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CM योगी ने बदल दिया आम्बेडकर का नाम, रख दिया ये नया नाम

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उत्तरपदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने कर दिया हैं, एक बड़ा फैसला इस फैसले को लेकर उठ गया है राजकीय धुवा. , सीएम योगी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए संविधान के ऊपर एक बदलाव किया हैं, बाबासाहेब अंबेडकर ने जो इंडिया की राज्यघटना लिखी थी जिसे कोई मिटा नहीं सकता, लेकिन अब यूपी सीएम आदित्यनाथ ने इसमें कुछ बदलाव किये हैं, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ अपने काम अच्छे और तेज काम करने के लिए जाने जाते हैं. योगी ने यूपी में कई कायदे कानून बनाये हैं, हिन्दुओं के लिए बुचड खाने तक बंद किये हैं, अंटी रोमियो ब्यूरो भी चालू किये हैं जिससे यूपी की महिला और लडकिय सुरक्षित रहे.

उत्तरप्रदेश सीएम ने यूपी में बाबासाहेब आंबेडकर के नाम में बदलाव करते हुए उनके पिता का नाम उनके बिच में जोड़ दिया हैं, उनके नाम में रामजी शब्द का इस्तेमाल किया हैं, अब से उत्तरप्रदेश में बाबासाहब अंबेडकर को डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर के नाम से जाना जायेगा. ऐसी प्रथा जादा टार महाराष्ट्र में दिखाई देती हैं, महाराष्ट्र में बेटे के नाम के बाद अपने पिता का नाम जोड़ा जाता हैं, उसके बाद में अपना सरनेम लगाया जाता हैं, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के नाम में भी उनके पिताजिका नाम शामिल था उनका पूरा नाम था रामजी मालोजी सत्तान. अब यूपी में भी बाबासाहेब अंबेडकर के नाम में उनके पिताजी रामजी का नाम शामिल होने वाला हैं, अब से इस बड़े फैसले के बाद बाबासाहब अपने पुरे नाम से जाने जायेंगे.

अब से संविधान के ऊपर भी इस नाम के बदलाव नजर आयेंगे संविधान के पन्नो पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम बदलकर उनके पिता का नाम शामिल करके डॉ. भीमराव मालोजी अंबेडकर रखा जायेगा. यही नहीं अब बाबासाहेब के सरनेम में भी बदलाव किये जाने वाले हैं, अब से यूपी में हिंदी भषा का उपयोग करके (आमबेडकर) ऐसे लिखा जायेगा नाकि अंबेडकर. ये सुझाव माननीय मुख्यमंत्री जीको यूपी राज्यपाल राम नाइक ने दिया था इस सुझाव के बाद सरकार ने इसपर काफी विचार भी किया था और अब जा के ये बड़ा फैसला लिया गया हैं. अब से हायकोर्ट से बाबासाहब के सरे रिकॉर्ड के नाम अब बदल दिए जाने वाले हैं. ये प्रक्रिया काफी अरसे पहिले यूपी में शुरू हो गई थी. दिसम्बर २०१७ से इसके ऊपर सभी बड़े लोगों के विचारविमश शुरू थे.

राज्यपाल राम नायक ने इंडियन प्राइम मिनिस्टर नरेन्द्र मोदी और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को ख़त लिखाकर इस बड़े फैसले की मांग की थी. कहा जा रहा हैं की खुद बाबासाहब ने भी भीमराव रामजी आंबेडकर नाम से ही संविधान के ऊपर हस्ताक्षर किये थे, जिसको भारी मात्रा से पाठिंबा भी मिल रहा हैं, काफी लोगों का यही मानना हैं की बाबासाहब अपना यही नाम लिखते थे भीमराव रावजी आंबेडकर लेकिन बाद में उनके नाम से रामजी मिटा दिया गया, अब जाकर यूपी सरकार ने निर्णय लिया हैं की फी एक बार उनके नाम में उनके पिता का नाम जोड़ा जायेगा. यी बड़ी खबर सभी को मिलते ही इस बात के ऊपर अब सभी क्षेत्रों से अपनी राय आणि चालू हो गई हैं, अब इस मुद्दे को लेकर झगड़ा बनता दिखाई देने लगा हैं.

कई लोग इसे राजकीय मुद्दा बनाते हुए राजकीय स्थिति पर उठा रहे है, तो कही लोग मजे लेने के लिए इसके साथ राजनीती करने में लगे हुए हैं, जिन्होंने ये सुझाव दिया था ओ यूपी के राज्यपाल रामनायक हैं ओ खुद महाराष्ट्र से आते हैं, तो उन्होंने ऐसा करने की अपील सरकार से की थी. जिसे अब सरकार ने भी मजूरी दे दी हैं. यूपी में अब से बाबासाहेब अंबेडकर के नाम में जोड़ा जायेगा ” राम ” साथ ही अंबेडकर के नाम में भी बदलाव कर अब होने वाला हैं ” आमबेडकर ” हालाकि ये कोई बड़ा मुद्दा नहीं हैं, अपने पिता का नाम लगाना ये कोई बाड़ी बात नहीं हैं लेकिन इस मुद्दे को लेकर राजनीती जमकर होती दिख रही हैं, राजकीय वोट बैंक वाले लोगों ने अब बीजेपी को टारगेट करना शुरू कर दिया हैं.

सभी विरोधि पार्टिया अब इसका इस्तेमाल दलित लोगों के वोट पाने के लिए जमकर कर रहे हैं, उनका कहना हैं की यूपी राज्यसभा इलेक्शन के वक्त समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने एकसाथ गठबंधन किया था इसका बदला लेने के लिए योगी सरकार ने बाबासाहब के नाम उनके पिताजी राम का इस्तमाल किया हैं. इसीलिए इसे राजकीय नजरिये से देखा जा रहा हैं. उनका कहना हैं की बीजेपी अब दिखाना चाहती हैं की ओ दलितों के साथ ही इसी लिए ओ ऐसा कर रही हैं, ऐसा कहना विरोधी पक्षों का बीजेपी के ऊपर हैं और ओ इसीलिए नाम बदलने के खिलाप हैं. साथ विपक्ष के कई नेताओं ने इस मुद्दे पर बातचीत करने को नाकारा हैं, उन्होंने कहा हैं की इस बात की पूरी जानकारी लेकर इस पर बातचीत के लिए हाजिर रहेंगे.

लेकिन विरोधी पक्ष इन सब बैटन में एक बात भूल रहा हैं की ये बात अब सामने आई हो जब चुनाव का टाइम हे लेकिन इसके संबंधित प्रस्ताव २०१७ मेही दिसंबर महीने में दिया गया था नब कोई चुनाव नहीं था और नहीं नजदीक था, इसपर बीजेपी ने कोंग्रेस को गौर करने को कहा हैं. इस शिफारिश में कहा गया था की बाबासाहेब जिस नाम से राजकीय समेत सभी कागजादों पर अपने हस्ताक्षर अपने पुरे नाम से ही करते हैं. सरकार इस विषय पर इतने दिनों तक काम कर रही थी सभी राजकीय कामकाज पुरे कर रही थी सभी बड़े लोगों के राय लेने में लगी हुई थी. कुछ दिन पहले केंद्र मंत्री IT मिनिस्टर ने संविधान से जुड़े कुछ चीजे दिखाई थी उन्होंने दिखया था की कैसे संविधान में राम और कृष्ण के पोस्टर छपे हुए हैं.