Home विदेश PM मोदी के दबाव के कारन पाकिस्तान ने उठाया ये सख्त कदम

PM मोदी के दबाव के कारन पाकिस्तान ने उठाया ये सख्त कदम

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पकिस्तान पर आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए दुनियाभर से दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस दबाव की वजह से पकिस्तान आतंकियों पर कार्यवाही करने के लिए मजबूर हो गया है. इसी लिए सोमवार को पाक ने एक बड़े निर्णय की घोषणा की है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने १० आतंकियों की मौत की सजा को सोमवार को मंजूरी दे दी है. इन आतंकियों में पाकिस्तान के मशहूर सूफी कव्वाल अमजद साबरी के हत्यारे भी शामिल हैं. पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा ने बताया है कि इन आतंकियों पर विशेष सैन्य अदालत में मुकदमा चलाया गया था.

इस मुक़दमे की सुनवाई में अदालत ने इन आतंकियों को मौत की सजा सुनाई. उन पर ६२ लोगों की हत्या, सुरक्षा बलों और पेशावर के पाँच सितारा होटल पर हमले जैसे गंभीर आरोप हैं. सजा दिलाये गए आतंकियों के नाम मुहम्मद इशाक, मुहम्मद रफीक, मुहम्मद आरिश, हबीबुर रहमान, मुहम्मद फैयाज, इस्माइल शाह, मुहम्मद फजल, हजरत अली, मुहम्मद असीम और हबीबुल्ला बताये गए है. पकिस्तान पर आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए दुनियाभर से दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इस दबाव की वजह से पकिस्तान आतंकियों पर कार्यवाही करने के लिए मजबूर हो गया है. इसी लिए सोमवार को पाक ने एक बड़े निर्णय की घोषणा की है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने १० आतंकियों की मौत की सजा को सोमवार को मंजूरी दे दी है.

 इन आतंकियों में पाकिस्तान के मशहूर सूफी कव्वाल अमजद साबरी के हत्यारे भी शामिल हैं. पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा ने बताया है कि इन आतंकियों पर विशेष सैन्य अदालत में मुकदमा चलाया गया था. पकिस्तान मीडिया के बयान में कहा गया है की इन आतंकवादियों में से दो सुरक्षा बालो पर हुए हमलो में भी शामिल थे. पकिस्तान के मशहूर कव्वाली गायक थे. साल २०१६ में उनकी हत्या की गयी थी. २३ जून २०१६ को अमजद साबरी की कराची में मोटरसाइकिल हमलावरों ने तिन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पकिस्तान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. ४५ साल के गायक और उनके सहयोगी कराची के भीडभा वाले लियाकत्बाद इलाके में अपनी गाड़ी से सफ़र कर रहे थे. तभी म्तोर्च्यक्ले सवार बंदूकधारियो ने उनके वाहन पर गोलिया चलायी.

इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. दोनों को अब्बासी शहीद स्पताल ले जाया गया. जहा अमजद साबरी ने दम तोड़ दिया. उनकी मौत के बाद उनके परिवार ने पकिस्तान छोड़ने की तैयारी दिखाई थी. इनके परिवार का कहना था की उनकी जान को भी आतंकवादियों से खतरा हो सकता है. साबरी की हत्या के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन थलसेना प्रमुख जनरल रहील शरीफ एक उच्च-स्तरीय बैठक का आयोजन किया था जिस बैठक के वह अध्यक्ष थे. इस के दौरान जनरल रहिल शरीफ ने वादा किया कि जानेमाने सूफी गायक अमजद साबरी के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी’ और शहर को अपराध एवं आतंकवाद से निजात दिलाई जाएगी. शरीफ ने कहा था की ‘‘साबरी की हत्या के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी’’

पाकिस्तान इस्लामिक उग्रवाद और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों जैसे ख़तरों का सामना कर रहा है और ये ख़तरे आंतरिक हैं ना कि बाहरी. साथ ही देश की सभी संस्थाएं और सभ्य समाज चरमपंथ के ख़िलाफ़ समग्र रणनीति को लेकर एक मत नहीं है. ये सरकार का काम है कि वो शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करे, रोज़गार के अवसर पैदा करे, ख़ुफिया संस्थाओं के बीच तालमेल करे, न्याय प्रणाली को चुस्त करे. नफ़रत फैलाने वाले भाषणों पर प्रतिबंध लगाने के साथ देश के युवाओं को चरमपंथ से प्रभावित होने से रोकने के लिए स्पष्ट रणनीति होनी चाहिए. सरकार को इन सारे आयामों को समेटकर एक समग्र रणनीति बना कर काम करना चाहिए. पर सरकार ने भारत और अफ़गानिस्तान को लेकर पाकिस्तान की विदेश नीति का समर्थन करने वाले चरमपंथी गुटों को एक बचने का एक रास्ता दे दिया.

एक रणनीति के अभाव में सरकार ने कुछ गुटों को समर्थन दिया. पांच ब्लॉगर लापता हो गए, इनमें उदारवादी कार्यकर्ता सलमान हैदर का नाम भी शामिल है, हालांकि अब ये वापस घर आ गए हैं. कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को धमकी मिली है. अहमदिया समुदाय पर हमले हुए हैं और शिया मुसलमानों का नरसंहार किया गया है.मीडिया में नफ़रत भरे भाषणों की बाढ़ आ गई थी. ईशनिंदा के मामले भी बढ़े हैं. कुछ दिन पहले मुबंई हमले के कथित मास्टरमाइंड हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद कर दिया गया. इसे अमरीका के दबाव के रुप में देखा जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन उनकी संस्था जमात- उद- दावा पर प्रतिबंध लगा सकता है. हालांकि पाकिस्तान की सेना के एक अधिकारी का कहना है कि ये एक नीतिगत फैसला है और इसका विदेशी दबाव से कोई लेना देना नहीं है.

आतंक की घटनाओं के लिए पाकिस्तान पड़ोसियों को ज़िम्मेदार बताता है ना कि घरेलू समस्या. इससे चरमपंथियों को बढ़ावा मिलता है. तीन साल पहले जब जनरल राहील शरीफ़ ने देश के सेनाध्यक्ष का पदभार संभाला तो वो बार बार दोहरा रहे थे कि पाकिस्तान को देश के भीतर के चरमपंथ से निपटने पर ज़ोर देना चाहिए ना कि विदेशों को ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए. पाकिस्तान की सरकार आतंक की बड़ी घटनाओं का ज़िम्मेदार देश के भीतर चरमपंथी संगठनों की बजाय भारत या फिर अफ़गानिस्तान को ठहरा देती है. इसके अलावा सरकार और सेना के बीच मतभेदों के चलते चरमपंथी विचारों को फलने फूलने का मौका मिलता है. ये एक भ्रम की स्थिति है कि चरमपंथ पर कैसे काबू पाया जाए. अब तक पाकिस्तान की सेना के नए सेनाध्यक्ष जनरल कमर बाजवा ने भी दोहरया है कि चरमपंथ देशी ख़तरा है ना कि विदेशी.