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२०१९ के लिए PM मोदी का ये मास्टरप्लान आया सामने, कांग्रेस को ख़त्म होने का डर

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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी दोनों लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के साथ-साथ चुनावों की प्रकिया शुरू करना चाहते है.टिप्पणीकारों ने हाल के हफ्तों में उल्लेख किया है कि “वन नेशन, वन पोल” के लिए बढ़ते झगड़े ने लोकसभा चुनाव को झपकी के बारे में अनुमान लगाया है.

भारत में सबसे केंद्र पर मोदीजी की सत्ता आई है तभ से लोगों का विश्वास बैठ गया है सरकारी कार्यों पर.लोगो को अब विश्वास है की सरकार उनके लिए और उनसे जुड़े सभी कार्यो को अंजाम देगी. ये तो हमे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा है की मोदी ने जब से सत्ता संभाली है कैसे लोग मोदी सरकार यानी की भारतीय जनता पार्टी को भारत के अधिकतम राज्यों में अपनी जीत हासिल कर पायी है.मोदीजी सिर्फ देश में प्रसिद्ध नहीं है उनके नए तकनिकी और योजना के चलते देश के बहार भी उनको चाहने लगे है.यह बात तो सभी लोगो ने तभी देख ली थी जब मोदी जी स्वीडन गए थे. वहां मिले सम्मान और प्यार से भारत का नाम मोदी जी ने विश्व में बहुत ऊँचे स्थान पर पंहुचा दिया है.

मोदीजी ने देश के हित के लिए कई ऐसे फैसले ले चुके है और वे फैसले सफल भी हुए है.अब मोदीजी एक ऐसा फैसला लेने की सोच रहे है जिससे जानने के बाद लोगों को और भी गर्व होगा अपनी सरकर पर.मोदी जी का एक मास्टरप्लान है की वे २०१९ में विधान सभा और लोक सभा के चुनावों को एक साथ करने की प्रक्रिया शुरू करना चाहते है. यह चीज़ पढ़ने में जितनी साधारण सी लग रही है यह उतनी ही देश के हित में भी है.चुनाव आयोग ने १९८३ में सुझाव दिया था कि एक प्रणाली विकसित की जानी चाहिए ताकि लोकसभा और राज्य विधायी असेंबली के चुनाव एक साथ आयोजित किए जा सकें. न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी के नेतृत्व वाले कानून आयोग ने मई १९९९ में अपनी १७० वीं रिपोर्ट में कहा था कि “हमें उस स्थिति पर वापस जाना होगा जहां लोकसभा के चुनाव और सभी विधानसभाएं एक साथ आयोजित की जाती हैं.

यह तो हम सभी जानते है की चुनाव की प्रक्रिया में कितना खर्चा होता है. और जब भी लोक सभा और राज्ये सभा के चुनाव अलग अलग होते है, तो यकीनन उस चुनाव में लगने वाले खर्चा भी अधिक होता है. भारत में कुल २९ राज्ये है, और यह बताया गया है की हर एक विधानसभा चुनाव में करीब ३ अरब रूपये खर्च होते ही है. तो इसका ये मतलब तो आप भी लगा ही सकते है की कितना खर्चा होता होगा एक चुनाव में.यही कारण है की मोदी सरकार चाहती है की २०१९ से पहले वे लोकसभा और विधानसभा चुनाव को एक साथ आयोजित कर पाए. इससे देश के लोगो का समय भी बच जायेगा और लोगो का सरकार को दिया हुआ पैसा भी. हर चुनाव में लगने वाले इतने पैसे अब बच पाएंगे.