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CM योगी आये एक्शन में, जेल में कैद हिन्दुओं पर ले लिया ये बड़ा फैसला

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जब से सीएम योगी उत्तरप्रदेश के राज गद्दी पर बैठे हैं पुरे उत्तरप्रदेश का काया पालट करने में जुटे हुए हैं. योगी आदित्यनाथ के प्रशंसक हद से जादा बढ़ गए हैं. अपने तेज काम करने से और यूपी के हित के बड़े निर्णय लेने में एक काबिल और कामयाब सीएम बन गए हैं. योगी सरकार ने मुजफ्फर नगर और शामली दंगे को लेकर जो १३१ मुक़दमे दर्ज किये थे उन्हें अब हटाने की कोशिश में सरकार लग गई हैं. योगी सरकार ने इस मामले का अहवाल मंगवाया हैं, सीएम की सरकार का कहना हैं की इस मेसे जादातर मामले राजनैतिक घटनाओं से प्रेरित थे.

मुजफ्फरनगर और शामली हिंसा में शामिल आरोपियों पर अब यूपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया हैं, ये हिंसा २०१३ में घटी थी जिनमें शमिल लोगों पर से केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई हैं. इस हिंसक दंगों में ५०० से जादा के केस दर्ज हो गए थे इस मामले में हत्या के १३ और ११ लोगों की हत्या करने की कोशिश के मामले हैं. जिन्हें अब वापस लिया जा रहा हैं. जो केस वापस लिए जा रहे हैं ओ सभी हिन्दू लोगों पर के हैं. इस कांड में ६२ लोग मारे गए थे और कई लोग बेघर भी हुए थे. उस वक्त की पार्टी समाजवादी पार्टी ने ये सारे मुक़दमे दर्ज करवाए थे. बीजेपी संसद संजीव बालियान का कहना हैं की तत्कालीन पार्टी समाजवादी ने जानबूचकर लोगों को दिखने के लिए फर्जी आरोप जनता के ऊपर दर्ज करवाए हैं. जिन्हें ख़ारिज करना आवश्यक हैं.

इस मामले में कई सारे बचों का और महिलों का भी नाम शामिल हैं, संजीव बालियान ने सूत्रों से बात करते हुए कहा था की जिनके ऊपर केस दर्ज किया गया हैं ओ सभी आम और गरीब लोग हैं जिनके ऊपर सपा ने फर्जी आरोप लगाये हैं, एक पुरे समुदाय को इस मामले में घेर लिया था जिसमे गरीब घर की महिला और बच्चे भी शामिल थे. लेकिन ये मुक़दमे पूरी जाँच करके जो फर्जी हैं उन्हें ही वापस लेने वाले हैं. साथ ही उन्होंने कहा की इस मामले में निर्दोष महिला बच्चे फसे हुए हैं जिनको मुक्त करने के लिए ५ साल से कोर्ट कचेरी के चक्कर काट रहे हैं जिनकी अब मुक्तता होना जरुरी हैं. इसमें हत्या कोई मुकदमा नहीं हैं ऐसा संजीव जी का कहना हैं, और ऐसे मुक़दमे वापस लेने की मांग तक सीएम के पास किसी ने की नहीं हैं सिर्फ तोड़ फोड़ के मामले दफा करने की मांग पार्टी ने सीएम से की हैं जिसकी जाँच शुरू हैं.

इस मामले में विरोधी पक्ष नेता भी जवाब मांगने लगे हैं उनका कहना हैं की कोई अपराधी हो तो उन्हें योगी सरकार सक्त सजा देती हैं तो दोफ फोड़ के मामले के इन अपराधियों को क्यूं नहीं देती? लेकिन बीजेपी सरकार का कहना हैं की इस मामले में फर्जी केस दाखिल किये गए हैं जीने निर्दोष लोगों को पकड़कर जेल में डाला गया हैं, जो की गरीब और लाचार बच्चे तथा महिलों को शामिल किया गया हैं ऐसे फर्जी केस जाँच करके तुरंत ही बंद कर दिए जाने वाले हैं. साथ ही ऐसे केस जल्द ही सिमटे जायेंगे ऐसी उम्मीद भी योगी सरकार से जताई हैं. जिस पर विरोधी भारी मात्रा में टीपनी भी करती दिखाई दे रही हैं उनका कहना हैं की योगी सरकार एक बड़े ख़ास समुदाय को खुश करने में लगी हुई हैं.

बीजेपी के कई संसद का इस मुद्दे को स्वीकार कर ये कहना हैं की इस मामले में दर्ज हुए सभी लोगों को इससे बरी करना चाहिए ये. सपा सरकार ने लोगों को खुश करने के लिए सीधे लोगों को इसमे फसाया था. इसमें भी सपा सरकार ने राजनीती की थी इसकी पूरी जाँच करके ये मुद्दे फिरसे उठाने चाहिए ताकि निर्दोष लोगों की इसमेसे राहत की सास मिल पाए, इसके लिए बीजेपी के सभी सांसदों ने इसका पूरा समर्थन योगी सरकार को दिया हैं, जिसके चलते योगी ने इस मुद्दे पर जाँच शुरू कर इस पर काम करना जारी कर दिया हैं, कई ऐसे विरोधी पक्ष हैं जो इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव लाने की कोशिश कर राही हैं, लेकिन अब सीएम योगी निर्दोष लोगों को मुक्त करके ही छोड़ने वाली हैं.