा.उन तीनों जगहों को मिसाइलों से निशाना बनाया गया है. जहाँ रासायनिक हमले हुए थे.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सीरिया की असद सरकार के समर्थक देशों रूस और ईरान से अपनी नीतियों में बदलाव करने को भी कहा है. देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा “फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू कर दिया गया है.” साथ ही ट्रम्प ने सीरिया की असद सरकार के समर्थक देशों रूस और ईरान से अपनी नीतियों में बदलाव करने को भी कहा है. सीरिया में अमेरिकी हमले से रूस बहुत भड़क गया है. पुतिन ने कहा है हम अब अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे. सीरिया पर इन हमलों के बाद पेंटागन ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि सीरिया में तीन जगहों को निशाना बनाया गया.

दमिश्क का साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, ऐसा आरोप है कि यहां केमिकल और बायोलॉजिकल हथियार बनाए जाते हैं. होम्स, यहां रासायनिक हथियार को रखा जाता है. और होम्स के पास का एक ठिकाना, जहां रासायनिक हथियार उपकरण को स्टोर किया जाता है और यह एक अहम कमांड पोस्ट है. सीरिया के सरकारी टेलीविजन पर भी अमेरिका के फ्रांस और ब्रिटेन के साथ मिलकर सीरिया पर हमला करने की खबरें दिखाई जा रही थी. ब्रिटेन की प्रधान मंत्री टेरिजा मे ने इस हमले में ब्रिटेन के शामिल होने की पुष्टि की है. उन्होंने कहा है की “बल प्रयोग के अलावा कोई और व्यवहारिक विकल्प नहीं था.” उन्होंने ये भी कहा है की इस मिसाइल हमले का मकसद “सत्ता परिवर्तन” नहीं था. ट्रम्प ने कहा है की यह हमले सीरियाई सरकार के रासायनिक हथियार बनाने के ठिकानो पर किया गए है.

उन्होंने बताया की इन हमलो का मुख्य उद्देश्य रासायनिक हथियारों का इस्येमाल, प्रसार और उत्पादन पर अंकुश लगाने की कोशिश थी. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा की या किसी इंसान नहीं बल्कि एक शैतान के अपराध है. किन्तु सीरिया के सरकार ने ऐसे किसी भी हमले इनकार कर दिया है. उन्होंने पहले इन हमलों को अफवा भी बताया था.ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तुर्की, जॉर्डन, सऊदी अरब, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड्स, इजरायल, स्पेन सभी अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं. ये सभी देश सीरियाइ राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ हैं. सीरिया में साल २०१३ में पहली बार रासायनिक हमला किया गया था. सीरियाई सेना ने पूर्वी घोउटा में राकेट से सरीन नर्व एजेंट छोड़ा था. इसमें १०० से ज्यादा लोग मारे गए थे

सीरियाई सेना ने अप्रैल २०१७ में खान शेखाउन में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया था. इसमें ८० लोग मारे गए थे. इस साल की शुरुआत में भी सीरिया सेना ने विद्रोहियों के खिलाफ गैस का इस्तेमाल किया था. फिर ७ अप्रैल को रासायनिक हमला किया गया.नाटो के सेक्रेटरी जनरल जेन्स स्टाेलेनबर्ग ने कहा “मैं यूएस, यूके और फ्रांस की कार्रवाई का समर्थन करता हूं. इससे सरकार की आनेवाले समय में सीरिया के लोगों पर रासायनिक हमले करने की क्षमता कम हो जाएगी. नाटो ने कहा की वह रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लए खतरा मानता है. यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सामूहिक और प्रभावी प्रतिक्रिया की मांग करता है.” अमेरिका के राष्ट्रपति ने पिछले महीने कहा था की हम अपना सैन्य सीरिया से वापस लायेंगे, किन्तु अब वे इसपर पुनर्विचार कर रहे है.