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सीरिया में हुए हमले को इस मुस्लिम देश ने अमेरिका को दिया पूरा समर्थन

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सीरिया सरकार के रासायनिक हमलों के ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किये गए हमलों के बाद दुनिभर से अलग अलग प्रतिक्रियाएं आ रही है. कुछ देशो ने इसे बिना किसी साबुत किया गया हमला बताया है तो वही अधिकतर देश इस हमले के समर्थन में उतर आये है. अमेरिका ने बीते शुक्रवार सीरिया में हवाई हमले कराये थे. जिनमे सीरिया के रासायनिक हथियार बनाने और रखने के ठिकानो को निशाना बनाया गया था. इस हमले में अमेरिका को फ्रांस और ब्रिटेन से भी समर्थन मिला था. अमेरिका द्वारा किये गए इन हवाई हमलों का अब सऊदी अरब ने भी समर्थन किया है.

सीरिया में हुए कैमिकल हमलों के बाद ट्रम्प ने इस हमले के खिलाफ जवाब देने की धमकी दी थी. जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने यहाँ सैन्य कार्यवाही के आदेश दे दिए थे. अमेरिका ने फ्रांस और ब्रिटेन के सहयोग से सीरिया में १०० से उपर मिसाइल दागी. अमेरिका द्वारा सीरिया में मिसाइल दागने के बाद सऊदी अरब ने अमेरिकी सरकार की तरफ अपना समर्थन जाहिर किया है. सऊदी अरब ने अपने बयान में कहा है की “यह हमले सीरिया की सरकार द्वारा किये गए नागरिकों के खिलाफ के रासायनिक हमलों का जवाब है.” और कहा की “अमेरिका के नेतृत्व वाले हमलों के लिए वह अपना पूर्ण समर्थन देते हैं.” सऊदी प्रेस एजेंसी ने आधिकारिक स्रोत के हवाले से कहा कि सीरिया सरकार द्वारा महिलाओं और बच्चों समेत बेगुनाह नागरिकों पर रसायनिक हथियार का प्रयोग किया गया है.

जिसकी प्रतिक्रिया में उसपर अमेरिका द्वारा सैन्य कार्रवाई की गई. इस एजेंसी ने कहा की ‘अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित ऐसे हथियार का इस्तेमाल सीरिया की सरकार द्वारा वहां के लोगों पर कई वर्षो से किया जा रहा है.’ एजेंसी ने आगे कहा कि सऊदी के विदेश मंत्रालय ने सीरिया में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की सैन्य कार्रवाई को किंगडम का पूरा समर्थन जाहिर कर दिया है. इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा सीरियाई शासन के खिलाफ बेहतर ढंग से किए गए हमलों की प्रशंसा की और घोषणा की के यह मिशन पूरा हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि संयुक्त अभियान का मकसद रसायनिक हथियारों के उत्पादन, इसे फैलाने और इसके प्रयोग के खिलाफ कड़ा निवारक पैदा करना था

इस हमले के बाद फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां यवेस लि दरियान ने शनिवार को दावा किया कि ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका द्वारा सीरिया पर किए गए इन मिसाइल हमलों में सीरिया के रसायनिक हथियारों के भंडार के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि अब सीरिया अपना सबक सिख गया है. जबकि ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा कि सीरिया में ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका द्वारा हवाई हमला रसायनिक हथियारों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है. उन्होंने इस हमले की कार्रवाई को एक बड़ी सफलता बताया है. रूस, ईरान और चीन ने अमेरिका और सहयोगी देशों के इस हमले का विरोध किया है. सऊदी गैजेट के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा है कि उन्होंने दमिश्क के पास पूर्व विद्रोही शहर डौमा पर एक रासायनिक हमले के जवाब में हमलों की शुरुआत की थी
और मिसाइल के अलावा कोई और विकल्प नहीं था. फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रॉन ने कहा है कि पेरिस में सबूत है कि सीरिया के शासन ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है. पुरे विश्व के नेताओं ने सीरिया में हुए कैमिकल हमलों की निंदा की, कई नेताओं ने इस हमले का जिम्मेदार असद को माना और कहा की “असद का रासायनिक हथियारों का उपयोग करने का रिकॉर्ड रहा है, वहीं डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले के बाद असद को जानवर तक कहा था.” सीरिया में किये गए इन हमलों के बाद सीरिया के सहयोगी देश रूस और ईरान ने बशर अल असद के शासन के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले हमलों के परिणामों की चेतावनी जारी कर दी है. जिसमे अमेरिका में रूस के राजदूत अनातोली एंटोनोव ने एक बयान में कहा है की “हमने चेतावनी दी थी की ऐसी किसी भी कार्यवाही के परिणाम बहुत बुरे होंगे.
अब इसके परिणामों की जिम्मेदारी वाशिंगटन,लन्दन और पेरिस की होगी.” रुसी राजदूत अनातोली एंटोनोव ने कहा की “रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सीरिया पर हवाई हमले से रूस और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के बीच टकराव होने की आशंका बढ़ गई है. अगर दोनों देशों के बीच जंग शुरू हुई, तो इसके विनाशकारी परिणाम सामने आ सकते हैं.”अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने एक ट्वीट द्वारा कहा था की रूस, उस राष्ट्र का साथ नहीं दे सकता जो रासायनिक हमले करता हो और आनंद लेता हो. ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी अपने एक बयान में कहा है कि “निस्संदेह, संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगी, जिन्होंने सीरिया के खिलाफ किसी भी सबूत के बिना यह सैन्य कार्रवाई की है, तो अब इसके परिणामों की जिम्मेदारी भी इन देशों को लेनी होगी.”
ईरान सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद और रूस के साथ प्रमुख सहयोगी है, जो की सैन्य सलाहकारों को प्रदान करता है. उन तीनों जगहों को मिसाइलों से निशाना बनाया गया है. ट्रम्प ने सीरिया की असद सरकार के समर्थक देशों रूस और ईरान से अपनी नीतियों में बदलाव करने को भी कहा है. सीरिया पर इन हमलों के बाद पेंटागन ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि सीरिया में तीन जगहों को निशाना बनाया गया. दमिश्क का साइंटिफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट, ऐसा आरोप है कि यहां केमिकल और बायोलॉजिकल हथियार बनाए जाते हैं. होम्स, यहां रासायनिक हथियार को रखा जाता है. और होम्स के पास का एक ठिकाना, जहां रासायनिक हथियार उपकरण को स्टोर किया जाता है और यह एक अहम कमांड पोस्ट है. ब्रिटेन की प्रधान मंत्री टेरिजा मे ने इस हमले में ब्रिटेन के शामिल होने की पुष्टि की है.

उन्होंने कहा है की “बल प्रयोग के अलावा कोई और व्यवहारिक विकल्प नहीं था.” उन्होंने ये भी कहा है की इस मिसाइल हमले का मकसद “सत्ता परिवर्तन” नहीं था. ट्रम्प ने कहा है की यह हमले सीरियाई सरकार के रासायनिक हथियार बनाने के ठिकानो पर किया गए है. डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया की इन हमलो का मुख्य उद्देश्य रासायनिक हथियारों का इस्येमाल, प्रसार और उत्पादन पर अंकुश लगाने की कोशिश थी. सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा की या किसी इंसान नहीं बल्कि एक शैतान के अपराध है. किन्तु सीरिया के सरकार ने ऐसे किसी भी हमले इनकार कर दिया है. उन्होंने पहले इन हमलों को अफवा भी बताया था. ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, तुर्की, जॉर्डन, सऊदी अरब, इटली, जापान, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड्स, इजरायल, स्पेन सभी देश अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं. ये सभी देश सीरियाइ राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ हैं.