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PM मोदी की इस चाल से भारत को मिली कुटनीतिक जीत, बर्बाद हुआ ये देश

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पाकिस्तान अपनी हरकतों से कभी बाज नहीं आता. उसे आये दिन किसी ना तरह की मुश्किलों सामना अब करना पड रहा है. इस बार पकिस्तान को एक ऐसी सजा मिली है जिससे वह बहुत बड़ी मुश्किल में फास गया है.

कुछ ही दिनों पहले अमेरिका ने पाकिस्तान को अपनी तरफ से दी जाने वाली अपनी करोडो डॉलर की निधि रोक दी है. उन्होंने कहा था की पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठा रहा है और इस वजह से अब वो पाकिस्तान को कोई भी निधि देने के लिए इच्छुक नहीं है. इसके बाद पाकिस्तान ने बताया था की आतंकवादी हाफ़िज़ सईद पर कड़ी कार्यवाही की है और उसकी संपत्ति भी जप्त कर ली है. लेकिन यह सब एक नाटक था. इस वजह से पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा धक्का लगा है. पाकिस्तान में एक चीनी नागरिक की हत्या के बाद चीन ने भी अब उसका साथ छोड़ दिया है. चीन को पाकिस्तान का बहुत ही करीबी दोस्त माना जाता था. इसलिए अब पाकिस्तान बड़ी ही मुश्किल में है.

आतंकवाद को बढ़ावा देने औए उसके लिए धन मुहैय्या करने की निगरानी कैने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ‘फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स’, एफ ए टी एफ ने पकिस्तान को इस सूचि में शामिल करने का यह निर्णय लिया है. एफ ए टी एफ ने पकिस्तान को आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए ३ महीने का समय दिया था, लेकिन वह असफल रहा.  इस मुद्दे को लेकर पेरिस में ३ दिन से एक बैठक चल रही थी जिसमे अमेरिका ने पकिस्तान के खिलाफ एक प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव को ब्रिटेन, फ्रांस और भारत सह कई अन्य देशो ने समर्थन दिया. आश्चर्य की बात ये थी के चीन ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया. इस फैसले की आधिकारिक घोषणा कुछ ही दिनों में की जाएगी. चीन ने इस प्रस्ताव को पहले विरोध जताया था किन्तु बाद में समर्थन किया.

एफ ए ती एफ के इस कदम से पाकिस्तान पर बहुत गहरा असर होगा. सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर होगा. इस फैसले के बाद अब कोई देश पाकिस्तान से साथ व्यापार नहीं करेगा.इच्छुक कंपनियां, अंतरराष्ट्रिय बैंक और वित्त संस्थाएं भी अब यहाँ निवेश नहीं करेंगी. पाकिस्तान पहले से ही कर्ज में डूबा हुआ है. उसने चीन से भी करोडो डॉलर का कर्ज ले रखा है. अब देखना यह है की पाकिस्तान इस कर्ज को कैसे चूका पायेगा. एफ ए ती एफ में ३७ देश सदस्य है. टर्की को छोड़ सभी ३६ देशो ने पाक के खिलाफ अपना वोट दर्ज किया. इससे पिछली एफ ए टी एफ की सभा में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था की हम खुश है के अमेरिका की इतनी कोशिशो के बाद इस प्रस्ताव पर आम सहमति नहीं बनी. और पाकिस्तान अपने ऊन दोस्तों का शुक्रिया अदा करता है जिन्होंने पकिस्तान की मदत की.

लेकिन भारत और अमेरिका के दबाव से इस प्रस्ताव पर दोबारा मतदान करवाया गया. जिसमे ज्यादातर देशो ने पकिस्तान के खिलाफ अपना वोट दिया.पाकिस्तान को यह अंदाजा हो गया था की इस बार उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही हो सकती है इसीलिए उन्होंने हाफिज सयीद की संपत्ती जप्त करने और उसकी संघटना को आतंकवादी घोषित करने और नजरबन्द करने का झूठा नाटक किया. सच्चाई यह है की हाफिज अज भी खुला घूम रहा है और उसके आतंकी कैंप पकिस्तान में आज भी चल रहे है. पिछले साल ही अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी की वह अपनी आतंकी समर्थन की हरकतों से बाज आये या फिर उसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे. पकिस्तान की अर्थव्यस्था पर इसका होने वाला इसका गहरा असर और नजदीकी दोस्त चीन का साथ छुट जाना यह दोनों ही बातें पकिस्तान के लिए बहुत चिंता का विषय है.