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PM मोदी ने उठाया ये ऐतिहासिक कदम, पूरी दुनिया ने की प्रशंसा और माना लोहा

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भारत द्वारा किए गए सबसे भारी उपग्रह देश के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के दौरान बताये गए नए सॅटॅलाइट देश के लिए एक आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा है.छः टन या छह सेडान के संयुक्त वजन , हेवीवेट संचार उपग्रह जीएसएटी -11 ग्रामीण भारत के लिए एक वरदान, पहली बार उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं में प्रवेश करेगा.

भारत तेज़ गति से वैश्विक शक्ति बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है. यही कारण है कि भारत की ताक़त का अंदाजा आज पूरी दुनिया के वैज्ञानिक मान रहे हैं. ऐसे ही एक बार फिर भारत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद से भारत ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है जिससे देश में एक बड़ी डिजिटल क्रांति की शुरुआत हो जाएगी.इसरो से मिले खबर के अनुसार जल्द ही देश का सबसे वजनी कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-11 लॉन्च करने जा रहा है.इंडस्ट्री के विश्लेषकों का कहना है कि उपग्रह आधारित इंटरनेट भारत के दूरसंचार क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी होगा.ये भारत देश के लिए सबसे वजन वाले सॅटॅलाइट में शामिल होगा.उसका वजन ५.६ टन का होगा.ये भारत देश के लिए महत्वपूर्ण कदन कहलाया जायेगा.इस उपग्रह के प्रक्षेपित होने के बाद भारत के पास खुद का सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट होगा. सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट से हाई स्पीड कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी.

जीसैट-11 लॉन्च होने के बाद मोदी सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाने में खासा मददगार साबित होगा.जीसैट-11 सैटेलाइट इसरो के इंटरनेट बेस्ड सैटेलाइट सीरीज का हिस्सा है. इसका मकसद इंटरनेट स्पीड को बढ़ाना है. हाईइंटरनेट स्पीड के लिए जीसैट-11 से बेहतर इंटरनेट स्पीड मिलेगी.जीएसएटी -11 भारत द्वारा कक्षा में भेजे गए लगभग सभी संचार उपग्रहों की संयुक्त शक्ति के बराबर है.यह एकल पक्षी शास्त्रीय कक्षाओं के ३० उपग्रहों के नक्षत्र की तरह है.इस जीएसएटी -11 सबको कनेक्टिविटी मिल जाएगी और पुरे देश में इसका एक्सेस मिल सकेगा.इसका एक और फायदा ये है की कोई भी अभी बिना दिश लगवाये टेलीविज़न प्रोग्राम भी देख सकेंगे.जीएसएटी -11 से ४० जीबी/सेकंड की सबसे तेज स्पीड मिलेगी.इसके जैसे कई और फायदे है जिसका उपयोग देश के साइबर सुरक्षा में भी किया जा सकता है और इस सुरक्षा को एक नया कवच मिल सकता है.इस मिशन के द्वारा १८ महीनो में अंतरिक्ष में ३ सॅटॅलाइट भेजे जायेंगे.

पहला सैटेलाइट जीसैट-९ ओक्टुम्बर २०१७ में भेजा गया था. जीसैट-11 को इसी महीने भेजा जाएगा. तीसरा सैटेलाइट जीसैट-१० को साल के आखिर तक भेजने की योजना है.भारत के पास जो राकेट हैं उनकी क्षमता केवल ४ टन तक के वजनी ही उपग्रह ले जा सकते हैं.परन्तु जीसैट-11 बहुत बड़ा सैटेलाइट है, जिसके हरेक सौर पैनल ४ मीटर से भी बड़े हैं और यह ११ किलोवाट ऊर्जा का उत्पादन करेगा. अभी तक भारत के पास ऐसी क्षमता वाला सॅटॅलाइट नहीं था इसलिए भारत इस सबसे ज़्यादा वजनी उपग्रह को प्रक्षेपित करने के लिए साउथ अमेरिकी आइलैंड फ्रेंच गुयाना से एरियन-5 रॉकेट की मदद लेगा.इसके सफल लांच हो जाने के बाद भारत के गांव और शहरों में इंटरनेट की स्पीड काफी बढ़ जाएगी.अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार यह उपग्रह देश की इंटरनेट और दूर संचार सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला साबित होगा.लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किये गये इस सैटेलाइट की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जानकारों के मुताबिक, भारत ने अब तक जितने संचार सैटेलाइट छोड़े हैं, अकेले जीसैट-11 की क्षमता उन सबके बराबर है.