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Jerusalem को लेकर भारत ने इसलिए किया मित्र Israel और America का विरोध

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दुनिया में सबसे खतरनाक देशो में से एक इजराइल  और भारत इन दोनों के रिश्ते कितने मजबूत है. ये पूरी दुनिया को पता है. लेकिन कुछ दिनों पहले की एक घटना ने दोनों देशो के बिच दरारे आयी है. और इसीके कारन भारत-इजराइल के रिश्तो पे लोगोंको सोचने पे मजबूर कर दिया है.

दरसल इस बार का मामला ही कुछ अलग सा है, जिसमे जेरूसलम को इजराइल की राजधानी घोषित करने के मुद्दे पर यूनाइटेड नेशन में बहस चल रही है. इसमें लगभग सभी देश इजराइल के खिलाफ है. सिवाय अमेरिका के. अमेरिका एकमात्र देश है जो इस मुद्दे पर इजराइल के साथ है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जेरूसलम को इजराइल की राजधानी घोषित कर दी थी. जिस दिन से अमेरिकी राष्ट्रपति का ये बयान सामने आया है उसी दिन से अमेरिका के इस फैसले पर लगभग पूरी दुनिया ने विरोध जाताना शुरू कर दिया है. गुरूवार के दिन  संयुक्त राष्ट्र के असेम्बली ने भी अमेरिका के इस फैसले का विरोध जताने वाले प्रस्ताव को पारित कर दिया है.मतलब अन्य देशो का प्रस्ताव जिसमे अमेरिका के इस फैसले का विरोध किया है उसे स्वीकार है.

सयुक्त राष्ट्र सभा में इस मामले पर सभी देशो की वोटिंग की गयी. BJP नेता स्वप्न्दास गुप्ता  ने भी मोदी सरकार से ट्वीटर के जरिये इस मामले में इजराइल का साथ देने की मांग की थी. उनका ये मानना था की एक तो भारत को इस वोटिंग से दूर रहना चाहिए या फिर अमेरिका के साथ जाकर इजराइल का समर्थन देना चाहिए. लेकिन भारत ने एसा कुछ नहीं किया. भारत ने भी इसे गैर बताते हुए अन्य देशो की तरह अमेरिका और इजराइल के खिलाफ वोट दिया. तो अब सवाल ये उठता है की आखिर भारत ने करीबी मित्र दोस्त इजराइल और अमेरिका के खिलाफ वोट क्यों दिया?  जानकारी की माने तो इसके कही वजह है, उन्होंने  BBC हिंदी को बताते हुए कहा की, जेरूसलम के मुद्दे को लेकर सुयुक्त राष्ट्र में बहुमत था. लगभग सभी मुल्क इनके साथ नहीं थे. इसलिए भारत भी उन देशो का साथ देते हुए इजराइल और अमेरिका के खिलाफ गया. अंतराष्ट्रिय रूप से देखा जाए तो इजराइल और अमेरिका के खिलाफ ये फैसला भारत के हित में ही है.