pm मोदी को मिली सबसे बड़ी सफलता इस मामले में चीन रह गया भारत से पीछे

आपको बतादे की हमेशा खुदको एशिया का ताकदवर देश कहलाने वाला चीन अब भारत से रह गया है पीछे. बात यह है, की लन्दन में स्थित तेजा लेगातुम प्रोस्पेरिटी इंडेक्स ने रिसर्च किया और इस रिसर्च में ये सामने आया की भारत देश 20१२ के मुकाबले २०१७ में ४ स्थान करीब पहुंचकर इस रैंकिंग में १०० स्थान पर पहुंचा है. इंडेक्स की इस लिस्ट में चीन भारत के मुकाबले ९० स्थान पर है.

 

लेगातुम रिसर्च ने ये भी कहा की भारत में भ्रस्ट्राचार के खिलाफ नोट्बंदी और GST लागु की जाने से देश की GDP को नुकसान झेलना पड़ा है. लेकिन इन सबके बावजूद भी समृधि सुचकान्त के इस लिस्ट में भारत ने यह स्थान  हासिल करना बहुत मायने रखता है. इस रिपोर्ट का यह कहना है की भारत व्यावसायिक माहोल, आर्थिक गुणवत्ता और प्रशासन में सुधार की बदौलत चीन को पीछे छोड़ सकता है.लेगातुम रिपोर्ट ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा की, कानून बनाकर नियमोंको न्यायिक व्यवस्था में चुनोती देनी की क्षमता में भारत ने अहम् भूमिका निभाई है.रिपोर्ट में ख़ास कर बिज़नस की बढती ग्रोथ और इकनोमिक क्वालिटीस तथा पहली बार भारतियो का बड़ी संक्या में बैंक अकाउंट खुलवाने का दावा किया है. लेगातुम रिसर्च का ये साफ़ तोर पे कहना है की वर्ष २०१७ में भारत ने इकनोमिक क्वालिटी और एजुकेशन पिल्लर्स पर शानदार प्रदर्शन किया है.

आपकी जानकारी के लिए बतादे की ये रिपोर्ट तैयार करने के लिए २५९ देशो की लिस्ट में हर एक के १०४ विबीन्न पैलुओंको परखा गया. इस रिपोर्ट का कहना है की अब भारत में पहले की तुलना में आज लोगो का जीवनस्तर और पारिवारिक आमदनी ऊँची हुई है. चीन की बात करे तो चीन आर्थिक मौर्चे पर कमजोर पड़ा इसका कारन तह है की, वहा के लोग व्यापार करनेमे बाधाये और प्रोत्साहन की कमी महसूस कर रहे है. पिछले कुछ वर्षो की तुलना में इस वर्ष चीन ने शिक्षा के मोर्चे पर उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया है. भारत के लिए यह रिपोर्ट बहुत ही लाभदायक साबित हुआ है. इस रिपोर्ट के मुताबित अगर भारत इसी विकास दर पर कायम रहा तो आनेवाले कुछ सालो में भारत GDP के मामले में चीन से भी आगे जा सकता है.